डिग्री पर लाखों खर्च के बाद भी छात्रों के पास नौकरी नहीं, देश में 40% ग्रेजुएट बेरोजगार
BTech Job Crisis India: आज के टाइम में इंजीनियरिंग डिग्री हर स्टूडेंट के लिए सबसे बड़ा ड्रीम माना जाता है। पेरेंट्स अपनी जिंदगीभर की सेविंग्स बच्चों की पढ़ाई पर लगा देते हैं। वे सोचते हैं कि डिग्री मिलते ही लाइफ सेट हो जाएगी। लेकिन आज का जॉब मार्केट कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।
हाल ही में आई The New York Times की एक रिपोर्ट ने हर किसी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में प्राइवेट कॉलेजों की बाढ़ आ चुकी है। छात्र 15 से 17 लाख रुपए खर्च करके BTech की डिग्री ले रहे हैं। लेकिन जब जॉब ऑफर की बात आती है, तो उन्हें महज 20 हजार रुपए महीने मिलता है।
इस छोटी सी सैलरी से एजुकेशन लोन की EMI चुकाना भी नामुमकिन हो जाता है। 25 साल से कम उम्र के लगभग 40% ग्रेजुएट्स आज बेरोजगार बैठे हैं। तो ऐसे में आइए जानें कि आखिर क्यों भारत का एजुकेशन सिस्टम और जॉब मार्केट इस मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।
BTech डिग्री और जॉब का असली सच
देश में B.tech की पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है। प्राइवेट कॉलेजों में फीस लगातार बढ़ रही है। छात्र ऑन-एवरेज 17 लाख रुपए खर्च कर रहे हैं। लेकिन पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी नहीं मिलती।
शुरुआती पैकेज सिर्फ 2.5 लाख सालाना मिलता है। यानी महीने की सैलरी केवल 20 हजार रुपए है। इतनी कम सैलरी में गुजारा करना बहुत मुश्किल है। छात्रों को अपने करियर की चिंता सता रही है।
प्राइवेट कॉलेजों की तेजी से बढ़ती संख्या
पिछले दस सालों में प्राइवेट कॉलेज तीन गुना बढ़े हैं। साल 2014 से 2024 के बीच ये बढ़ोतरी हुई। उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या 4.5 करोड़ है। ये संख्या साल 2014 के मुकाबले 41 परसेंट ज्यादा है।
दो तिहाई से ज्यादा छात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। प्राइवेट इंस्टीटूशन्स (प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन) का खर्च सरकारी से चार गुना है। अच्छी नौकरी की उम्मीद में परिवार कर्ज लेते हैं। शिक्षा का व्यापार बहुत तेजी से फैल रहा है।
एजुकेशन लोन और बढ़ता मानसिक तनाव
आजकल कई छात्र बेहतर करियर की उम्मीद में लाखों रुपए का एजुकेशन लोन ले लेते हैं। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद जब मार्केट में वैसी जॉब्स या पैकेज नहीं मिलते, तो तनाव होना लाजमी है।
लोन का भारी-भरकम ब्याज और हर महीने की ईएमआई (EMI) छात्रों पर शुरुआती उम्र में ही बहुत बड़ा आर्थिक दबाव डाल देती है। कम सैलरी में गुजारा करने के साथ-साथ सालों तक लोन चुकाना किसी मानसिक जंग से कम नहीं होता। जॉब मार्केट की अनिश्चितता और लोन रीपेमेंट की चिंता युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
ऐसे में नोएडा के हर्षित राय की कहानी बहुत भावुक है। वह AI और मशीन लर्निंग की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी डिग्री पर कुल 14 लाख रुपए खर्च होंगे। इसके लिए उन्होंने सात लाख का लोन लिया है।
उन्हें 10 लाख का सालाना पैकेज मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब वह आधी सैलरी पर काम को तैयार हैं। लोन का ब्याज चुकाने में छह साल लगेंगे। ग्रेजुएशन के बाद 10 प्रतिशत ब्याज शुरू हो जाएगा।
भारत में बढ़ती बेरोजगारी की दर
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टडी में बड़ा खुलासा हुआ। 25 साल से कम के 40 फीसदी ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। हर साल केवल 2.5 लाख अच्छी नौकरियां निकलती हैं।
इन नौकरियों में सैलरी 40 हजार से ज्यादा होती है। बाकी लाखों छात्रों को कम सैलरी में संतोष करना पड़ता है। एडुकेशनिस्ट कहते हैं कि ये बड़ा धोखा है। युवाओं को बेचा गया सपना अब टूट रहा है। डिग्री का मतलब अब अच्छी नौकरी बिल्कुल नहीं है।
वर्कफोर्स और सरकारी कॉलेजों की कमी
भारत में करीब सौ करोड़ लोग कामकाजी उम्र के हैं। दुनिया में ये कामकाजी आबादी सबसे ज्यादा है। हर साल यह आबादी 1.2 करोड़ बढ़ जाती है। गरीबी से निकलने का रास्ता सिर्फ उच्च शिक्षा है।
सरकारी कॉलेजों में एडमिशन पाना बहुत कठिन काम है। शीर्ष सरकारी कॉलेजों में पांच फीसदी से कम सीट है। बाकी छात्रों के पास सिर्फ प्राइवेट का विकल्प बचता है। मजबूरी में माता-पिता अपनी जमापूंजी दांव पर लगाते हैं।
स्किल्स और जॉब के बीच बड़ा अंतर
इंडस्ट्री की जरूरत और पढ़ाई में बड़ा अंतर है। कॉलेजों में पुराना सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। कंपनियों को प्रैक्टिकल ज्ञान वाले युवा चाहिए। थ्योरी रटने वाले छात्रों को नौकरी नहीं मिलती।
प्राइवेट कॉलेज केवल डिग्री बांटने में लगे हैं। क्वालिटी एजुकेशन न मिलने से समस्या बढ़ रही है। छात्रों को खुद से नई स्किल्स सीखनी होगी। तभी इस जॉब संकट से बचा जा सकता है।
तो भारत में प्राइवेट कॉलेजों की बढ़ती फीस और पुराने सिलेबस के कारण बीटेक डिग्री का वास्तविक मोल घट गया है। इससे लाखों युवा बेरोजगारी और एजुकेशन लोन के कर्ज तले दब रहे हैं।
कम सैलरी और स्किल्स के बड़े अंतर के चलते अच्छी नौकरियों का सपना टूट रहा है। ये युवाओं में गंभीर मानसिक तनाव पैदा कर रहा है। इस संकट से उबरने के लिए एजुकेशन सिस्टम में तत्काल सुधार, प्रैक्टिकल स्किल्स पर फोकस और क्वालिटी एजुकेशन का होना जरूरी है।
Reference:
- The New York Times
- Government Higher Education Survey (AISHE 2024 Report)
- Azim Premji University Study on Youth Unemployment in India
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