CBSE 12वीं ऑन-स्क्रीन मार्किंग क्या है? जानें क्यों फेल हुए छात्र 75% क्राइटेरिया में
समझें क्या है पूरा मामला
- सीबीएसई बोर्ड ने पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग से 98 लाख डिजिटल कॉपियों की जांच की।
- सख्त स्टेप मार्किंग के कारण साइंस सब्जेक्ट में छात्रों के काफी नंबर कट गए हैं।
- 75% न आने से जेईई एग्जाम पास करने वाले कई मेधावी छात्र एडमिशन से बाहर हुए।
- आर्ट्स और पेंटिंग जैसे विषयों में छात्रों ने रिकॉर्ड तोड़ 100 अंक हासिल किए।
- 18 मई से शुरू होगी रीवैल्यूएशन प्रक्रिया, छात्र ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
CBSE द्वारा जारी 12वीं के नतीजों ने एक नई बहस छेड़ दी है। इस साल बोर्ड ने पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल किया है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए लगभग 98 लाख कॉपियों की जांच पूरी की गई है। हालांकि बोर्ड इसे पारदर्शी बता रहा है, लेकिन साइंस छात्रों को नुकसान हुआ है।
मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे मुख्य विषयों में 100 अंक पाना कठिन हो गया। आंकड़ों के मुताबिक इस बार साइंस में परफेक्ट स्कोरर की संख्या काफी कम रही। गणित में 1283 और केमिस्ट्री में सिर्फ 1061 छात्रों को ही पूरे अंक मिले। फिजिक्स में यह संख्या और भी कम होकर महज 96 तक सिमट गई है।
आर्ट्स के छात्र साइंस से आगे क्यों?
दूसरी तरफ आर्ट्स और स्किल आधारित विषयों में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। पेंटिंग में 15 हजार 334 और साइकोलॉजी में 2 हजार 535 छात्रों ने 100 अंक हासिल किए हैं। इंफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिस में भी 3 हजार 326 छात्रों को पूरे 100 अंक प्राप्त हुए हैं। यह अंतर साइंस और अन्य संकायों के बीच स्पष्ट रूप से दिख रहा है।
क्या एडमिशन प्रक्रिया से बाहर होंगे मेधावी?
आईआईटी और NIT जैसे संस्थानों में एडमिशन के लिए 75% लाना जरूरी होते हैं। जेईई मेन में 90-99 पर्सेंटाइल लाने वाले कई छात्र यह क्राइटेरिया नहीं छू सके। सख्त डिजिटल चेकिंग और स्टेप मार्किंग के कारण छात्र इस आंकड़े से पिछड़ गए। अब ये मेधावी छात्र काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका असर इंजीनियरिंग कॉलेज के कट-ऑफ पर पड़ेगा। ऑन-स्क्रीन मार्किंग में शिक्षक CBSE द्वारा दी गई डिजिटल आंसर-की से बंधे थे। सिस्टम में हर स्टेप के लिए पहले से ही अंक तय कर दिए गए थे। अगर छात्र ने बीच के स्टेप नहीं लिखे, तो उसे अंक नहीं मिले।
क्यों भारी पड़ा शॉर्टकट लिखने का तरीका?
मैन्युअल चेकिंग में शिक्षक छात्र की समझ देखकर अक्सर कुछ रियायत दे देते थे। लेकिन डिजिटल सिस्टम में कंप्यूटर की सख्त गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य था। अगर 10 स्टेप का उत्तर छात्र ने कम स्टेप में हल किया, तो नंबर कटे। कोचिंग और डमी स्कूलों के कारण छात्रों की लिखने की आदत छूट गई है।
कैसे करें रीवैल्यूएशन के लिए आवेदन?
छात्र अब विस्तार से उत्तर लिखने के बजाय शॉर्टकट और एमसीक्यू पर निर्भर हैं। बोर्ड परीक्षा में यही शॉर्टकट तरीका छात्रों के कम नंबर आने की वजह बना। कॉपियों की स्कैनिंग को लेकर भी छात्रों ने कुछ तकनीकी समस्याओं के आरोप लगाए।
शिक्षकों का कहना है कि हर पेज को ठीक से स्कैन किया गया था। जो छात्र अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं, उनके लिए राहत की खबर है। सीबीएसई 18 मई से रिवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। छात्र तीन अलग-अलग चरणों में अपनी कॉपियों की जांच दोबारा करवा सकते हैं। इसके लिए छात्रों को आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
रीवैल्यूएशन के लिए कितनी फीस देनी होगी?
पहले चरण में अंकों की टोटलिंग की जांच के लिए 500 रुपए देने होंगे। दूसरे चरण में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका की डिजिटल कॉपी डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए प्रति विषय 700 रुपए का शुल्क बोर्ड द्वारा निर्धारित किया गया है। तीसरे चरण में छात्र चुने गए प्रश्नों की गहन जांच करवा सकते हैं।
रिवैल्यूएशन के अंतिम चरण में हर एक सवाल के लिए 100 रुपए लगेंगे। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय सीमा के भीतर आवेदन करें। यह प्रक्रिया उन छात्रों के लिए अंतिम उम्मीद है जिनका भविष्य दांव पर है। बोर्ड ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दावा किया है।
FAQ
- सीबीएसई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम क्या है और इसने छात्रों को कैसे प्रभावित किया?
यह एक डिजिटल जांच प्रणाली है जहां कॉपियां स्कैन करके जांची जाती हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान साइंस के छात्रों को हुआ। सख्त स्टेप मार्किंग नियमों के कारण उन छात्रों के नंबर कट गए जिन्होंने उत्तर के बीच के स्टेप्स नहीं लिखे थे। - आईआईटी और एनआईटी में एडमिशन के लिए सीबीएसई के रिजल्ट का क्या महत्व है?
आईआईटी और एनआईटी में एडमिशन के लिए 12वीं बोर्ड में कम से कम 75% (आरक्षित वर्ग के लिए 65%) होना जरूरी है। बोर्ड में कम नंबर आने पर छात्र जेईई क्वालीफाई करने के बाद भी एडमिशन से बाहर हो सकते हैं। - सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) 2026 की प्रक्रिया और शुल्क क्या है?
यह प्रक्रिया तीन चरणों (वेरिफिकेशन- 500 रुपए, फोटोकॉपी- 700 रुपए और रीवैल्यूएशन- 100 रुपए /प्रश्न) में होती है। छात्र 18 मई से आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर अपनी कॉपियों की दोबारा जांच करा सकते हैं।
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