CBSE 12th Result 2026: रिजल्ट में एमपी के सरकारी स्कूलों ने गाड़े झंडे, प्राइवेट स्कूल रह गए पीछे
Kaushiki | May 14, 2026, 10:59 IST
CBSE 12th Result 2026
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 में मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से कहीं बेहतर रहा। नवोदय विद्यालय सबसे आगे रहे, जबकि भोपाल रीजन देश भर में 19वें स्थान पर रहा। छात्राओं ने एक बार फिर लड़कों को पछाड़कर बाजी मारी है।
CBSE 12th Result 2026: सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के नतीजे आ गए हैं। इन नतीजों ने सबको चौंका दिया है। मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षा मॉडल की जीत हुई है। जवाहर नवोदय विद्यालय यानी JNV सबसे आगे रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी बहुत ही शानदार रहा। इन स्कूलों ने अपनी एकेडमिक स्ट्रेंथ दिखाई है। यह निजी स्कूलों के लिए बड़ी चेतावनी है। कम फीस में भी बेहतर पढ़ाई संभव है। सरकारी शिक्षकों ने यह सच साबित कर दिया। आइए डिटेल में जानें...
मध्यप्रदेश में नवोदय विद्यालयों का पास प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यहां कुल 98.16% छात्र पास हुए हैं। लड़कों का परिणाम 97.81% रिकॉर्ड किया गया है। वहीं लड़कियों ने 98.73% के साथ बाजी मारी।
यहां का अनुशासित माहौल इसकी बड़ी वजह है। यहां की रेजिडेंशियल अरेंजमेंट भी बहुत कारगर है। ग्रामीण छात्रों को यहां बहुत सहारा मिलता है। डेली मॉनिटरिंग से नतीजे बेहतर आ रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालयों ने अपनी बढ़त बरकरार रखी है। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% रहा है। लड़कों का रिजल्ट यहां 97.66% रिकॉर्ड हुआ। लड़कियों का पास प्रतिशत 98.11% तक पहुंचा।
यहां का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बहुत ही संतुलित है। प्रशिक्षित शिक्षकों ने बच्चों को अच्छा गाइड किया। रेगुलर इवैल्यूएशन से छात्रों में सुधार आया है।
मध्यप्रदेश में एकलव्य स्कूलों का भी पॉजिटिव परफॉरमेंस रहा है। इनका कुल पास प्रतिशत 85.47% रिकॉर्ड हुआ है। यहां लड़कियों का रिजल्ट 86.89% रहा है। लड़कों का पास प्रतिशत 83.46% दर्ज किया गया।
सबसे चिंताजनक खबर निजी स्कूलों से आई है। इन्हें इंडिपेंडेंट स्कूल भी कहा जाता है। यहां सबसे ज्यादा छात्र परीक्षा में बैठे थे। इसके बावजूद इनका रिजल्ट सबसे खराब रहा।
निजी स्कूलों का पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% है। यह बाकी सभी श्रेणियों से काफी कम है। यहां लड़कों का रिजल्ट मात्र 74.12% रहा। लड़कियों ने यहां भी 80.02% के साथ बढ़त बनाई।
महंगी फीस के बाद भी प्रदर्शन फीका रहा। विशेषज्ञों ने इस पर गहरी चिंता जताई है। प्रोफेशनल प्रेशर को इसकी मेन वजह माना गया। स्कूल अब केवल बिजनेस का केंद्र बन रहे हैं।
बोर्ड परीक्षा (CBSE Board) की तैयारी में यहां कमी दिखी। छात्रों पर मानसिक तनाव भी बहुत ज्यादा है। केवल दिखावे से रिजल्ट बेहतर नहीं होते। एजुकेशन क्वालिटी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
सीबीएसई 12वीं के नतीजों में भोपाल रीजन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। देश के 22 रीजन्स में ये 19th रैंक पर फिसल गया है। यहां का कुल पास परसेंटेज 79.43% रहा, जो नेशनल एवरेज (85.20%) से 5.77% कम है।
हालांकि, इस बीच फीमेल स्टूडेंट्स ने सीबीएसई एग्जाम मेंशानदार प्रदर्शन (सीबीएसई 12वीं कक्षा का रिजल्ट)किया है। छात्राओं का रिजल्ट 82.19% रहा, जो लड़कों (76.87%) से काफी बेहतर है।
चिंता की बात ये है कि रीजन के 12.14% छात्र सभी विषयों में फेल हो गए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल डिस्ट्रक्शन और कमजोर एकेडमिक मॉनिटरिंग के कारण रिजल्ट में यह गिरावट आई है।
बता दें कि, भोपाल रीजन में स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा है। यहां कुल 1291 सीबीएसई स्कूल संचालित हैं। पंजाब के लुधियाना के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा रीजन है।
तो ऐसे में इतने बड़े रीजन को संभालना बड़ी चुनौती है। एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर भी कई कमियां दिखने को मिल रही हैं। भारी संख्या में छात्र यहां से परीक्षा देते हैं। लेकिन इस बार रिजल्ट के मामले में भोपाल रीजन पीछे रह गया।
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केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी बहुत ही शानदार रहा। इन स्कूलों ने अपनी एकेडमिक स्ट्रेंथ दिखाई है। यह निजी स्कूलों के लिए बड़ी चेतावनी है। कम फीस में भी बेहतर पढ़ाई संभव है। सरकारी शिक्षकों ने यह सच साबित कर दिया। आइए डिटेल में जानें...
नवोदय विद्यालय बने प्रदेश के टॉपर
यहां का अनुशासित माहौल इसकी बड़ी वजह है। यहां की रेजिडेंशियल अरेंजमेंट भी बहुत कारगर है। ग्रामीण छात्रों को यहां बहुत सहारा मिलता है। डेली मॉनिटरिंग से नतीजे बेहतर आ रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालयों का भी रहा जलवा
यहां का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बहुत ही संतुलित है। प्रशिक्षित शिक्षकों ने बच्चों को अच्छा गाइड किया। रेगुलर इवैल्यूएशन से छात्रों में सुधार आया है।
मध्यप्रदेश में एकलव्य स्कूलों का भी पॉजिटिव परफॉरमेंस रहा है। इनका कुल पास प्रतिशत 85.47% रिकॉर्ड हुआ है। यहां लड़कियों का रिजल्ट 86.89% रहा है। लड़कों का पास प्रतिशत 83.46% दर्ज किया गया।
क्यों पिछड़ गए नामी प्राइवेट स्कूल
निजी स्कूलों का पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% है। यह बाकी सभी श्रेणियों से काफी कम है। यहां लड़कों का रिजल्ट मात्र 74.12% रहा। लड़कियों ने यहां भी 80.02% के साथ बढ़त बनाई।
महंगी फीस के बाद भी प्रदर्शन फीका रहा। विशेषज्ञों ने इस पर गहरी चिंता जताई है। प्रोफेशनल प्रेशर को इसकी मेन वजह माना गया। स्कूल अब केवल बिजनेस का केंद्र बन रहे हैं।
बोर्ड परीक्षा (CBSE Board) की तैयारी में यहां कमी दिखी। छात्रों पर मानसिक तनाव भी बहुत ज्यादा है। केवल दिखावे से रिजल्ट बेहतर नहीं होते। एजुकेशन क्वालिटी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
CBSE 12वीं रिजल्ट में भोपाल रीजन की रैंकिंग गिरी
हालांकि, इस बीच फीमेल स्टूडेंट्स ने सीबीएसई एग्जाम मेंशानदार प्रदर्शन (सीबीएसई 12वीं कक्षा का रिजल्ट)किया है। छात्राओं का रिजल्ट 82.19% रहा, जो लड़कों (76.87%) से काफी बेहतर है।
चिंता की बात ये है कि रीजन के 12.14% छात्र सभी विषयों में फेल हो गए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल डिस्ट्रक्शन और कमजोर एकेडमिक मॉनिटरिंग के कारण रिजल्ट में यह गिरावट आई है।
देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है भोपाल
तो ऐसे में इतने बड़े रीजन को संभालना बड़ी चुनौती है। एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर भी कई कमियां दिखने को मिल रही हैं। भारी संख्या में छात्र यहां से परीक्षा देते हैं। लेकिन इस बार रिजल्ट के मामले में भोपाल रीजन पीछे रह गया।
FAQ
- सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 में भोपाल रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कितना कम रहा?
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 में एमपी के भोपाल रीजन का पास प्रतिशत 79.43% रहा, जो कि राष्ट्रीय औसत (85.20%) से 5.77% कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण निजी स्कूलों का कमजोर प्रदर्शन है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए। इसके अलावा, कोविड-19 के बाद छात्रों के सीखने के स्तर में गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई की कमी भी महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। भोपाल रीजन देश के 22 रीजन में 19वें स्थान पर खिसक गया है। - सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कैसे किया?
जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) ने 98.16% और केंद्रीय विद्यालयों (KV) ने 97.90% पास प्रतिशत के साथ टॉप किया है। इनकी सफलता का राज यहां की अनुशासित शैक्षणिक व्यवस्था और रेजिडेंशियल मॉडल है। JNV में ग्रामीण बच्चों को 24 घंटे एक पढ़ाई वाला माहौल मिलता है। वहीं KV में प्रशिक्षित शिक्षक और राष्ट्रीय स्तर का अपडेटेड पाठ्यक्रम बच्चों की मदद करता है। इसके विपरीत, निजी स्कूलों में व्यावसायिक दबाव और बोर्ड परीक्षा पर कम फोकस होने के कारण रिजल्ट 76.85% पर ही सिमट गया। - 12वीं के नतीजों में जेंडर-वाइज प्रदर्शन का क्या ट्रेंड रहा है?
पूरे भारत और विशेष रूप से भोपाल रीजन में छात्राओं का दबदबा रहा है। भोपाल रीजन में लड़कियों का पास प्रतिशत 82.19% रहा, जबकि लड़कों का 76.87% दर्ज किया गया। यानी लड़कियां लड़कों से लगभग 5.32% अंकों से आगे रहीं। यह ट्रेंड सरकारी, निजी और एकलव्य सभी प्रकार के स्कूलों में एक समान दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राएं परीक्षा के प्रति अधिक गंभीर हैं और उनमें नियमित अध्ययन की आदत लड़कों की तुलना में अधिक है।
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