CBSE Board Exam में बड़ा बदलाव, 10वीं बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा ये पेपर
CBSE Three Language Formula: सीबीएसई ने तीसरी भाषा को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है। दसवीं की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा शामिल नहीं होगी। लेकिन स्कूल स्तर पर इसकी इंटरनल एग्जामिनेशन पास करना जरूरी होगा। यह नियम 2027-28 से दसवीं में आने वाले छात्रों पर लागू होगा।
नीति को लेकर कोर्ट में कानूनी चुनौती भी दी गई है। सीबीएसई का 10 जुलाई का सर्कुलर कहता है कि छात्रों को दसवीं में स्कूल आधारित तीसरी भाषा यानी आर3 (R3) असेसमेंट पास करना होगा। तभी उन्हें सेकेंडरी स्कूल परीक्षा का पास सर्टिफिकेट मिलेगा। अगर छात्र बोर्ड के अहम साल में यह आंतरिक परीक्षा पास नहीं कर पाते, तो स्कूलों को नतीजे आने से पहले उनकी दोबारा परीक्षा लेनी होगी।
नौवीं के छात्रों के लिए क्या नियम
CBSE Board Exam सर्कुलर में नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान है। अगर कोई छात्र नौवीं में तीसरी भाषा की स्कूल परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो भी उसे 2027-28 के लिए दसवीं में प्रमोट किया जाएगा। हालांकि उसे दसवीं में पढ़ाई के दौरान नौवीं की बकाया तीसरी भाषा परीक्षा पास करनी होगी।
यह 10 जुलाई का सर्कुलर (National Education Policy) पहले जारी हुए एक सर्कुलर से जुड़ा है। सीबीएसई ने 29 जून को बताया था कि तीन भाषा फॉर्मूला 2026-27 से छठी कक्षा से लागू होगा। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होनी जरूरी हैं।
विदेशी भाषा पढ़ने वालों को राहत
सीबीएसई गाइडलाइन के मुताबिक,जो छात्र कक्षा 7, 8 और 9 में पहले से अंग्रेजी के अलावा कोई विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं, वे उसे जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्हें एक भारतीय तीसरी भाषा भी पढ़नी होगी। पहले कक्षा 9 में तीसरी भाषा हटा दी गई थी।
लेकिन 29 जून और 10 जुलाई के दिशा-निर्देशों ने इसे 2026-27 से अनिवार्य कर दिया है। दसवीं के लिए यह नियम 2027-28 से लागू होगा। मौजूदा दसवीं बैच यानी 2026-27 वाले छात्रों पर यह सर्कुलर (Big decision of CBSE) लागू नहीं होगा।
नीति पर कानूनी चुनौती
सीबीएसई नई योजना के मुताबिक,तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक याचिका पर शिक्षा मंत्रालय ने कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सीबीएसई अपनी पुरानी 9 अप्रैल वाली स्थिति बहाल करे।
उस पुरानी नीति के तहत नौवीं में अनिवार्य तीसरी भाषा को 2029-30 तक टाल दिया गया था। 13 जुलाई को दाखिल नौ पन्नों के हलफनामे में सरकार ने अपनी नीति का बचाव किया है।
यह जानकारी द हिंदू अखबार को मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को नोटिस जारी किया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अवर सचिव सुभाष चंद ने सरकार का जवाब दाखिल किया।
सरकार का तर्क क्या है
केंद्र सरकार ने कहा है कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
सरकार ने आगे कहा कि तीन भाषा फॉर्मूला बहुभाषिता बढ़ाने, भारतीय भाषाओं को बचाने, छात्रों के मानसिक विकास और राष्ट्रीय एकता जैसे अहम लक्ष्यों को पूरा करता है।
FAQ
- दसवीं में तीसरी भाषा को लेकर नया नियम क्या है?
छात्रों को स्कूल स्तर पर तीसरी भाषा की परीक्षा पास करनी होगी। यह बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होगी, लेकिन पास सर्टिफिकेट के लिए जरूरी होगी। - अगर नौवीं में छात्र तीसरी भाषा में फेल हो जाए तो क्या होगा?
छात्र दसवीं में प्रमोट हो जाएगा। लेकिन उसे दसवीं में पढ़ाई के साथ नौवीं की बकाया परीक्षा पास करनी होगी। - क्या यह नियम अभी के दसवीं के छात्रों पर लागू होगा?
नहीं, यह नियम 2027-28 से दसवीं में आने वाले छात्रों पर लागू होगा। मौजूदा 2026-27 बैच पर यह लागू नहीं है।
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