क्या परिवार रोकता है करियर ग्रोथ? आईटी प्रोफेशनल की पोस्ट पर छिड़ी बहस
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- आईटी सेक्टर में 13 साल पुराने प्रोफेशनल ने करियर पर बड़ी बात कही।
- शख्स के मुताबिक भारत में परिवार होने से करियर की रफ्तार धीमी होती है।
- कंपनियों में हमेशा 'ऑनलाइन' रहने वाले लोगों को ज्यादा तरक्की मिलती है।
- शादी और बच्चे के बाद काम और निजी जीवन में संतुलन कठिन होता है।
- सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच बहस छिड़ गई है।
क्या शादी के बाद आईटी सेक्टर में ग्रोथ रुक जाती है?
आईटी सेक्टर में काम करने वाले एक अनुभवी शख्स ने अनोखा दावा किया है। उनका कहना है कि भारत में परिवार होने से करियर की तरक्की रुक सकती है। उन्होंने अपना 13 साल का अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा किया है। उन्होंने बताया कि कॉर्पोरेट सेक्टरमें माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है।
हमेशा काम के लिए उपलब्ध रहने का दबाव
आईटी प्रोफेशनल ने कई बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया है। फिलहाल वह एक नामी प्रोडक्ट-बेस्ड कंपनी में ऊंचे पद पर तैनात हैं। उनके मुताबिक हर कंपनी का वर्क कल्चर लगभग एक जैसा ही होता है। कंपनियां उन लोगों को अधिक पसंद करती हैं जो हमेशा प्रोफेशनल लाइफ के लिएउपलब्ध रहते हैं।
ऐसे लोग सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक ऑनलाइन रहते हैं। वे दिन में 12 से 14 घंटे लगातार काम करते हैं। वे देर रात तक ईमेल भेजते हैं और मीटिंग्स में हिस्सा लेते हैं। ऐसे कर्मचारियों को ऑफिस में अधिक समर्पित और मेहनती माना जाता है।
शादी और बच्चे के बाद बदल जाती है प्राथमिकता
रेडिट यूजर ने अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनकी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल गईं। वह अपनी हर शाम और वीकेंड पत्नी के साथ बिताने लगे। पिछले दो साल से वह एक छोटे बच्चे के पिता भी बने हैं।
अब उनके लिए उनका बच्चा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। इस वजह से वह ऑफिस को 14 घंटे का समय नहीं दे पाते। उन्हें लगता है कि परिवार को समय देने से करियर थोड़ा पिछड़ गया है। वह अब काम और घर के बीच संतुलन बना रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या प्रतिक्रिया दी? -
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोग आईटी प्रोफेशनल की बात से पूरी तरह सहमत नजर आए। एक यूजर ने कहा कि भारत में 'देर तक काम' को ही 'मेहनत' समझा जाता है। यह सोच प्रोफेशनल्स के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी खराब है।
वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि परिवार वाले लोग कम महत्वाकांक्षी नहीं होते। बस उनकी जिम्मेदारियां कुंवारे लोगों की तुलना में बहुत अधिक होती हैं। ऑफिस के बाद फोन न उठाना कोई गलत बात नहीं है। निजी जीवन का आनंद लेना भी उतना ही जरूरी होता है।
निजी जीवन का आनंद लेना क्यों है जरूरी? (Importance of Personal Life over Work)
बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही गहरी बात लिखी है। उन्होंने कहा कि भागदौड़ भरी इस जिंदगी का कोई फायदा नहीं है। अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ सुकून के पल नहीं बिता सकते। अगर आप अपने बच्चे के साथ नहीं खेल सकते तो तरक्की बेकार है।
एक अन्य कुंवारे यूजर ने भी अपना मजेदार अनुभव साझा किया है। वह ऑफिस के समय के बाद कभी फोन या ईमेल नहीं देखते। वह अपनी बाइक ट्रिप की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। वह चाहते हैं कि उनके बॉस उनकी निजी लाइफ को देख सकें।
क्या कंपनियां बदलेंगी अपना नजरिया?
इस पूरी बहस ने कॉरपोरेट इंडिया के वर्क कल्चर पर सवाल उठाए हैं। क्या तरक्की के लिए परिवार की बलि देना वाकई में जरूरी है? विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अब अपना नजरिया बदलना होगा। आउटपुट और स्किल को वर्किंग ऑवर्स से ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।
कर्मचारियों की कार्यक्षमता तब बढ़ती है जब उनका मन शांत रहता है। परिवार के साथ बिताया समय व्यक्ति को मानसिक तौर पर मजबूत बनाता है। एक खुशहाल कर्मचारी ऑफिस में भी बेहतर परिणाम दे सकता है। फिलहाल यह बहस जारी है कि तरक्की जरूरी है या सुकून।
ये भी पढ़ें...
Met Gala History: इस इवेंट में सेलिब्रिटी क्यों पहनते हैं अतरंगी कपड़े, जानें पार्टी के अजीब नियम
MP Board: कम नंबर आए या फेल? घबराएं नहीं, आ लौट चलें योजना देगी दूसरा मौका
12 वीं के बाद ये विभाग देते हैं सीधे Sarkari Naukri, जानें पूरी प्रोसेस
new career options After 12th: 12वीं के बाद क्या करें, कंफ्यूज हैं तो ये रहा गाइडेंस