Future Job Market में चीन और ब्रिटेन से आगे निकला भारत, यहां देखें पूरी रिपोर्ट
Future Job Market: डिजिटल एरा के इस दौर में हर देश खुद को बदल रहा है। वे अपने युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार कर रहे हैं। इस दौड़ में भारत की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज है। ये बात एक नए ग्लोबल इंडेक्स में खुलकर सामने आई है।
इस रिपोर्ट का नाम क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स है। इसके मुताबिक भारत ने खुद को बहुत तेजी से ढाला है। हमारी हायर एजुकेशन अब नए जमाने के हिसाब से बदल रही है।
भविष्य की नौकरियों के लिए हमारे युवा बिल्कुल तैयार हैं। इस मामले में हम बड़े और अड्वांस्डव देशों को टक्कर दे रहे हैं। हम अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के सामने मजबूती से खड़े हैं। आइए देखें कैसे...
QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स क्या है
क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स (QS World Future Skills Index) एक खास एजुकेशनल इंडेक्स है। यह इंडेक्स दुनिया भर के देशों और वहां के एजुकेशन सिस्टम का इवैल्यूएशन करता है।
इसका उद्देश्य ये देखना है कि कौन सा देश अपने स्टूडेंट्स को फ्यूचर के जरूरी स्किल्स, जैसे AI, Data Science, Critical Thinking और Problem Solving सिखाने के लिए कितना तैयार है।
ये इंडेक्स मेनली यूनिवर्सिटीज और एम्प्लॉयर्स के बीच के गैप को समझने में मदद करता है। इसके जरिए यह पता चलता है कि बदलते ग्लोबल जॉब मार्केट के हिसाब से किस देश के युवा सबसे ज्यादा स्किल्ड और एम्प्लॉयब्ल हैं। शॉर्ट में कहें, तो ये फ्यूचर रेडी स्किल्स की एक ग्लोबल रिपोर्ट कार्ड है।
भारत बना ग्लोबल पावर हाउस
क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स सर्वे में दुनिया के 89 देशों को शामिल किया गया था। इसमें इन देशों की उच्च शिक्षा और नौकरियों की स्थिति जांची गई। इस इंडेक्स में भारत का कुल स्कोर 100 में से 89.4 रहा। शानदार स्कोर के कारण भारत को दुनिया में 13वां स्थान मिला है।
रिपोर्ट ने भारत को टैलेंट का एक ग्लोबल पावर हाउस माना है। हमारे कॉलेज अब केवल डिग्री नहीं बल्कि काम की स्किल्स दे रहे हैं। इससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार पाना बहुत आसान हो गया है। दुनिया की बड़ी कंपनियां अब भारतीय टैलेंट पर भरोसा कर रही हैं।
फ्यूचर जॉब्स में भारत आगे
फ्यूचर जॉब मार्किट की तैयारी को फ्यूचर ऑफ वर्क कहते हैं। इस तैयारी के मामले में भारत दुनिया के टॉप 5 देशों में है। इस खास कैटेगरी में भारत को दुनिया में पांचवां स्थान मिला है। इस श्रेणी में भारत का स्कोर 96.0 दर्ज किया गया है।
दुनिया के टॉप 10 देशों का औसत स्कोर केवल 95.5 ही है। यानी भारत का स्कोर इस वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है। ये दिखाता है कि हमारी तैयारी सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हमारी कंपनियां नए तकनीकी बदलावों को बहुत तेजी से अपना रही हैं। यह हमारे देश के विकास के लिए बहुत अच्छी खबर है।
दक्षिण एशिया में हमारी बादशाहत
अब अगर हम अपने पड़ोसी देशों की बात करें तो यहां भारत सबसे आगे है। पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत का कोई मुकाबला ही नहीं है। हर पैमाने पर भारत ने बहुत बड़ी बढ़त हासिल की है। दक्षिण एशिया के बाकी देशों का औसत स्कोर केवल 30.3 है।
दूसरी ओर अकेले भारत का स्कोर 96.0 दर्ज किया गया है। हम अपने क्षेत्र के बाकी देशों से कोसों आगे निकल चुके हैं। यह भारत की मजबूत शिक्षा व्यवस्था और विजन को साबित करता है। हमारे युवाओं के हुनर का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है।
ग्रीन और डिजिटल जॉब्स की मांग
आज के समय में नए टैलेंट की मांग बहुत बढ़ गई है। विशेषकर ग्रीन और डिजिटल नौकरियों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। ग्रीन डिमांड यानी रिन्यूएबल एनर्जी में भारत का स्कोर 98.9 रहा। ये स्कोर अपने आप में एक बहुत बड़ा और नया रिकॉर्ड है।
वहीं एआई वर्कफोर्स बदलाव में भारत का स्कोर 94.1 दर्ज हुआ। देश के युवा बहुत तेजी से कोडिंग और एआई सीख रहे हैं। भारतीय प्रोफेशनल्स का प्रोफाइल अब बहुत ज्यादा बैलेंस्ड नजर आता है। वे थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल काम सीखने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का हाल
अब हम दुनिया के दूसरे बड़े देशों की स्थिति को समझते हैं। एआई क्रांति के मामले में अमेरिका आज भी दुनिया में नंबर वन है। इस मामले में अमेरिका का कुल स्कोर 99.2 दर्ज किया गया है।
वो एआई का इस्तेमाल लोगों की काम करने की क्षमता बढ़ाने में करता है। उसने इंडस्ट्रीज की जरूरतों के हिसाब से अपनी सरकारी नीतियां बदली हैं। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे संतुलित देश बनकर सामने आया है।
स्किल्स अलाइनमेंट के मामले में ऑस्ट्रेलिया का बैलेंस इंडेक्स 1.0 है। इसका मतलब है कि वहां की यूनिवर्सिटीज बहुत ही शानदार हैं। वे कंपनियों की मांग के हिसाब से ही बच्चों को पढ़ाती हैं। वहां पढ़ाई और नौकरी की जरूरतों में बहुत बेहतरीन तालमेल है।
ब्रिटेन में क्यों आया संकट
ब्रिटेन की शिक्षा व्यवस्था को हमेशा से बहुत अच्छा (future mission) माना गया है। अकादमिक तैयारी (bright future) के मामले में ब्रिटेन 100 स्कोर के साथ नंबर वन है। लेकिन वह अपने टैलेंट को देश की आर्थिक ग्रोथ में नहीं बदल पा रहा। इकनोमिक चेंज के मामले में उसका स्कोर घटकर केवल 90.2 रह गया।
इस कमजोरी के कारण ब्रिटेन की कुल रैंक गिरकर 20वीं हो गई है। ये दिखाता है कि सिर्फ अच्छी डिग्री होना ही काफी नहीं होता है। उस डिग्री का इस्तेमाल देश की तरक्की के लिए होना भी जरूरी है।
चीन में क्यों है टैलेंट की कमी
अब बात करते हैं हमारे पड़ोसी और बड़े कारोबारी देश चीन की। आर्थिक परिवर्तन के मामले में चीन 100 स्कोर के साथ नंबर वन है। लेकिन उसका बैलेंस इंडेक्स टॉप 10 देशों में सबसे ज्यादा खराब है। चीन का बैलेंस इंडेक्स केवल 6.9 ही दर्ज किया गया है।
चीन का बड़ा वर्कफोर्स एआई (QSWorldRanking) के नए बदलावों के लिए तैयार नहीं है। एआई बदलावों की तैयारी के मामले में चीन का स्कोर 80.3 है। वहां की यूनिवर्सिटीज और कंपनियों के बीच कोई अच्छा तालमेल नहीं है। इस वजह से चीन के सामने टैलेंट का नया संकट खड़ा हो गया है।
युवाओं के लिए आगे की राह
यह पूरी रिपोर्ट भारतीय युवाओं (digital future) के लिए एक बहुत बड़ा मौका है। दुनिया की बड़ी कंपनियां अब भारत की तरफ उम्मीद से देख रही हैं। हमें अपनी इस बढ़त को भविष्य में भी लगातार बनाए रखना होगा। इसके लिए हमें लगातार नई चीजें और तकनीक सीखते रहना होगा।
आज के समय में इसे ही अपस्किलिंग और रीस्किलिंग कहा जाता है। नए टूल्स और एआई टेक्नोलॉजी की बेसिक समझ बहुत जरूरी हो गई है। कॉलेज की थ्योरी पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी बहुत काम आती है।
तभी हमारे युवा वैश्विक बाजार की दौड़ में सबसे आगे टिक पाएंगे। भारत की आज की रफ्तार ही हमारे कल को बहुत मजबूत बनाएगी। हमें सही दिशा में अपनी इस मेहनत को लगातार जारी रखना होगा।
FAQ
- क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स में भारत की क्या रैंक है?
इस इंडेक्स में भारत को 89 देशों में से 13वां स्थान मिला है। भारत का कुल स्कोर 100 में से 89.4 दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में भारत को टैलेंट का एक ग्लोबल पावर हाउस माना गया है। - भविष्य के रोजगार बाजार में भारत का क्या स्थान है?
भविष्य के रोजगार बाजार की तैयारी के मामले में भारत दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल है। इस कैटेगरी में भारत का स्कोर 96.0 रहा है, जो कि वैश्विक टॉप 10 देशों के औसत स्कोर 95.5 से भी ज्यादा है। - ग्रीन और डिजिटल जॉब्स की तैयारी में भारत का स्कोर क्या है?
ग्रीन डिमांड यानी रिन्यूएबल एनर्जी में भारत का स्कोर 98.9 रहा है, जो एक रिकॉर्ड है। वहीं एआई वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन में भी भारत ने 94.1 का बेहतरीन स्कोर हासिल किया है।
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