MP PG Admissions 2026: 4 साल की यूजी के बाद अब 1 साल में होगा पीजी, लागू हुई नई व्यवस्था
MP College Admission: मध्यप्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग अब पीजी एडमिशन के नियम बदल रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नई प्रवेश (pg admission started) नीति लागू होने वाली है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अब ज्यादा आजादी मिलेगी। सरकारी कॉलेज एडमिशन मेंग्रेजुएट डिग्री के समय के आधार पर पीजी कोर्स चुन सकेंगे। इंदौर सहित पूरे प्रदेश के छात्रों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। अब छात्र कम समय में अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर पाएंगे।
विभाग का लक्ष्य एजुकेशनल ऑप्शन में फ्लेक्सिबिलिटी लाना है। इससे स्टूडेंट्स की योग्यता का सही मूल्यांकन हो सकेगा। छात्र अब अपनी पसंद के हिसाब से करियर चुन सकेंगे।
एक और दो साल पीजी की एलिजिबिलिटी
- एक साल का पीजी कोर्स
यह ऑप्शन सिर्फ उन विद्यार्थियों के लिए होगा जिन्होंने चार साल का यूजी ऑनर्स कोर्स पूरा किया है। अगर आपने ऑनर्स के साथ ग्रेजुएट किया है, तो आप सिर्फ एक साल में अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी कर सकते हैं। - दो साल का पीजी कोर्स
जो विद्यार्थी तीन साल का सामान्य यूजी कोर्स पूरा करके आए हैं, उन्हें दो साल का पीजी कोर्स करना ही पड़ेगा। उनके लिए एक साल का ऑप्शन नहीं रहेगा।
2 मई से शुरू होंगे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
प्रवेश प्रक्रिया को आसान करने के लिए विभाग 2 मई 2026 से ऑनलाइन पोर्टल खोल देगा। पंजीयन के दौरान विद्यार्थियों को अपनी ग्रेजुएट डिग्री (UG Degree) से जुड़ी सटीक जानकारी देनी होगी। इसी डेटा के आधार पर सॉफ्टवेयर यह तय करेगा कि विद्यार्थी एक साल पाठ्यक्रम के लिए पात्र (Eligible) है या दो साल के लिए।
स्ट्रीम बदलने वालों के लिए 'इंटरव्यू' जरूरी
- प्रक्रिया: यदि किसी छात्र ने बीकॉम (B.Com) किया है और वह एमए (M.A.) में प्रवेश लेना चाहता है, तो उसे सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा।
- योग्यता का आंकलन: ऐसे विद्यार्थियों को हर जिले के अग्रणी कॉलेजों (Lead Colleges) में आयोजित होने वाले साक्षात्कार (Interview) में शामिल होना होगा।
- उद्देश्य: विशेषज्ञ यह देखेंगे कि क्या विद्यार्थी उस नए विषय को पढ़ने के लिए पर्याप्त समझ और योग्यता रखता है या नहीं।
प्रवेश के लिए क्राइटेरिया
नई व्यवस्था के फायदे
- समय की बचत: चार साल के ऑनर्स वाले छात्रों को एक साल की बचत होगी, जिससे वे जल्दी से रिसर्च या करियर की शुरुआत कर सकेंगे।
- विषय बदलने की सुविधा: इंटरव्यू के जरिए छात्र अब अपनी रुचि के नए विषय चुन सकते हैं।
- कौशल आधारित मूल्यांकन: अब सिर्फ अंकों के बजाय, साक्षात्कार के जरिए छात्र की असली क्षमता को देखा जाएगा।
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