केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में बयान: बदल सकता है नीट परीक्षा कराने का तरीका
नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। मोदी सरकार ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा सुरक्षित बनाने के लिए टास्क फोर्स काम कर रहा है। नीट को पेन-पेपर से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने पर विचार हो रहा है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रही है।
नीट पेपर लीक को लेकर हुई भारी फजीहत के बाद अब सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। परीक्षा कराने के तरीके यानी पैटर्न को लेकर यह सुनवाई हुई। सरकार का मकसद परीक्षा को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा
शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अहम जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक नीट (यूजी) को कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी (CBT – Computer Based Test) में बदलने पर विचार हो रहा है। इसे जेईई (JEE – Joint Entrance Examination) की तरह एक या दो चरणों में कराने का सुझाव भी है।
सरकार ने कहा कि नीट प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कोशिश हो रही है। टास्क फोर्स तकनीकी क्षमता, परीक्षा सुरक्षा, निष्पक्षता, बुनियादी ढांचे और छात्रों पर पड़ने वाले असर, सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।
कौन कर रहा है यह मूल्यांकन
यह हाई-पावर्ड टास्क फोर्स नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में काम कर रही है। इसी टीम की सिफारिशों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय होगा।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक सरकार सीबीटी लागू करने पर मुहर लगा सकती है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इससे पेपर लीक की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के फायदे और चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू होने पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बेहतर होगी। इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा का पर्याप्त अनुभव नहीं होता। ऐसे में बिना व्यापक तैयारी और मॉक टेस्ट के सीबीटी लागू करना असमानता बढ़ा सकता है। इसलिए विशेषज्ञों की राय है कि पहले बड़े स्तर पर मॉक टेस्ट, पायलट प्रोजेक्ट और डिजिटल प्रशिक्षण कराया जाए।
अदालत में क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का कंप्लायंस हलफनामा कोर्ट के सामने रखा गया। अधिवक्ता तन्वी दुबे के मुताबिक यह सुनवाई नीट मामले में काफी अहम रही। उन्होंने बताया कि इस दौरान सॉलिसिटर जनरल मौजूद नहीं थे।
22 लाख छात्रों की चुनौती
देश में हर साल करीब 22 से 23 लाख छात्र नीट परीक्षा देते हैं। इतने बड़े पैमाने पर कंप्यूटर लैब, स्थिर इंटरनेट और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। बिना ठोस बुनियादी ढांचे के यह बदलाव लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।
अगर नीट को जेईई की तरह दो चरणों में कराया जाता है, तो इससे बेहतर छात्रों की पहचान संभव हो सकती है। लेकिन इसके लिए भी तैयारी और समय दोनों जरूरी होंगे।
एक्सपर्ट कोट्स
तन्वी दुबे, अधिवक्ता उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में नीट मामले में हुई सुनवाई काफी अहम रही, क्योंकि केंद्र सरकार का कंप्लायंस हलफनामा कोर्ट के सामने था। उन्होंने यह भी बताया कि इस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल मौजूद नहीं थे।
FAQ
- सवाल 1: क्या NEET परीक्षा अब कंप्यूटर पर होगी?
अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रही है। - NEET पैटर्न बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
हाल में हुए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा से पेपर लीक की आशंका कम हो सकती है। - कंप्यूटर आधारित परीक्षा में क्या चुनौती हो सकती है?
ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा का पर्याप्त अनुभव नहीं होता। साथ ही 22 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए कंप्यूटर लैब और इंटरनेट सुविधा जुटाना बड़ी चुनौती होगी।
ये भी पढ़ें...
CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के एक्सपर्ट्स ने ही किया पेपर लीक
MP के 500 सरकारी स्कूलों में शुरू होगी AI लर्निंग, दस हजार शिक्षकों की होगी भर्ती
रिलायंस समेत 11 बड़ी कंपनियों में 27% घटी नई भर्तियां, क्यों कम हो रही हैं हायरिंग
सांदीपनि स्कूल में बेटियों की बाल कैबिनेट से मिले सीएम मोहन यादव, AI पर दिए टिप्स