रिलायंस समेत 11 बड़ी कंपनियों में 27% घटी नई भर्तियां, क्यों कम हो रही हैं हायरिंग
Kaushiki | Aug 04, 2026, 14:50 IST
Job Crisis Report 2025-26
देश की टॉप 11 कंपनियों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नई भर्तीयों में 27 फीसदी की गिरावट आई है। एआई (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के कारण कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं। केवल एसबीआई और पावर ग्रिड में ही हायरिंग बढ़ी है।
Job Crisis Report 2025-26: आज के दौर में हर युवा पढ़ाई पूरी करके एक अच्छी जॉब पाने का सपना देखता है। लेकिन AI Trends Report 2025-26 के हालिया रिपोर्ट्स से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों में भी अब नई नौकरियां आसानी से नहीं मिल रही हैं।
सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में शामिल 11 बड़ी कंपनियों के डेटा पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2025-26 में नई भर्तीयों में 27 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़े बदलाव का सबसे प्रमुख कारण आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी AI और ऑटोमेशन का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है।
कंपनियां अब कम बजट में ज्यादा काम निकालने की रणनीति अपना रही हैं। जहां पहले किसी टास्क को पूरा करने के लिए बड़ी टीम की जरूरत पड़ती थी। वहीं अब टेक टूल्स और थर्ड पार्टी सर्विसेज से वह काम चुटकियों में हो जाता है। इतना ही नहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं से भी कंपनियों ने नए इन्वेस्टमेंट्स पर ब्रेक लगा दिया है।
जब देश की सबसे बड़ी कंपनियां ही भर्तियां घटा रही हैं, तो कॉलेज से पास आउट होने वाले लाखों फ्रेशर्स के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आइए इस आर्टिकल में पूरे डेटा और कारण को आसान शब्दों में समझते हैं।
शीर्ष 11 कंपनियों में 2023-24 में 4.35 लाख नई नौकरियां मिली थीं। वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल 3.15 लाख रह गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में नई भर्तियां 1.90 लाख से घटकर 1.00 लाख रह गईं। HDFC बैंक में भी भर्तियां 49 हजार 713 से घटकर 45 हजार 902 पर आ गईं।
एयरटेल में दो साल पहले पांच हजार 956 भर्तियां थीं जो अब तीन हजार 751 बचीं। अडानी पोर्ट्स और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों में भी गिरावट दिखी। 11 में से नौ बड़ी कंपनियों ने नई नौकरियां देना कम किया है। यह ट्रेंड दिखाता है कि अब जॉब मार्केट बहुत कठिन हो गया है।
11 बड़ी कंपनियों में से केवल दो ही ऐसी हैं जहां हायरिंग बढ़ी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने इस साल अपनी भर्तियां बढ़ाई हैं। SBI में भर्तियां एक हजार 770 से बढ़कर 25 हजार 633 के स्तर पर पहुंच गईं।
सरकारी बिजली कंपनी पावर ग्रिड में भी नई भर्तीयों में बढ़त देखी गई। पावर ग्रिड में इस साल एक हजार 280 नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया। बाकी सभी निजी क्षेत्र की बड़ी दिग्गज कंपनियों में मंदी का असर दिखा। सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े सेक्टर्स में ही कुछ राहत है।
कंपनियां अब अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही हैं। टेक्नोलॉजी और आईटी डिपार्टमेंट में 62% तक AI का यूज हो रहा है। HR मैनेजमेंट और कस्टमर सपोर्ट में भी AI का रोल बहुत बढ़ा है।
72% एचआर मानते हैं कि AI रोजमर्रा के कामों का अहम हिस्सा बनेगा। ऑटोमेशन के उपयोग से 36% कंपनियों में मध्यम सुधार दर्ज किया गया है। कामकाज में सुधार होने से नई नौकरियों की जरूरत लगातार घट रही है। पारंपरिक और क्लर्क लेवल की जॉब्स पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
जॉब पाना मुश्किल है, लेकिन सही दिशा(Job Crisis) में काम करने से राह आसान होगी। युवाओं को अब पुरानी और बेसिक स्किल्स के भरोसे नहीं रहना चाहिए। कोडिंग, डेटा एनालिसिस और AI टूल्स का ज्ञान होना बहुत जरूरी हो गया है।
आपको अपनी फील्ड में प्रॉब्लम सॉल्विंग और लॉजिकल सोच बेहतर करनी होगी। फ्रीलांसिंग और कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड वर्क भी अब अच्छे विकल्प बन रहे हैं। खुद को नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से अपग्रेड रखना ही एकमात्र समाधान है। HDFC Bank
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सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में शामिल 11 बड़ी कंपनियों के डेटा पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2025-26 में नई भर्तीयों में 27 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़े बदलाव का सबसे प्रमुख कारण आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी AI और ऑटोमेशन का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है।
कंपनियां अब कम बजट में ज्यादा काम निकालने की रणनीति अपना रही हैं। जहां पहले किसी टास्क को पूरा करने के लिए बड़ी टीम की जरूरत पड़ती थी। वहीं अब टेक टूल्स और थर्ड पार्टी सर्विसेज से वह काम चुटकियों में हो जाता है। इतना ही नहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं से भी कंपनियों ने नए इन्वेस्टमेंट्स पर ब्रेक लगा दिया है।
जब देश की सबसे बड़ी कंपनियां ही भर्तियां घटा रही हैं, तो कॉलेज से पास आउट होने वाले लाखों फ्रेशर्स के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आइए इस आर्टिकल में पूरे डेटा और कारण को आसान शब्दों में समझते हैं।
बड़ी कंपनियों में हायरिंग घटने का सच
एयरटेल में दो साल पहले पांच हजार 956 भर्तियां थीं जो अब तीन हजार 751 बचीं। अडानी पोर्ट्स और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों में भी गिरावट दिखी। 11 में से नौ बड़ी कंपनियों ने नई नौकरियां देना कम किया है। यह ट्रेंड दिखाता है कि अब जॉब मार्केट बहुत कठिन हो गया है।
किन दो कंपनियों में बढ़ीं नौकरियां
सरकारी बिजली कंपनी पावर ग्रिड में भी नई भर्तीयों में बढ़त देखी गई। पावर ग्रिड में इस साल एक हजार 280 नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया। बाकी सभी निजी क्षेत्र की बड़ी दिग्गज कंपनियों में मंदी का असर दिखा। सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े सेक्टर्स में ही कुछ राहत है।
एआई और ऑटोमेशन से बदला जॉब मार्केट
72% एचआर मानते हैं कि AI रोजमर्रा के कामों का अहम हिस्सा बनेगा। ऑटोमेशन के उपयोग से 36% कंपनियों में मध्यम सुधार दर्ज किया गया है। कामकाज में सुधार होने से नई नौकरियों की जरूरत लगातार घट रही है। पारंपरिक और क्लर्क लेवल की जॉब्स पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
युवाओं के लिए आगे का रास्ता क्या है
आपको अपनी फील्ड में प्रॉब्लम सॉल्विंग और लॉजिकल सोच बेहतर करनी होगी। फ्रीलांसिंग और कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड वर्क भी अब अच्छे विकल्प बन रहे हैं। खुद को नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से अपग्रेड रखना ही एकमात्र समाधान है। HDFC Bank
FAQ
- देश की बड़ी कंपनियों में नई नौकरियां क्यों घट रही हैं?
कंपनियां अब लागत कम करने, काम को अधिक उत्पादक बनाने के लिए AI और ऑटोमेशन टूल्स का उपयोग कर रही हैं। कम कर्मचारियों से ज्यादा काम होने के कारण नई भर्तीयों की मांग घटी है। - 2025-26 में किस कंपनी ने सबसे ज्यादा नौकरियां दी हैं?
दिए गए डेटा के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 1.00 लाख और HDFC बैंक ने 45,902 नई नौकरियां दी हैं। हालांकि पिछले सालों की तुलना में इनकी संख्या में भी गिरावट दर्ज हुई है। - AI का नौकरियों पर क्या असर पड़ रहा है?
AI टूल से रूटीन और रिपीट होने वाले काम जल्दी हो जाते हैं। IT और कस्टमर सपोर्ट जैसे विभागों में 60% से अधिक काम AI से होने लगे हैं, जिससे पारंपरिक नौकरियों की मांग कम हुई है।
MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं
NHFS Report 2026: एमपी मैरिटल वायलेंस के आकड़ों में सुधार पर जमीनी हकीकत डरावनी
Ragging Report 2026: देश के किस राज्य और कॉलेज में आए सबसे ज्यादा रैगिंग के मामले
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