NSO Report 2025: पढ़ाई में बेटियों ने गाड़े झंडे, लड़कों से ज्यादा लड़कियां ले रही हैं कॉलेज डिग्री
जमाना कितनी तेजी से करवट ले रहा है, इसका अंदाजा आप अपने आसपास की बदलती तस्वीरों से लगा सकते हैं। वह दौर अब सिर्फ किस्सों और कहानियों का हिस्सा रह गया है जब लड़कियों का दायरा केवल घर की चारदीवारी तक सीमित था और लड़के कॉलेज की पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलते थे।
आज शिक्षा के मैदान में बेटियां न सिर्फ बराबरी कर रही हैं, बल्कि लड़कों को पछाड़कर आगे निकल रही हैं। सांख्यिकी मंत्रालय (NSO की रिपोर्ट) की हालिया रिपोर्ट महिला और पुरुष 2025 के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि देश में बरसों से चला आ रहा जेंडर गैप अब तेजी से सिमट रहा है।
हर तरफ बेटियों का जलवा
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्कूल के हर स्तर पर लड़कियों का नामांकन अनुपात लड़कों के मुकाबले ज्यादा दर्ज किया गया है। बात सिर्फ स्कूल में एडमिशन लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि सफलता के झंडे गाड़ने में भी लड़कियां आगे हैं।
उच्च शिक्षा में डिग्री हासिल करने वाले कुल छात्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब 51.48% तक पहुंच गई है। यानी अब देश के कॉलेजों से डिग्री लेकर निकलने वालों में लड़कों से ज्यादा संख्या लड़कियों की है।
अगर हम देश की कुल साक्षरता दर (Literacy Rate) को देखें, तो महिला और पुरुष के बीच अभी भी 14.4% का अंतर दिखाई देता है।
15 से 24 साल के युवाओं के बीच साक्षरता का यह अंतर घटकर अब महज 3.8% रह गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि 1981 में महिला साक्षरता की दर जो सिर्फ 30.6% थी, वह आज70% का आंकड़ा पार कर चुकी है।
कहां है लड़कियों का दबदबा?
उच्च शिक्षा (Higher Education) के अलग-अलग क्षेत्रों में लड़कियों की रुचि और मेहनत साफ नजर आ रही है। विशेषकर एमफिल जैसे कोर्सेज में 76.14% महिलाएं हैं, जो एक तरफा बढ़त को दिखाता है।
इसी तरह आर्ट्स, साइंस, सोशल साइंस और मेडिकल की पढ़ाई में भी लड़कियां ज्यादा संख्या में हैं। हालांकि, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे तकनीकी क्षेत्रों में अभी भी पुरुषों का अनुपात अधिक बना हुआ है।
लड़कों पर ज्यादा खर्च, फिर भी बेटियां अव्वल
शिक्षा के क्षेत्र में इतने बेहतरीन सुधार के बावजूद कुछ चुनौतियां आज भी हमारा पीछा कर रही हैं। रिपोर्ट एक हैरान करने वाला पहलू भी सामने लाती है।
आज भी परिवारों में लड़कों की पढ़ाई पर औसत सालाना खर्च 13 हजार 901 रुपए होता है, जबकि लड़कियों की शिक्षा पर यह निवेश केवल 12 हजार 101 रुपए है। इसके अलावा, लड़कियों का ड्रॉपआउट कम तो हुआ है, लेकिन वे लड़कों के मुकाबले स्कूल में औसतन कम समय (7.4 साल) बिता पाती हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
Education news: पढ़ाई में फोकस बढ़ाने के लिए कारगार है ये 50-10 Rule for Study, ऐसे करता है काम
CUET UG 2026: परीक्षा की तारीख नजदीक, ऐसे करें तैयारी और क्रैक होगी एग्जाम
एमपी बोर्ड 5वीं-8वीं की दोबारा परीक्षा का शेड्यूल जारी, ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
एमपी बोर्ड दूसरी परीक्षा 2026: क्या आप गणित में कमजोर हैं? बोर्ड ने दिया विषय बदलने का मौका