बच्चों की पढ़ाई के लिए पैरेंट्स छोड़ रहे जॉब, Parents Career Break बना नया ट्रेंड
Parents Career Break: आज के समय में पैरेंटिंग का तरीका काफी बदल गया है। अब पैरेंट्स सिर्फ पैसे कमाना ही अपनी जिम्मेदारी नहीं मानते हैं। वे बच्चों के साथ हर कदम पर खड़े रहना चाहते हैं।
इसके लिए वे अपने बढ़ते करियर को भी दांव पर लगाने से नहीं हिचकिचाते। आजकल एक नया और अनोखा ट्रेंड तेजी से देखने को मिल रहा है। कामकाजी पैरेंट्स अपनी अच्छी नौकरियों से लंबा ब्रेक ले रहे हैं।
वे ऐसा किसी बीमारी या पर्सनल वजह से नहीं कर रहे हैं। उनका ये फैसला सिर्फ और सिर्फ उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए है। बच्चों के बोर्ड एग्जाम और कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए पैरेंट्स घर बैठ रहे हैं।
क्यों बदल रही है पैरेंट्स की सोच
पुराने जमाने में बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी स्कूल या कोचिंग पर होती थी। माता-पिता सिर्फ फीस भरने और किताबें दिलाने तक ही सीमित रहते थे। लेकिन अब समय पूरी तरह से बदल चुका है।
आज का एजुकेशन सिस्टम बहुत ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो गया है। बच्चों पर अच्छे नंबर लाने का बहुत भारी मानसिक दबाव रहता है। ऐसे माहौल में बच्चे अक्सर अकेलापन और तनाव महसूस करने लगते हैं।
वर्किंग पैरेंट्स को लगता है कि वे बच्चों को पूरा समय नहीं दे पा रहे। इस वजह से वे नौकरी से कुछ समय के लिए दूरी बना लेते हैं। वे बच्चों को एक सुरक्षित और शांत माहौल देना चाहते हैं।
कोचिंग के भरोसे अब काम नहीं चलता
बहुत से पैरेंट्स का मानना है कि सिर्फ नामी कोचिंग सेंटर में दाखिला दिलाना काफी नहीं है। कोचिंग सेंटर्स में बच्चों की भीड़ बहुत ज्यादा होती है। वहां हर बच्चे पर अलग से ध्यान देना मुमकिन नहीं हो पाता।
घर आने के बाद बच्चों को पर्सनल गाइडेंस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जब माता-पिता घर पर मौजूद रहते हैं, तो बच्चे ज्यादा ध्यान से पढ़ते हैं। पैरेंट्स उनके पढ़ाई के शेड्यूल को अच्छे से मैनेज कर पाते हैं।
वे बच्चों के खान-पान और उनकी नींद का भी पूरा ख्याल रखते हैं। इससे बच्चों को घर में एक अच्छा और मोटिवेटिंग माहौल मिलता है। यही वजह है कि पैरेंट्स अब खुद होम ट्यूटर की भूमिका निभा रहे हैं।
करियर ब्रेक के फायदे और चुनौतियां
इस बड़े फैसले के अपने कुछ फायदे और कुछ नुकसान भी हैं। सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि बच्चों का परफॉर्मेंस बहुत बेहतर हो जाता है। माता-पिता की मौजूदगी से बच्चों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।
वे अपने मन की बात और पढ़ाई का डर पैरेंट्स से शेयर कर पाते हैं। लेकिन इस फैसले के पीछे एक बहुत बड़ी आर्थिक चुनौती भी छिपी होती है। एक अच्छी नौकरी छोड़ने से घर का बजट पूरी तरह प्रभावित होता है।
सिंगल इनकम पर पूरे परिवार का खर्च चलाना काफी मुश्किल काम हो जाता है। इसके अलावा लंबे ब्रेक के बाद दोबारा वैसी ही नौकरी पाना भी आसान नहीं होता। कॉर्पोरेट जगत में करियर गैप को आज भी अच्छी नजर से नहीं देखा जाता।
क्या कहते हैं इस ट्रेंड पर एक्सपर्ट्स
शिक्षा और मनोविज्ञान के एक्सपर्ट्स इस ट्रेंड को काफी मिला-जुला मानते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को पैरेंट्स का साथ मिलना बहुत अच्छी बात है। इससे बच्चों का मानसिक विकास बहुत सही तरीके से होता है।
लेकिन इसके साथ ही एक्सपर्ट्स पैरेंट्स को एक चेतावनी भी देते हैं। वे कहते हैं कि माता-पिता को बच्चों पर चौबीसों घंटे नजर नहीं रखनी चाहिए। हद से ज्यादा रोक-टोक करने से बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं।
पैरेंट्स को घर में एक गाइड की तरह रहना चाहिए, न कि किसी सख्त पुलिसवाले की तरह। बच्चों को अपनी पढ़ाई खुद मैनेज करने की आजादी भी मिलनी चाहिए। तभी वे भविष्य में आत्मनिर्भर और मजबूत इंसान बन पाएंगे।
एक नई सोच की शुरुआत
यह ट्रेंड दिखाता है कि आज के पैरेंट्स बच्चों के भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं। वे पैसे और रुतबे से ऊपर अपने बच्चों की खुशियों और उनके सपनों को रख रहे हैं। यह एक बहुत ही इंस्पिरेशनल बदलाव है।
आने वाले दिनों में यह चलन और भी ज्यादा बढ़ सकता है। हालांकि हर परिवार के लिए नौकरी छोड़ना मुमकिन नहीं होता है। लेकिन जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे समाज को एक नया नजरिया दे रहे हैं।
करियर तो जिंदगी में दोबारा भी बनाया जा सकता है। पर बच्चों का ये कीमती बचपन और उनका भविष्य एक बार हाथ से निकल गया तो दोबारा लौटकर नहीं आता। यही सोच आज के मॉडर्न पैरेंट्स को यह बड़ा कदम उठाने की हिम्मत दे रही है।
नौकरी से ब्रेक लेने की वजह
- पैसों का तालमेल:
नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम 1 से 2 साल का इमरजेंसी फण्ड बचाकर रखना बहुत जरूरी है। ऐसा करने से सैलरी बंद होने के बाद भी घर का खर्च और बच्चों की स्कूल-कोचिंग की भारी-भरकम फीस बिना किसी टेंशन के भरी जा सकती है। - ज्यादा दबाव न बनाएं:
जब पैरेंट्स जॉब छोड़ते हैं, तो बच्चों पर अनजाने में एक इमोशनल प्रेशर आ जाता है कि "मम्मी-पापा ने मेरे लिए इतनी बड़ी कुर्बानी दी है।" पैरेंट्स को बच्चों को यह अहसास नहीं होने देना चाहिए, वरना बच्चे स्ट्रेस में आ सकते हैं। - खुद को अपडेट रखना:
ब्रेक के समय को सिर्फ बच्चों के साथ ही नहीं, बल्कि अपने करियर के लिए भी इस्तेमाल करें। इस खाली समय में ऑनलाइन शॉर्ट-टर्म कोर्सेज(Career Counselling) या न्यू सर्टीफिकेशन्स करते रहें, ताकि जब आप दोबारा जॉब मार्केट में उतरें, तो आपका रेज्यूमे कमजोर न लगे। - छोटा-मोटा काम:
पूरी तरह से फुल-टाइम (parenting in digital age) जॉब छोड़ने के बजाय, पैरेंट्स Work From Home, फ्रीलांसिंग या कंसल्टिंग का विकल्प चुन सकते हैं। इससे करियर में पूरी तरह गैप भी नहीं आता, कुछ पॉकेट मनी भी बनती रहती है और बच्चों के लिए पूरा समय भी मिल जाता है। - पैरेंट्स की मानसिक सेहत:
अचानक (parenting tips)से बिजी कॉर्पोरेट लाइफ छोड़कर चौबीसों घंटे घर पर बैठना पैरेंट्स के लिए भी मेन्टल स्ट्रेस का कारण बन सकता है। इसलिए खुद के लिए कोई हॉबी चुनें या थोड़ा मी-टाइम जरूर निकालें, ताकि घर का माहौल पॉजिटिव बना रहे।
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