स्कूल की पढ़ाई के साथ क्यों जरूरी है Olympiad Exams, कब और कैसे करें तैयारी
Top Olympiad Exams: आजकल स्कूल की पढ़ाई में सिर्फ किताबें रटना ही काफी नहीं रह गया है। अगर बच्चों को आगे बढ़ना है, तो उन्हें प्रैक्टिकल सोचना सीखना होगा। इसीलिए आज के समय में ओलंपियाड एग्जाम बहुत जरूरी हो गए हैं।
ये परीक्षाएं बच्चों के सोचने और समझने का दायरा बढ़ाती हैं। जब बच्चा कम एज में ही ऐसे एग्जाम देता है, तो उसका डर खत्म हो जाता है। उसे अपनी असली क्षमता और स्किल्स का भी सही अंदाजा हो जाता है।
अगर आपका बच्चा भी भविष्य में बड़ा कॉम्पिटिटिव एग्जाम देना चाहता है, तो ओलंपियाड सबसे सही रास्ता है। यह बच्चे की नींव को बचपन से ही काफी मजबूत बना देता है। आइए जानें देश के सबसे पॉपुलर ओलंपियाड के बारे में।
ओलंपियाड एग्जाम्स क्या होता है
ओलंपियाड एग्जाम्स (Olympiad Exams) स्कूल लेवल की ऐसी कंपैटिटिव एग्जाम्स होती हैं। ये स्टूडेंट्स की सब्जेक्ट नॉलेज, लॉजिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी को चेक करती हैं। ये रेगुलर स्कूल टेस्ट से अलग होती हैं। इनमें किताबी रटने के बजाय कॉन्सेप्ट्स की गहरी समझ पर फोकस किया जाता है।
कब से तैयारी शुरू कर सकते हैं?
ज्यादातर ओलंपियाड एग्जाम्स क्लास 1 से 12 तक के स्टूडेंट्स के लिए ओपन होते हैं। तैयारी शुरू करने का सबसे सही समय नया एकेडमिक सेशन शुरू होने (अप्रैल-मई) के दौरान होता है, ताकि स्कूल स्टडीज के साथ-साथ ओलंपियाड का सिलेबस भी धीरे-धीरे कवर हो सके।
इसे कहां और कौन कंडक्ट कराता है?
ये एग्जाम्स मुख्य रूप से नामी ऑर्गेनाइजेशन्स जैसे SOF (Science Olympiad Foundation), SilverZone Foundation, Homi Bhabha Centre for Science Education (HBCSE) आदि द्वारा आयोजित किए जाते हैं। ज्यादातर स्टूडेंट्स अपने ही स्कूल के माध्यम से इसके लिए रजिस्टर करते हैं।
इसमें कौन-कौन से मेन सब्जेक्ट्स होते हैं?
- IMO: इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड (Maths & Logic)
- NSO: नेशनल साइंस ओलंपियाड (Science Concepts)
- IEO: इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड (Grammar & Communication)
- NCO: नेशनल साइबर ओलंपियाड (Computers & IT)
- IGKO: इंटरनेशनल जनरल नॉलेज ओलंपियाड (Current Affairs & General Awareness)
टॉप 5 ओलंपियाड एग्जाम्स की जानकारी
इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड (IMO)
अगर आपके बच्चे की मैथ और लॉजिक में काफी रुचि है, तो यह एग्जाम सबसे बेस्ट है। इसे साइंस ओलंपियाड फाउंडेशन यानी SOF आयोजित करता है।
IMO का मकसद बच्चों की मैथ्स सॉल्विंग स्किल्स को बेहतर बनाना है। क्लास 1 से 12 तक के स्टूडेंट्स इसमें आसानी से भाग ले सकते हैं। यह एग्जाम दो लेवल में कराया जाता है। इसमें अच्छा स्कोर करने पर बच्चों को स्कॉलरशिप और मेडल्स भी दिए जाते हैं।
नेशनल साइंस ओलंपियाड (NSO)
साइंस के कठिन कॉन्सेप्ट्स को आसान भाषा में समझने के लिए NSO बेहतरीन प्लेटफार्म है। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से प्रैक्टिकल सवाल पूछे जाते हैं। ये सवाल बच्चों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
इस एग्जाम से बच्चों में साइंटिफिक माइंडसेट विकसित होता है। कक्षा 1 से 12 तक के छात्र इस परीक्षा में हिस्सा ले सकते हैं। इससे आगे चलकर डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना आसान हो जाता है।
इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड (IEO)
आजकल की दुनिया में इंग्लिश भाषा पर अच्छी पकड़ होना बेहद जरूरी हो गया है।Olympiad IEO एग्जाम बच्चों की इंग्लिश ग्रामर और वोकैबुलरी को चेक करता है।
इसके अलावा रीडिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स का भी टेस्ट लिया जाता है। जो बच्चे अपनी इंग्लिश और बोलने का तरीका सुधारना चाहते हैं, उनके लिए यह बहुत शानदार मौका है।
नेशनल साइबर ओलंपियाड (NCO)
आज का दौर डिजिटल और आईटी टेक्नोलॉजी का दौर है। ऐसे में कंप्यूटर और कोडिंग की समझ होना एक बड़ी ताकत बन गया है। NCO बच्चों को कंप्यूटर साइंस और साइबर सिक्योरिटी की नई दुनिया से जोड़ता है। इस एग्जाम से बच्चों की लॉजिकल और आईटी अवेयरनेस की अच्छी जांच हो जाती है।
इंटरनेशनल जनरल नॉलेज ओलंपियाड (IGKO)
दुनिया में हर दिन क्या नया चल रहा है, इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। IGKO एग्जाम बच्चों के जनरल नॉलेज और करेंट अफेयर्स को परखता है।
इसमें इतिहास, भूगोल और लाइफ स्किल्स से जुड़े कई सवाल आते हैं। यह एग्जाम बच्चों को सिर्फ किताबी कीड़ा बनने से रोकता है और उन्हें दुनिया के प्रति जागरूक बनाता है।
कब, कैसे और क्यों करें तैयारी
ओलंपियाड की तैयारी नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही शुरू कर देनी चाहिए। जल्दी शुरुआत करने से सिलेबस पूरा करने और रिवीजन के लिए काफी समय मिल जाता है।
यह परीक्षा बच्चों में आत्मविश्वास भरती है। इससे उनका लॉजिकल माइंड तेज होता है और बड़ी परीक्षाओं जैसे जेईई और नीट का डर हमेशा के लिए दूर हो जाता है।
परीक्षा के लिए तैयारी के टिप्स?
ये एग्जाम्स बच्चों का कॉन्फिडेंस बिल्ड करते हैं और नेशनल/इंटरनेशनल लेवल का एक्सपोजर देते हैं। इनसे आगे चलकर भविष्य की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE, NEET, NTSE, CA आदि की नींव बचपन में ही काफी स्ट्रॉन्ग हो जाती है।
- बेसिक कॉन्सेप्ट्स पर ध्यान दें
किसी भी विषय को रटने के बजाय उसके बेसिक कॉन्सेप्ट्स को अच्छे से समझें। एनसीईआरटी की किताबों को ध्यान से पढ़ना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है। - पिछले सालों के पेपर सॉल्व करें
पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र यानी PYQs हल करना बेहद जरूरी है। इससे आपको परीक्षा के असली पैटर्न और सवालों के लेवल का सही अंदाजा मिलता है। - नियमित मॉक टेस्ट जरूर दें
हर हफ्ते कम से कम एक या दो मॉक टेस्ट जरूर दें। मॉक टेस्ट देने से आपकी स्पीड और सवालों को सही करने की क्षमता दोनों में सुधार आता है। - टाइम मैनेजमेंट का अभ्यास करें
वीक में कम से कम एक से दो मॉक टेस्ट जरूर दें और अपनी गलतियों का एनालिसिस करें। इससे एग्जाम हॉल का डर खत्म होता है और स्पीड-एक्यूरेसी दोनों बेहतर होती हैं। - टाइम टेबल बनाकर पढ़ाई करें
स्कूल की पढ़ाई और ओलंपियाड की तैयारी के बीच संतुलन बनाएं। रोज 1 से 2 घंटे ओलंपियाड की तैयारी के लिए अलग से जरूर निकालें।
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