UPSC में टैलेंट नहीं कोशिशें ज्यादा कारगर, 24-26 की उम्र वाले सबसे ज्यादा सफल
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। हाल ही में आई यूपीएससी की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सफलता पाने का कोई एक तय रास्ता नहीं होता है। लेकिन कुछ खास तरीके उम्मीदवारों के चयन की संभावना को काफी बढ़ा देते हैं। इसमें उम्र और पढ़ाई के बैकग्राउंड का बहुत बड़ा हाथ होता है।
ऑप्शनल विषय का परीक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है।इस रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल सेवा में सफलता का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं है, लेकिन कुछ विशेष पैटर्न ऐसे हैं जो उम्मीदवारों के चयन की संभावना को बढ़ा देते हैं।
साइंस के छात्रों का दबदबा
यूपीएससी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सफल उम्मीदवारों में साइंस बैकग्राउंड के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, सिलेक्ट होने वाले कुल उम्मीदवारों में से 71% से 77% छात्र इंजीनियरिंग या साइंस बैकग्राउंड से आते हैं।
- साइंस और इंजीनियरिंग: करीब 77% उम्मीदवार।
- आर्ट्स और कॉमर्स: करीब 29% उम्मीदवार (इसमें ह्यूमैनिटीज़ विषयों की बड़ी भूमिका है)।
दिलचस्प बात यह है कि भले ही छात्र साइंस बैकग्राउंड से हों, लेकिन मुख्य परीक्षा में वे अक्सर ह्यूमैनिटीज़ (Humanities) विषयों को ऑप्शनल विषय के रूप में चुनते हैं। ह्यूमैनिटीज़ विषयों के साथ सफल होने वाले उम्मीदवारों की दर 84% है।
सफलता की सही उम्र और अटेंप्ट
रिपोर्ट में एक बहुत ही अहम ट्रेंड सामने आया है—उम्र और प्रयास (Age and Attempts)। आंकड़ों से पता चलता है कि 24 से 26 साल की आयु के बीच उम्मीदवारों के चयन की दर सबसे ज्यादा है।
अटेंप्ट का लॉजिक
अक्सर माना जाता है कि पहले प्रयास में सफलता मिलना मुश्किल है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहते हैं:
- प्रथम प्रयास (First Attempt): कुल सफल उम्मीदवारों में से 6.2% पहले प्रयास में सफल होते हैं।
- चौथा प्रयास (Fourth Attempt): चौथे प्रयास में सफलता की दर सबसे ज्यादा 22% देखी गई है।
इसका मतलब यह है कि निरंतरता और अनुभव यूपीएससी में सफलता की कुंजी है।
महिला और पुरुष उम्मीदवारों का प्रदर्शन
यूपीएससी में लैंगिक विविधता (Gender Diversity) धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन पुरुषों की संख्या अभी भी ज्यादा है।
- पुरुष उम्मीदवार: सफल उम्मीदवारों में 65.6% (669) पुरुष शामिल हैं।
- महिला उम्मीदवार: सफल उम्मीदवारों में 34.4% (352) महिलाएं शामिल हैं।
- उम्र और लिंग: 24-26 साल की उम्र में पुरुषों की सफलता दर 2.7% और महिलाओं की 3.9% है, जो बताता है कि युवा महिलाएं इस उम्र में ज्यादा कॉम्पिटिटिव हैं।
ऑप्शनल सब्जेक्ट्स का बदलता क्रेज
पिछले 10 सालों में ऑप्शनल विषयों के चयन में बड़ा बदलाव आया है। विशेष रूप से पॉलिटिकल साइंस (Political Science and International Relations - PSIR) का क्रेज बहुत बढ़ा है।
प्रमुख ऑप्शनल विषयों का 10 साल का डेटा
| विषय (Subject) | 2013 | 2016 | 2019 | 2022 |
| पॉलिटिकल साइंस | 40 | 107 | 137 | 187 |
| समाजशास्त्र (Sociology) | 150 | 132 | 126 | 143 |
| अर्थशास्त्र (Economics) | 53 | 102 | 108 | 139 |
| भूगोल (Geography) | 178 | 203 | 105 | 94 |
| गणित (Mathematics) | 20 | 29 | 45 | 53 |
भूगोल (Geography) जो कभी सबसे लोकप्रिय विषय हुआ करता था, उसके ग्राफ में गिरावट आई है, जबकि पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में भारी उछाल देखा गया है।
ग्रेजुएशन बनाम पोस्ट ग्रेजुएशन
शिक्षा के स्तर की बात करें तो यूपीएससी में ग्रेजुएट उम्मीदवारों का बोलबाला है:
- ग्रेजुएट (Graduate): सिलेक्ट उम्मीदवारों में 75% (765) ग्रेजुएट हैं।
- पोस्ट ग्रेजुएट (Post Graduate): केवल 25% (255) उम्मीदवार ही पीजी (PG) के बाद सफल होते हैं।
यह साबित करता है कि ग्रेजुएट स्तर पर ही गंभीर तैयारी शुरू करना ज्यादा फायदेमंद होता है।
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