YouTube और OTT ऐप्स के लिए आ रहा नया कानून, फ्री सर्विस अब होगी पेड
News In Short
- यूट्यूब चैनल्स पर 24 घंटे चलने वाली फ्री लाइव स्ट्रीमिंग अब बंद होगी।
- नेशनल कमीशन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग और शुल्क के नियम तय करेगा।
- विज्ञापन आधारित फ्री टीवी और इंटरनेट वेब पोर्टल्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- सरकार अब डिजिटल एडवर्टाइजमेंट से मिलने वाली कमाई पर टैक्स वसूलेगी।
- नियमों की अनदेखी करने वाले चैनल्स पर भारी जुर्माना और प्रतिबंध लगेगा।
News In Detail
देश में इंटरनेट आधारित मुफ्त मनोरंजन के दौर पर अब जल्द ही लगाम लगने वाली है। केंद्र सरकार यूट्यूब चैनल्स और एप्स पर होने वाली फ्री लाइव स्ट्रीमिंग को बंद करेगी। अब इंटरनेट आधारित मनोरंजन सेवाओं के लिए सरकार एक निश्चित शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है।
इस पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए एक नेशनल कमीशन का गठन किया जाएगा। यह कमीशन ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रजिस्ट्रेशन, मॉनिटरिंग और शुल्क के नियम निर्धारित करेगा। केंद्रीय संचार मंत्रालय और ट्राइ (TRAI) ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है।
नए नियमों के दायरे में आएंगे ये प्लेटफॉर्म
इस नई नीति के दायरे में मुख्य रूप से दो प्रकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। पहले फ्री एड सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी हैं जो विज्ञापन के बदले मुफ्त सेवाएं देते हैं। यूट्यूब के लाइव सेक्शन में 24 घंटे चलने वाले सभी चैनल (Youtube channel) इसके दायरे में आएंगे। इनमें फिल्म, फूड, न्यूज और मनोरंजन से जुड़े तमाम लाइव स्ट्रीमिंग चैनल शामिल हैं।
दूसरे एप्लीकेशन बेस्ड लीनर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म भी इस नीति के दायरे में रहेंगे। इसमें मोबाइल और टीवी पर चलने वाले जियो टीवी और जी-5 जैसे एप्स आएंगे। पिकासो जैसे अन्य एंटरटेनमेंट पोर्टल भी अब सरकार की नई गाइडलाइंस का हिस्सा बनेंगे।
ऐसे समझें पूरी नई प्रोसेस
सरकार इस बदलाव को पांच प्रमुख चरणों में लागू करने की योजना बना रही है। सबसे पहले सभी यूट्यूब आधारित प्लेटफॉर्म्स के लिए सरकारी रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहे कुल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सटीक डेटा मिल सकेगा।
रजिस्ट्रेशन से लेकर संचालन तक के लिए सरकार एक न्यूनतम शुल्क भी वसूल करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य सभी छोटे-बड़े प्लेटफॉर्म्स को एक साझा कानूनी छतरी के नीचे लाना है। रजिस्ट्रेशन के बाद सरकार इन चैनल्स पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की मॉनिटरिंग करेगी। वर्तमान में केवल शिकायत आने पर ही इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
नई व्यवस्था से राजस्व में वृद्धि
नियमों का उल्लंघन करने या रजिस्ट्रेशन न कराने पर भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई भी की जाएगी। वर्तमान में एड के जरिए होने वाली कमाई पर सरकार को राजस्व नहीं मिलता। नई व्यवस्था लागू होने से सरकार के राजस्व में भी बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है।
साल 2024 में भारत का अनुमानित राजस्व लगभग 75.82 मिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। यह राजस्व का आंकड़ा साल 2027 तक बढ़कर 104.10 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
तुलनात्मक रूप से चीन का राजस्व 2024 में 187.60 और जापान का 86.68 मिलियन डॉलर है। जर्मनी का राजस्व फिलहाल भारत के बराबर है लेकिन भविष्य में यह काफी बढ़ेगा।
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