Toxic Movie Review: क्या केजीएफ जैसा जादू चला पाए रॉकिंग स्टार यश, पढ़ें पूरा रिव्यू
Toxic Movie Review: साउथ के रॉकिंग स्टार यश की मच अवेटेड फिल्म Toxic: A Fairytale for Grown-Ups सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। KGF के बाद फैंस यश को स्क्रीन पर देखने के लिए बेहद एक्ससिटेड थे। 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के भारी बजट में बनी इस फिल्म को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है।
3 घंटे 15 मिनट की इस A रेटेड गैंगस्टर ड्रामा फिल्म में एक्शन की पूरी भरमार है। पीरियड सेटिंग, विंटेज लुक और विंटेज कार्स के साथ इसे काफी बड़े स्केल पर बनाया गया है। लेकिन कहानी के नाम पर फिल्म में काफी डिसअपॉइंटमेंट हाथ लगी है।
यश का स्वांग और डेंजरस लुक स्क्रीन पर जरूर दिखाई देता है। वहीं किआरा अडवाणी अपनी एक्टिंग से सभी का ध्यान खींचने में सक्सेसफुल रहती हैं। आइए जानते हैं कि टॉक्सिक ऑडियंस की उम्मीदों पर खरी उतरी है या नहीं।
कैसी है फिल्म की स्टेरी
टॉक्सिक की कहानी गोवा की अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टर दुनिया पर आधारित है। इसमें साल 1947 के दौर का बैकड्रॉप और विंटेज स्टाइल दिखाया गया है। क्लासिक गैंगस्टर लुक में चुस्त सूट और सिगरेट के धुएं दिखते हैं।
फिल्म का हीरो राया एक खतरनाक और बेपरवाह गैंगस्टर का किरदार है। वह लगातार दुश्मनों पर गोलियां चलाता और खून-खराबा करता है। लेकिन इस हिंसा के बीच कहानी का मेन बेसिस गायब हो जाता है।
फिल्म में किरदारों की मौजूदगी
डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने कई बड़े कलाकारों को इस फिल्म में लिया है। हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया भी फिल्म में अहम रोल में हैं। नयनतारा ने यश की बड़ी बहन गंगा की भूमिका निभाई है।
हालांकि, सभी महिला किरदार किसी पुरुष रिश्ते से जुड़े नजर आते हैं। पूरी फिल्म मेनली सिर्फ यश के स्वैग पर टिकती है। बाकी किरदार कहानी में ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं।
कियारा आडवाणी ने जीता दिल
कियारा आडवाणी ने सर्कस आर्टिस्ट नादिया का बेहतरीन रोल निभाया है। उनकी एंट्री सीन से ही दर्शकों का जुड़ाव बन जाता है। वो फिल्म में सेंटिमेंटलिटी और थोड़ी सॉफ्टनेस लाने का काम करती हैं।
कियारा का एक्टिंग पूरी फिल्म में सबसे राहत देने वाला लगता है। पत्थर दिल राया के साथ उनके सीन काफी अच्छे बने हैं। कियारा अपनी एक्टिंग से दर्शकों पर गहरा असर छोड़ती हैं।
एक्शन और स्क्रीनप्ले का हाल
फिल्म में लगातार एक के बाद एक एक्शन सीन आते रहते हैं। बंदूकें, कुल्हाड़ी और मार-काट का दौर लगातार चलता रहता है। शुरुआत में यह रोमांचक लगता है पर बाद में थका देता है।
फर्स्ट हाफ काफी धीमा लगता है और कहानी खिंचती हुई महसूस होती है। इंटरवल का सीन भी कोई खास बड़ा प्रभाव नहीं बना पाता है। लगातार हो रही हिंसा से दर्शक बोर होने लगते हैं।
क्या फिल्म देखनी चाहिए
अगर आप सिर्फ भारी एक्शन और यश के फैन हैं तो देख सकते हैं। लेकिन अगर आप अच्छी कहानी की उम्मीद कर रहे हैं तो निराशा होगी। फिल्म आखिरी के 15 मिनट में थोड़ी पकड़ बनाती है।
तब तक दर्शक फिल्म से पूरी तरह से डिस्कनेक्ट हो चुके होते हैं। 3 घंटे 15 मिनट का रनटाइम काफी लंबा और भारी लगता है। बहुत ज्यादा शोर और हिंसा के पीछे ठोस कहानी गायब है। movie review | मूवी रिव्यू
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