वन रक्षक-जेल प्रहरी भर्ती से आखिर क्यों हो रहा युवाओं का मोहभंग, जानें कारण
मध्य प्रदेश में वन रक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा (वन रक्षक की भर्ती) में युवाओं का उत्साह इस बार बहुत कम देखने को मिला है। इस संयुक्त भर्ती परीक्षा-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 2062 पदों के लिए सिर्फ 3.92 लाख आवेदन आए हैं। पिछली भर्ती के मुकाबले इस बार आवेदकों की संख्या में काफी गिरावट आई है। इस बार तो चार लाख के आंकड़े को भी नहीं छुआ गया।
पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना
साल 2022-23 में आयोजित भर्ती परीक्षा में युवाओं ने काफी अधिक रुचि दिखाई थी। तब 2 हजार 285 पदों के लिए रिकॉर्ड 8 लाख 62 हजार 393 अभ्यर्थियों ने अपना आवेदन जमा किया था। उस समय परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या ही इस बार के कुल आवेदकों से अधिक थी।
पिछली बार 5 लाख 61 हजार 691 अभ्यर्थी कई केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में सम्मिलित होने पहुंचे थे। साल 2017 की भर्ती में भी 2 हजार 250 पदों के लिए 6 लाख 15 हजार 38 युवाओं ने आवेदन किया था।
आवेदन कम होने के क्या कारण हैं
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भर्ती के बीच कम समय का अंतर एक बड़ा कारण है। साल 2017 के बाद अगली भर्ती 2022-23 में आई थी, यानी 5 साल का लंबा अंतर था, जिस कारण काफी उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे थे।
इस बार सिर्फ दो साल बाद नई भर्ती निकाली गई। कम समय मिलने के कारण कई उम्मीदवार अपनी तैयारी को लेकर परेशान थे। इस कमी के कारण कई युवाओं ने इस बार भर्ती में हिस्सा नहीं लिया।
क्यों घट रहा अभ्यर्थियों का भरोसा
सरकारी नौकरी की तरफ आकर्षण कम होने का एक कारण चयन मंडल की कार्यप्रणाली भी है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) अक्सर परीक्षा शेड्यूल का सही तरीके से पालन नहीं करता। भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता और देरी की वजह से युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए कभी भी पर्याप्त समय नहीं मिलता। यह भी साफ नहीं होता कि कौन सी परीक्षा कब होगी। एक्सपर्ट मानते हैं कि अब नई पीढ़ी सरकारी नौकरी की ओर ज्यादा आकर्षित नहीं हो रही है।
परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार का साया
हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने भी युवाओं को तोड़ा है। पुलिस आरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। परीक्षा केंद्रों पर सेटिंग कर अधिक नंबर पाने के मामलों ने भी भरोसा डगमगाया है।
इन विवादों और धांधली की खबरों से ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थी निराश हैं। निष्पक्षता के अभाव में युवा अब निजी क्षेत्र या अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं। यह स्थिति प्रदेश में सरकारी रोजगार की गिरती साख का एक बड़ा संकेत है।
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