अब गाय चराने पर मिलेगी सरकारी नौकरी और 10 हजार रुपए वेतन

Anjali Dwivedi | Feb 27, 2026, 17:35 IST
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राजस्थान में गांव ग्वाला योजना शुरू हुई। कोटा के खेड़ली गांव से शिक्षा मंत्री मदन सिंह दिलावर ने इसे लॉन्च किया है। इसके तहत 70 गायों पर एक ग्वाला नियुक्त होगा, जिसे हर महीने 10 हजार रुपए का वेतन दिया जाएगा।

भारत में सरकारी नौकरी का अपना एक अलग ही रसूख है। हर पढ़ा-लिखा युवा एक सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता है। राजस्थान सरकार ने एक ऐसी पहल की है, जो न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि हमारी लुप्त होती परंपराओं को भी सहेजेगी। राज्य में अब गाय चराने वालों के लिए गांव ग्वाला योजना की शुरुआत की गई है। जहां ग्वालों को बकायदा वेतन देकर नियुक्त किया जा रहा है।



किसने किया इस योजना का शुभारंभ

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस योजना की शुरुआत कोटा जिले के रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र से की है। चेचट तहसील के खेड़ली गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस योजना का औपचारिक आगाज हुआ। इस खास मौके पर मंत्री दिलावर ने 14 गांवों के लिए 1-1 ग्वाले की नियुक्ति की। परंपरा का सम्मान करते हुए, नियुक्त किए गए ग्वालों का साफा और माला पहनाकर अभिनंदन किया गया।



इस अनोखी योजना का मेन मकसद क्या है?

गांव ग्वाला योजना का मुख्य उद्देश्य भारत की उस प्राचीन गोचारण परंपरा को पुनर्जीवित करना है, जो आधुनिकता की दौड़ में कहीं पीछे छूट गई थी। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने गाय के महत्व पर प्रकाश डाला है। साथ ही कहा कि गाय का दूध न केवल शरीर में स्फूर्ति लाता है, बल्कि बुद्धि के विकास में भी सहायक होता है। इस योजना के जरिए गांवों में गायों की देखभाल को एक संगठित स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है।



70 गायों पर तैनात होगा एक ग्वाला

योजना के मुताबिक, वर्तमान में प्रत्येक 70 गायों के झुंड पर एक ग्वाले को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि जैसे-जैसे गायों की संख्या में इजाफा होगा, उसी अनुपात में ग्वालों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इन ग्वालों की मुख्य जिम्मेदारी यह होगी कि वे सुबह गांव की गांव के सभी गायों को गोचर तक ले जाएं, उन्हें दिनभर चराएं और शाम होते ही सुरक्षित उनके घरों तक वापस पहुंचाएं।



  • यह राशि सरकारी बजट से नहीं, बल्कि भामाशाह सहयोग मॉडल के जरिए जुटाई जाएगी।
  • स्थानीय दानदाता और गो-प्रेमी मिलकर यह मानदेय देंगे। इसके लिए गांव में स्थनीय स्तर पर फंड तैयार किया जाएगा।
  • गाय वो होंगी, जिन्हें लोग छोड़ देते हैं। राजस्थान में ऐसी काफी गायें हैं, जो आवारा घूमती हैं।

10 हजार रुपए सैलरी मिलेगी

रोजगार के लिहाज से देखें तो इस योजना के तहत नियुक्त ग्वाले (चरवाहा और गौसेवक भर्ती) को हर महीने 10 हजार रुपए का वेतन दिया जाएगा। यहां यह समझना जरूरी है कि यह वेतन राज्य सरकार के खजाने से नहीं, बल्कि भामाशाह सहयोग से दिया जाएगा। यानी समाज के दानदाताओं और लोगों के सहयोग से यह फंड इकट्ठा किया जाएगा और ग्वालों को उनके श्रम का उचित पारिश्रमिक दिया जाएगा।



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