NEWS STRIKE: क्या बदल रहा है युवा वोटर?BJP के बड़े अभियान के आंकड़ों ने चौंकाया!
किसी प्रतियोगिता में एक लाख रुपए का पहला इनाम हो, लेकिन जेन जी उसमें इंटरेस्ट न लें। ये बात चौंकाने वाली है, लेकिन बीजेपी के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है। जेन जी और जेन अल्फा को लेकर बीजेपी इन दिनों काफी एक्सपेरिमेंटल हो गई है।
मामला वोटों का हो तो संवेदनशीलता दिखानी ही पड़ती है। लाड़ली बहनों पर प्यार लुटाने वाली पार्टी को ये समझ में आ चुका है कि महीने की तय राशि देकर बहनों से लाड़ जताया जा सकता है, लेकिन जेन जी और जेन अल्फा तो पूरी जनरेशन है बोले तो सिग्मा वोटर्स हैं ये।
जिन्हें महीने में एक बार रकम देना काफी नहीं हैं। उन्हें मनाने के लिए बीजेपी को जमकर पापड़ बेलने पड़ेंगे। बीजेपी के वॉइस ऑफ यंग इंडिया अभियान का हाल देखकर ये समझना बहुत आसान हो गया है।
जेन Z के बाद अब जेन अल्फा की दस्तक
जैन जी ने जंतर मंतर पर जमा होकर बीजेपी की धड़कनें बढ़ा दीं और अब जैन अल्फा धरने प्रदर्शन करके पार्टी की नींद उड़ा रही है। जेन अल्फा के लिए हम ये कह सकते हैं कि ब्रो सीरियसली… अभी तुम ढंग से उगा भी नहीं है और ऑलरेडी वी वॉन्ट जस्टिस मोड में आ चुका है।
माफ कीजिएगा थोड़ी कोशिश कर रहे हैं नई जनरेशन की इस इंटरेस्टिंग भाषा को बोलने की। जब लोकसभा में डेलूलू, कुचु पुचू और क्लॉक्ड इट और फोमो जैसे शब्द गूंज सकते हैं तो हम भी थोड़ी बहुत कोशिश कर ही सकते हैं।
बीजेपी का Gen Alpha कनेक्ट प्लान कितना असरदार?
वैसे कोशिश करने में बुराई भी क्या है। बीजेपी भी तो इन दिनों यही कोशिश कर रही है कि बस किसी भी तरह जैन जी के दिल में घर बना ले, लेकिन दिल में घर बनाने से पहले इस जनरेशन को अपना नूरे नजर बनाना पड़ेगा यानी कि इन्हें ब्रो बनाना पड़ेगा और या इनका ब्रो बनना पड़ेगा। तब कहीं जाकर बात बनेगी।
कांग्रेस इसके लिए छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रही है। बीजेपी भी युवाओं को मेरा मतलब है जैन जी को जोड़ने की नई नई स्कीम ला रही है। ताजा स्कीम है वॉइस ऑफ यंग इंडिया अभियान।
इस अभियान के जरिए पार्टी डायरेक्टली जैन जी को अपना फैन बनाने की तैयारी में है। दांव एक लाख रुपए का खेला गया है। पर जैसा मैंने कहा कि सिग्मा वोटर्स को रिझाना इतना आसान होने वाला नहीं है। वही हाल इस अभियान का भी नजर आ रहा है।
बीजेपी का युवा मिशन, 1 लाख का इनाम दांव पर
चलिए पहले आपको इस अभियान के बारे में बता देते हैं। बीजेपी की युवा विंग यानी कि भारतीय जनता युवा मोर्चा ने वॉइस ऑफ यंग इंडिया अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत जेन जी को पार्टी से जोड़ने की तैयारी है।
पार्टी का दावा है कि इस अभियान के जरिए युवाओं को जोड़ा जाएगा और विकसित भारत के प्रति उनके क्या विचार हैं। उन्हें सुना और समझा जाएगा। अलग-अलग स्तर पर भाषण प्रतियोगिताएं भी होंगी। जिनमें से बेस्ट ओरेटर यानी कि भाषणबाज को तगड़ा इनाम दिया जाएगा।
हम तगड़ा इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि इनाम की रकम एक लाख रुपए रखी गई है। ये कोई छोटी मोटी रकम नहीं है। कॉम्पिटीशन में अव्वल आने वाले को एक लाख रुपए का इनाम ही मिलेगा। सेकंड आने वाले को पचास हजार रुपए और थर्ड आने वाले को पच्चीस हजार रुपए दिए जाएंगे।
इसके अलावा उन्हें ट्रॉफी और सर्टिफिकेट भी मिलेगा। भाषण देने के लिए कंटेस्टेंट के पास पांच टॉपिक होंगे। जिसमें से उसे चुनाव करना है। ये टॉपिक हैं विकसित भारत@2047 का संकल्प, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व, महिला नेतृत्व वाला विकास और Nation First: मेरा संकल्प।
दावों के बीच आंकड़ों ने बढ़ाई बीजेपी की चिंता
बीजेपी दावा कर रही है कि इस अभियान का जम कर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। प्रदेश के स्कूल, कॉलेज, कोचिंग इंस्टीट्यूट तक में अभियान की चर्चा हो रही है।
खुद युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्याम टेलर ने इसे युवाओं के लिए एक अच्छा मंच बताया है और उम्मीद जताई है कि जो युवा 2047 में विकसित भारत का सपना देखते हैं और इसकी परिकल्पना करते हैं वो इस अभियान से जुड़ेंगे, लेकिन जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं वो बीजेपी और युवा मोर्चा की उम्मीदों को पलीता लगाते दिख रहे हैं।
रील वाली Gen Z ने बीजेपी को चौंकाया
असल ट्विस्ट भी उन्हीं आंकड़ों में है। असल में युवा मोर्चा ने युवाओं से दो से तीन मिनट के वीडियो मंगवाए थे। जिसमें वो अपनी ओरेटर स्किल्स दिखाएंगे और फिर पार्टी से जुड़ेंगे।
जेन जी प्रोटेस्टे के बाद ये माना गया कि ये रीलबाज जनरेशन है। जो वीडियो बनाने में झिझकती नहीं है। जिसे माइक मंच या स्क्रिप्ट जैसी किसी औपचारिकता की जरूरत भी नहीं है। बस हाथ में मोबाइल है यानी कैमरा है और उसके सामने खड़े होकर बोलने का हुनर भी है।
यही वो जनरेशन भी है जो घंटो मोबाइल पर रील देखते हुए बिता सकती है। यही आसार देखकर बीजेपी ने अपने अभियान के लिए सोशल मीडिया का ही मंच भी चुना।
इस मौके के बारे में सुनकर लग सकता है कि अरे वाह देश की सबसे बड़ी सबसे पावरफुल पार्टी कोई मौका दे रही है और भारीभरकम इनाम भी दे रही है। तो जेन जी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लिया होगा, लेकिन जो रिस्पॉन्स है वो चौंकाने वाला है। प्रदेश के सिर्फ 2 हजार युवाओं ने इस अभियान के लिए अपने वीडियो भेजे हैं।
युवा वोटर्स को साधने में बीजेपी की चुनौती
आंकड़े पर गौर किया आपने। सिर्फ दो हजार युवाओं ने इस योजना में दिलचस्पी लेते हुए वीडियो भेजे हैं। बीजेपी के लिए ये आंकड़ा काफी चिंताजनक है। सोशल मीडिया पर पार्टी का भौकाल कुछ यूं है कि हर उम्र के लोग उसके मुरीद हुए जा रहे हैं।
विदेशों से लेकर देश और प्रदेश में बीजेपी के नाम का डंका बज रहा है, लेकिन जब युवाओं के रिस्पॉन्स की बात आती है तो ये सारी बातें बेमानी सी लगने लगती है और एक ही सवाल जेहन में आता है कि क्या जेन जी और जेन अल्फा बीजेपी से छिटक रहे हैं।
बीजेपी अब तक सिर्फ जाति, धर्म और महिला वोटर्स में उलझी रही और उधर एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो गई जिसे न राम मंदिर का मुद्दा लुभाता है न आर्टिकल 370 अट्रेक्ट करता है। न सनातन और संस्कृति जैसी बातें उस पर असर करती है।
इस पीढ़ी की एक अलग दुनिया है और एक अलग जरूरतें हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि ये पीढ़ी भी अच्छी कमाई और अच्छी जिंदगी चाहती है। बाकी सब इसके बाद है।
यानी धर्म और मजहब में क्या ऊपर है। किस जाति के लोग कौन से कपड़े पहनते हैं किस ग्रंथ को मानते हैं ये सब बाद की बात है। शायद इसलिए बीजेपी का जादू इस पीढ़ी पर नहीं चल रहा है।
2 हजार वीडियो पर उठे युवा कनेक्ट के सवाल
इसे हम युवा वोटर्स के आंकड़ों के हिसाब से भी समझ सकते हैं। मप्र में कुल वोटर्स की संख्या 5.67 करोड़ है। हाल ही में हुई एसआईआर की प्रक्रिया के बाद प्रदेश 27 लाख 40 हजार वोटर्स बढ़े हैं। चलिए मान लेते हैं कि इसमें अधिकांश वो वोटर्स होंगे जो पहले से वोट डाल रहे होंगे।
कुछ ऐसे भी युवा होंगे जो अब वोट डालने लायक हुए होंगे। हम मिनिमम आंकड़े पर बात करते हैं। मान लेते हैं 2 लाख युवा ऐसे होंगे जो आने वाले चुनाव में पहली बार वोट करेंगे। क्या उनमें से केवल दो हजार ने ही बीजेपी की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
30 लाख युवाओं के बीच 2 हजार रिस्पॉन्स
इसे आप हवाहवाई दावा मान सकते हैं तो आंकड़ो को और गंभीरता से समझ लेते हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन 24-25 के पॉपुलेशन प्रोजेक्शन के अनुसार प्रदेश में 16 से 17 साल के बच्चों की संख्या तीस लाख से कुछ ऊपर है।
सही-सही आंकड़ा देखें तो वो 30 लाख 70 हजार 528 है। ये वो युवा हैं जो 2028 के चुनाव तक वोट देने की स्थिति में होंगे। इस लिहाज से बीजेपी को जो रिस्पॉन्स मिला है वो जेन जी और जेन अल्फा कहलाने वाले इन युवाओं का एक परसेंट भी नहीं है।
बीजेपी के मजबूत नेटवर्क पर भी उठे सवाल
अब बात करते हैं। बीजेपी के खुद के नेटवर्क की। बीजेपी के कार्यकर्ताओं का नेटवर्क कितना सॉलिड है ये आप जानते ही हैं। बीजेपी हर बार अभियान चलाती है तो कार्यकर्ताओं को जोड़ने की बात करोड़ों में होती है।
इसके बाद हर जिले में एक-एक अध्यक्ष है. कुछ जिलों में तो दो अध्यक्ष तक हैं। इसके अलवा संभाग पर टीम अलग है। संगठन की इस पूरी टीम, भारतीय जनता युवा मोर्चा और एबीवीपी के प्रयासों के बाद सिर्फ दो हजार युवाओं ने ही बीजेपी के इस अभियान में दिलचस्पी ली है।
इस मामले पर खुद बीजेपी के ही एक नेता का कहना है कि सारी ताकत झौंकने के बाद भी सिर्फ दो हजार एंट्रीज आई हैं। इस खुद उन्होंने बीजेपी को आइना दिखाने वाले नंबर्स बताया है।
सोशल मीडिया आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
इससे भी ज्यादा हैरानी आपको तब होगी जब आप मप्र के भारतीय जनता युवा मोर्चा के ट्विटर हैंडल को देखेंगे। इस हैंडल पर पार्टी ने युवाओं के वीडियो से जुड़ा एक पोस्ट शेयर किया है। खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट को तेईस घंटे हो चुके थे।
तब तक इस पोस्ट को सिर्फ 436 लोगों ने देखा था सिर्फ 4 लाइक्स थे और दो ही लोगों ने इस पर कमेंट भी किए थे। इससे पहले चार सेप्टेंबर को वीडियो पोस्ट किए गए थे। उस पोस्ट को केवल 303 लोगों ने देखा है।
बीजेपी सोशल मीडिया के आंकड़े भी बढ़ा चढ़ाकर बताती है और नंबर्स ज्यादा होने पर महिमामंडन करने से भी नहीं चूकती। लेकिन युवा अभियान से जुड़ी पोस्ट पर जो नंबर आ रहे हैं और जो रिस्पॉन्स मिल रहा है। उसे देखकर बीजेपी की चिंता और बढ़ना लाजमी है। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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