News Strike: मंत्रिमंडल विस्तार से पहले MP BJP में बड़ा ट्विस्ट, आया पार्टी का मास्टरमाइंड
समझें पूरा मामला...
- शिवप्रकाश मप्र में मंत्रियों और संगठन के बीच तालमेल बनाएंगे।
- वन टू वन में मंत्रियों से कार्य और नवाचार पर सवाल पूछे जाएंगे।
- निगम मंडलों में नियुक्तियों और शक्ति प्रदर्शन पर निगरानी।
- वरिष्ठ नेता कुंवर विजय शाह पर बड़ा फैसला संभव।
- पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी का जमीनी नेटवर्क मजबूत होगा।
News Strike | न्यूज स्ट्राइक:मध्यप्रदेश बीजेपी में तिनका भी हिलेगा तो उसकी खबर आलाकमान तक पहुंचेगी। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि मध्यप्रदेश में हर हलचल उनके इशारे पर ही होगी। इसे आप नगरीय निकाय चुनाव से पहले की तैयारी के तौर पर भी देख सकते हैं। जो कैबिनेट रिशफल या एक्सपांसन के साथ ही शुरू हो जाएगी।
पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद तेज है। केंद्र के एक फैसले से इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा टविस्ट आ गया है। जिससे संगठन का काम आसान जरूर हुआ होगा, लेकिन मंत्रियों का टेंशन भी जरूर बढ़ गया होगा। क्योंकि क्लोज डोर चर्चा की खनक तक अब सीधे आलाकमान के कानों तक जाएगी। इसे बीजेपी का डैमेज कंट्रोल एक्शन भी माना जा रहा है।
सीएम-शिवप्रकाश की वन टू वन जांच
इस ट्विस्ट को आम फिल्मी ट्विस्ट मत समझिए जिसके बाद क्लाइमेक्स आएगा और बस कहानी खत्म। बल्कि ये कवायद एक नई शुरुआत की है और एक बड़ा मैसेज भी है कि बीजेपी ने मध्यप्रदेश पर जो लगाम कस के रखी है। उसे वो जरा सी भी ढील देने के मूड में नहीं है। ये मामला जुड़ा है मंत्रिमंडल विस्तार से। जिसके लिए खुद सीएम मंत्रियों से वन टू वन कर रहे हैं।
इस वन टू वन में मौजूदा मंत्रियों से तमाम तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। कुछ खबरें जो बंद दरवाजों के पीछे हुए वन टू वन से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक सीएम उन नवाचारों के बारे में पूछ रहे हैं। जिससे समाज में या सीट पर कुछ खास बदलाव देखने को मिल रहे हैं। या ऐसे काम जिनकी वजह से विभाग के कामों में कसावट आ गई हो।
इन सब सवालों के जवाब तो हर मंत्री को देने ही हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें अपनी पार्टी के एक आला नेता से भी मुखातिब होना हैं। ये नेता हैं बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश।
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शिवप्रकाश की निगरानी में नियुक्तियां तेज
जो इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में ही बने रहेंगे। सिर्फ इतना ही नहीं बहुत से काम उनकी निगरानी में ही पूरे होंगे। मसलन मंत्रिमंडल विस्तार और उसके अलावा निगम मंडल में नियुक्तियां।
शिवप्रकाश के आने के बाद से ये माना जा रहा है कि अब मंत्रिमंडल विस्तार की प्रोसेस तेज हो जाएगी। निगम मंडलों में कुछ की तो नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन अब उसमें तेजी लाने का काम शिवप्रकाश करेंगे और जो नेता ये पद मिलते ही शक्ति प्रदर्शन में जुट रहे हैं। उन्हें कसने का काम भी शिवप्रकाश के जिम्मे माना जा रहा है।
पीएम मोदी की पेट्रोल बचाने की अपील के बाद भी कई निगम मंडल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गाड़ियों के काफिले के साथ ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे या फिर कार्यालय आए या फिर दौरे पर गए। इस बात से दिल्ली दरबार में काफी नाराजगी है। इस नाराजगी को दूर करने की दिशा में भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है।
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बीजेपी-आरएसएस का भरोसेमंद लिंक
असल माजरा क्या है आप जानते हैं। शायद नहीं न चलिए हम बताते हैं। असल में शिवप्रकाश की मौजूदगी यूं ही नहीं है। शिवप्रकाश संगठन के ऐसे नेता हैं जो बहुत संजीदा और मैनेजमेंट के एक्सपर्ट माने जाते हैं।
वो बूथ और चुनाव प्रबंधन में माहिर हैं और माइक्रोलेवल की प्लानिंग में बीजेपी के भरोसेमंद और आजमाए हुए नेता हैं। वो संघ से सीधे जुड़े हुए हैं। वहीं से प्रतिनियुक्ति पर पार्टी में आए हैं।
इसलिए बीजेपी और आरएसएस दोनों के बीच उनका समन्वय भी बेहतरीन है। इससे आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि शिवप्रकाश का मंत्रिमंडल की अटकलों के बीच मप्र आना जितना सिंपल और प्रत्याशित लग रहा है। उतना है नहीं।
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मंत्रियों पर निगरानी और डैमेज कंट्रोल
तो अंदर की खबर क्या है। वो भी हम आपको बताते हैं। अंदर की खबर ये है कि बीजेपी ने उन्हें डैमेज कंट्रोल और बेहतर तालमेल के लिए यहां भेजा है। वैसे तो मंत्रिमंडल को लेकर कुछ कंफर्म नहीं है। पर ये अटकलें तेज हैं कि बीजेपी अपने सीनियर मंत्रियों को लेकर कोई अहम फैसला ले सकती है।
खासतौर से कुंवर विजय शाह का नाम इसमें सबसे आगे है। कर्नल सौफिया कुरैशी मामले पर अगर बात आगे बढ़ती है तो शाह पर बड़ा फैसला लेना बीजेपी की मजबूरी बन जाएगा। ऐसे समय पर हालात संभालने के लिए शिवप्रकाश जैसे सीनियर लीडर की जरूरत पड़ सकती है।
सत्ता और अनुशासन संभालने आए शिवप्रकाश
बात इतने पर ही खत्म नहीं होती। असल में पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें भी लगातार आ रही हैं कि मप्र में सत्ता और संगठन में समन्वय कम हो रहा है।
कुछ मंत्रियों के सीएम के साथ भी पटरी न बैठने की खबर है। इसके अलावा बीजेपी के कुछ नेताओं की लगातार अराजक होने की खबर आ रही है या फिर वो लगातार सत्ता में बने रहने की वजह से अनुशासन भूल चुके हैं। अब शिवप्रकाश उनकी लगाम कसने मप्र आए हैं।
शिवप्रकाश संभालेंगे चुनाव और संगठन
ये कसावट सिर्फ मंत्रिमंडल के लिए नहीं है। पंचायत चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव भी अब नजदीक आ रहे हैं। ऐसे समय में पार्टी का जमीनी नेटवर्क ही कमजोर पड़ा तो उसका खामियाजा प्रदेश स्तर पर भी भुगतना पड़ेगा।
बीजेपी इतने बड़े नुकसान के लिए बिलकुल तैयार नहीं है। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व ने देर आए दुरुस्त आए वाली स्थिति आने से पहले ही जरूरी कदम उठा लिए हैं।
शिवप्रकाश संगठन की आंख और कान बनकर प्रदेश में रहेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़ा वन टू वन हो या फिर निगम मंडल के नए नए अध्यक्षों को संयमित रखना हो। सब कुछ शिवप्रकाश हैंडल करेंगे और दिल्ली दरबार तक एक एक खबर भी पहुंचाते रहेंगे।
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बनाएंगे सरकार और नेताओं का तालमेल
बीजेपी की पूरी कोशिश है कि जिन मसलों पर विपक्ष को बड़ा मुद्दा बन जाता है और सरकार की किरकिरी होती है। उन मसलों को पूरी तरह नियंत्रित कर दिया जाए।
खासतौर से मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच का तालमेल ठीक रखा जाए। ताकि विपक्ष को सरकार की खिल्ली उड़ाने का कोई मौका नहीं मिले। इसलिए शिवप्रकाश के रहते या यहां से जाने के बाद कोई बड़ा बदलाव आपको मध्यप्रदेश में नजर आए तो हैरान मत होइएगा।
बस समझ जाइएगा कि बीजेपी संगठन अब नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए कमर कस चुका है। जिसके लिए बड़े नेताओं की क्लास भी लग सकती है या बड़ा एक्शन भी हो सकता है।