News Strike: मोहब्बत में भी सियासत! नरोत्तम मिश्रा की वापसी पर BJP में क्या चल रहा है?
ये सच है रंग बदलता था वो हर इक लम्हा
मगर वही तो बहुत कामयाब चेहरा था...
अंबर बहराइची का ये शेर बीजेपी के एक नेता पर बिलकुल फिट बैठता है। ये नेता हैं नरोत्तम मिश्रा। जो सियासी गलियारों में किसी पहेली की तरह बन चुके हैं। जब से वो दतिया का चुनाव हारे हैं तब से अटकलें हैं कि उनका पॉलिटिकल करियर खत्म हो चुका है, लेकिन बीते कुछ दिनों से नरोत्तम मिश्रा जिस तरह से एक्टिव हुए हैं। उसे देखकर लगता नहीं कि वो फिलहाल पॉलिटिक्स को अलविदा कहने वाले हैं।
खैर अलविदा कहने का तो सवाल भी नहीं उठता। पर उन्हें घर बिठाने की जो कोशिशें हैं वो भी बेमानी ही नजर आती हैं। फिलहाल नरोत्तम मिश्रा मुलाकातों की नाव पर सवार हैं। अब ये मुलाकात उन्हें किस किनारे ले जाती हैं ये भी देखने वाली बात है।
नरोत्तम के शेर में छिपा सियासी संकेत
वैसे हम शेरो शायरी कम ही करते हैं। पर नरोत्तम मिश्रा की बात जब भी होती है मुझे कुछ शेर याद आ ही जाते हैं। वो इसलिए भी तकरीबन हार की कगार तक पहुंचने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने भी एक शेर कहा था। आपको याद ही होगा न याद हो तो सुन लीजिए।
नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, मेरा पानी उतरता देख समंदर पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौटकर जरूर आऊंगा। ये अलग बात है कि कुछ समय बाद जब उनसे इस पर सवाल पूछा गया तो मॉडेस्टी दिखाते हुए उन्होंने कहा कि बिलकुल बनाए।
नरोत्तम की सियासत में शेर का दर्द
खैर ये पुरानी बात है, लेकिन हम आपको एक शेर और सुनाते हैं जो मौजूदा सिचुएशन के लिए एकदम सटीक है।
कल सियासत में भी मोहब्बत थी
अब मोहब्बत में भी सियासत है...
ख्वाजा साजिद का ये शेर लगता है नरोत्तम मिश्रा के आज के हालात पर ही लिखा गया है। जब वो सियासत में पावरफुल थे तब पार्टी ने उनसे जमकर मोहब्बत दिखाई थी, लेकिन दतिया चुनाव हारे तब से पॉलिटिकल कम बैक के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं।
दतिया की सीट पर उपचुनाव हुए तब भी नरोत्तम मिश्रा को ये गुमान हो गया था कि समंदर की वापसी का वक्त आ चुका है। सो नाम का ऐलान होने से पहले ही नामांकन पत्र खरीद लिया, लेकिन बीजेपी में उनकी दाल नहीं गली।
टिकट कटा तो दतिया में नरोत्तम समर्थकों ने नया इतिहास रच दिया। उनके समर्थकों से मास रेसिग्नेशन दिए और प्रदर्शन भी किया। उसके बाद खुद नरोत्तम मिश्रा की समझाइश के बाद हालात नॉर्मल हुए।
नरोत्तम की दिल्ली दौड़ में सियासत
दतिया उपचुनाव की जिम्मेदारी पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा की ही सौंप दी, लेकिन बीजेपी हार गई। दतिया वापस कांग्रेस की झोली में चला गया। इसके बाद मुलाकातों को लेकर ऐसा पॉलिटिकल ड्रामा चल रहा है, जिसे देखकर आप भी कहेंगे कि वाकई अब मोहब्बतों में भी सियासत है।
दतिया चुनाव के नतीजे आने के बाद नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे। उनसे सवाल भी हुआ कि क्या वो आला नेताओं से मिलने आए हैं। नरोत्तम मिश्रा ने दो टूक जवाब दिया कि जब मिलने का समय ही नहीं मांगा तो मुलाकात का सवाल भी नहीं उठता है।
नरोत्तम पर संगठन का रुख, समर्थकों का साथ
इसके बाद नितिन नवीन यानी की बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपनी टीम का ऐलान किया। इस टीम में भी नरोत्तम मिश्रा को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई।
मैसेज क्लियर लगा कि नरोत्तम मिश्रा के हाथ से सत्ता निकल चुकी है और अब संगठन ने भी उन्हें साइड लाइन कर दिया है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा के समर्थक लॉयल्टी दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ते।
हार के बाद दिल्ली दौरा और फिर नरोत्तम मिश्रा की दतिया वापसी। इसके बाद जिस तरह से उनका स्वागत हुआ है उससे जाहिर होता है कि समर्थकों की आस्था अब तक बरकरार है।
पार्टी में जो भी नियुक्तियां होनी थीं हो चुकी हैं, लेकिन ताज्जुब देखिए कि नरोत्तम मिश्रा अब तक सुर्खियों में हैं और बड़े-बड़े नेता उनसे मुलाकात कर रहे हैं।
नरोत्तम की मुलाकातों के सियासी मायने
अपने ट्विटर अकाउंट पर नरोत्तम मिश्रा ने हाल ही में दो तस्वीरें शेयर कीं। एक में वो सीनियर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ दिख रहे हैं और दूसरी तस्वीर में वो मंत्री कुंवर विजय शाह के साथ दिख रहे हैं।
दोनों अलग-अलग समय पर नरोत्तम मिश्रा के भोपाल आवास पर पहुंचे। तस्वीरें देखकर आप कह सकते हैं कि मुलाकातें बेतकुल्लफी के साथ पूरी हुईं और बातचीत भी दिलचस्प रही।
क्या ये तस्वीरें कोई संदेश देती हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली मुलाकात हुई अजय जामवाल के साथ। नरोत्तम मिश्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट से इसकी भी तस्वीरें शेयर की हैं। उन्होंने लिखा कि उनके विनम्र आग्रह पर क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल उनके निवास पर पहुंचे। मुलाकात के दौरान दोनों की मुस्कान भी साफ दिख रही है।
नरोत्तम की वापसी के संकेत या सिर्फ मुलाकात?
नरोत्तम मिश्रा इतने पर ही नहीं रुके। वो दिल्ली पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। बस उसके बाद से ही नरोत्तम मिश्रा फिर सुर्खियों में हैं।
क्या मप्र लेवल पर पहले फील्डिंग सेट की और उसके बाद नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे। मंत्रियों से मुलाकात को तो पुराने मित्रों से हुई मुलाकात मानकर छोड़ भी दिया जा सका है, लेकिन पहले अजय जामवाल और फिर नितिन नवीन से मिलना क्या बेमानी है।
ये वो नेता हैं जिनका समय आसानी से किसी भी पार्टी नेता को नहीं मिलता और जब समय मिलता है तो उस मुलाकात का कुछ न कुछ सबब भी होता है। तो क्या बीजेपी कोई नया ऐलान कर सकती है और नरोत्तम मिश्रा की वापसी लोगों को चौंका सकती है।
नरोत्तम की अगली सियासी चाल क्या होगी?
अगर नरोत्तम की वापसी हुई तो वो कौन सा पद होगा जिस पर वो नजर आएंगे। वैसे तो सत्ता और संगठन के सारे पद भर गए हैं। राष्ट्रीय टीम भी पूरी तरह बन चुकी है। राज्य की सत्ता में वापसी की कोई गुंजाइश नहीं पर क्या संगठन में उन्हें कोई मौका मिल सकता है। या पार्टी कोई ऐसा फैसला सुनाएगी जो हैरान करेगा।
राजनीतिक जानकारों की नजर से देखें तो इसका दूसरा पहलू ये भी है कि मुलाकात पर मुलाकात की तस्वीरें दिखाकर नरोत्तम क्या ये भ्रम बनाकर रख रहे हैं कि पार्टी में उनका जलवा अब भी कायम है। इससे मतदाता बहलें या न बहलें, लेकिन समर्थकों का उत्साह और निष्ठा तो कम से कम बनी ही रहेगी।
इन मुलाकातों के क्या मायने हैं ये कुछ दिनों में सबके सामने आ ही जाएगा। तब ये अंदाजा होगा कि समंदर का पानी क्या वाकई किनारे छोड़ रहा है या फिर लहरों की दमदार वापसी हुई है।
News Strike | न्यूज स्ट्राइक
ये खबरें भी पढ़ें...
News Strike: स्कूल दिखाओ अभियान से डरी सरकारें? CJP बनाम BJP की सियासत का सच
News Strike | MP Politics में Gen Z की एंट्री! बीजेपी-कांग्रेस दोनों की नजर अब युवाओं पर
News Strike: भोपाल में 5 दिन का अनशन, फिर भी सुर्खियां में नहीं, कौन हैं नरेंद्र राजपूत?
News Strike: GEN Z और जैन अल्फा की नाराजगी दूर करने में जुटी BJP! CM हाउस में बनी नई रणनीति