NEWS STRIKE: आंदोलन से Instagram तक, BJP को क्यों समझना पड़ रहा Gen Z का मिजाज?

Harish Divekar | Aug 15, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
Gen Z और Gen Alpha के बढ़ते प्रभाव से राजनीति का अंदाज बदल रहा है। बीजेपी नेता भी सोशल मीडिया, युवाओं और नए आंदोलनों के हिसाब से अपनी रणनीति बदलते नजर आ रहे हैं।

क्या जेन जी (GEN-Z) और जेन अल्फा ने बीजेपी नेताओं को उनका अंदाज बदलने पर मजबूर कर दिया है। सीएम मोहन यादव को ही ले लीजिए बच्चों के बीच पहुंचे तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान सजा ली।



मिजाज ऐसा जिसमें सीएम पद की ठसक कम और बेतक्कलुफी ज्यादा नजर आई। और, मौका मिला तो खुद सेल्फी स्टिक पकड़ कर बच्चों के साथ खुद ही फोटो भी क्लिक की।



बच्चे नहीं… हम उन्हें जैन अल्फा कहें तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि मिजाज में ये बदलाव की असल वजह भी ये जेन जी और जेन अल्फा ही तो हैं। जिन्होंने सिर्फ मप्र सरकार नहीं बीजेपी की हर सरकार के सोचने का तरीका बदल दिया है या बदलने पर मजबूर कर दिया है।



पिछले कुछ दिनों से जेन जी और जेन अल्फा प्रदेश में भी आंदोलनों का केंद्र बन गई हैं। इसका असर पंद्रह अगस्त के भाषणों में नजर आने की भी पूरी-पूरी गुंजाइश है।



बीजेपी नेताओं का बदला अंदाज, नई पीढ़ी का असर

आपने बीजेपी नेताओं में एक चीज जरूर नोट की होगी। आम पार्टियों का नेता आपको ढीला ढाला, अनसिस्टमेटिक या अपनी ही मस्ती में रमा दिख सकता है, लेकिन बीजेपी के नेताओं में खासतौर से आला नेताओं में एक अलग बॉडी लेंग्वेज होती है। जरा तनी हुई… चेहरे पर संजीदगी... नपी तुली बॉडी लेंग्वेज… और किफायती सी मुस्कान... ये तरीका इन नेताओं का अलग ऑरा क्रिएट करता है।



संघ का अनुशासन और संगठन की गाइडलाइन को इसके पीछे की वजह कहा जा सकता है पर अब सब कुछ बदल गया है। अब तने हुए नेता, शब्दों का सोच समझ कर चयन करने के बाद बोलने वाले नेता और अनुशासित बॉडी लेंग्वेज में ढले नेता खुद को बेतक्कलुफ, मिलनसार दिखाने की कोशिश में जुट गए हैं।



जेन जी की भाषा में बोलूं तो जॉली और कैनडिड होने की जीतोड़ कोशिश करते दिख रहे हैं। खुद पीएम मोदी के वीडियो भी नमस्कार की जगह हैलो फ्रेंड्स से शुरू हुए और खूब वायरल भी हुए। ये सब जैन जी आंदोलन का ही तो असर है।



किसान आंदोलन में दिखा जेन जी का नया रंग

एक बार इस आंदोलन ने जोर क्या पकड़ा। मप्र में भी जेन जी आंदोलन की लहर सी चल पड़ी है। आपको याद होगा राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन हुआ। वैसे तो अन्नदाता का सड़क पर उतने को मजबूर होना ही सरकार की टेंशन बढ़ा देता है। उस पर से इसमें जैन जी के शामिल होने की भनक पड़ी तो टेंशन दुगना होना लाजमी ही था।



खबरें आईं कि किसानों के बच्चे और दूसरे युवा इस आंदोलन में शामिल होने आ रहे हैं। कुछ ही देर में ऐसी तख्तियां भी तैयार होने लगीं जिसमें जेन जी स्टाइल के नारे लिखे दिखने लगे। वो लहराकर कर सुर्खियां बने उससे पहले किसानों के आंदोलन पर सरकार में बातचीत हो गई और आंदोलन खत्म हुआ।



जेन अल्फा की आवाज से बदला आंदोलन का अंदाज

पर सरकार चैन की सांस लेती उससे पहले जेन जी और जेन अल्फा ही सड़क पर उतर आए। देवास के बीसाखेड़ी में स्कूली बच्चियां सड़क न होने की शिकायत लेकर उपमुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा के पास पहुंची। मंत्रीजी ने भी ठसक दिखाने की जगह प्यार से सिर पर हाथ फेरा और आश्वासन दे दिया।



इस मुलाकात की तस्वीरें वायरल हो ही रही थीं कि कुछ बच्चियां बस किराया कम करने की मांग को लेकर सड़क पर आ गईं। सिरोंज की इन स्कूली बच्चियों का वीडियो भी जेन अल्फा प्रोटेस्ट के नाम से वायरल हुआ। बच्चियों का कहना था कि बस किराया ज्यादा होने की वजह से उन्हें स्कूल जाना मुश्किल हो रहा है।



ये वायरल तस्वीरें ये भी जताती हैं कि अब किसी तबके, संघ या संगठन के आंदोलन से ज्यादा जेन जी और जेन अल्फा के आंदोलन सरकार को ज्यादा फिक्रमंद कर रहे हैं। वायरल हो रहे हैं और काफी हद तक कामयाब भी हो रहे हैं। दिल्ली में हुए जेन जी आंदोलन के बाद से ये एक नया सिलसिला चल पड़ा है।



आंदोलन की शुरुआत का केंद्र बनी CJP

जेन जी के आंदोलन के बारे में जितना भी पढ़ा सुना जाए वो कम है। कॉकरोच जनता पार्टी इस आंदोलन की शुरुआत का केंद्र जरूर बनी, लेकिन उसके बाद ये प्रोटेस्ट जेन जी के आंदोलन के नाम से ज्यादा फेमस हुआ। जिस सरकार के आगे विपक्ष की दाल नहीं गली।



किसानों का आंदोलन दिनों दिन चलता रहा, लेकिन सरकार ने रहम नहीं किया। वहीं सरकार जेन जी के आगे झुकने पर मजबूर हो गई। इस आंदोलन ने हर पॉलिटिकल पार्टी के सोचने का तरीका बदल दिया।



जेन जी ने बदला विरोध का पूरा अंदाज

अब तक बीजेपी सनातन और संस्कृति का झंडा बुलंद करती रही। अपनी संस्कृति और भाषा की पैरौकार बनती रही, लेकिन जेन जी के आंदोलन में जब युवा एकजुट हुए तब न तो सनातन की बात हुई न मजहब पर विवाद हुआ और न ही किसी अनुशासन के मिटने या संस्कृति के खत्म होने का खतरा सामने आया। सबने अपने-अपने तरीके से इस आंदोलन का एनलाइज किया।



जेन जी किस प्रदेश के थे। किस मजहब के थे। कैसे एक साथ एकजुट हुए। ये कोई नहीं समझ पाया। समझ आया तो बस ये कि उनके नारों से पार पाना मुश्किल है। ये वो भीड़ थी जिसे मिसगाइडेड या बाहरी ताकत या टूलकिट के किसी डर से रोका नहीं जा सका।



न ये भीड़ जंतर मंतर पर थमी न सोशल मीडिया पर। बर्गर खाकर प्रोटेस्ट करने वाली इस भीड़ ने आंदोलन को नई पहचान दी तो इनके नारों ने पुराने नारों की बोरियत खत्म कर दी। आपने भी ऐसे बहुत से प्लकार्ड हवा में लहराते हुए देखे होंगे जिनकी पंच लाइन्स ने आपका भी ध्यान खींचा ही होगी।



ताकत समझने में जुट गई सियासत

ये सब आपको सुना सुनाया लग सकता है क्योंकि जेन जी के आंदोलन के बारे में ये सब बहुत कहा सुना गया। हम सिर्फ रिमाइंड इसलिए करवा रहे हैं कि इस आंदोलन की झलक अब पंद्रह अगस्त को भी नजर आ सकती है।



आपको ध्यान ही होगा कि पीएम मोदी ने सारे नेताओं के निर्देश दिए हैं कि वो इंस्टाग्राम पर ज्यादा एक्टिव नजर आए। क्यों… क्योंकि जबरदस्त नेटवर्क और मजबूत प्रचार तंत्र वाली बीजेपी भी जेन जी की रील्स के आगे मात खा गई। इसके बाद समझ आ गया कि धर्म और मजहब की बात अपनी जगह है।



विकास और निर्माण की योजनाएं अपनी जगह है, लेकिन जेन जी का दिल जीतना जरूरी है। ये वही जेन जी है जिसे किसी दौर में छात्र शक्ति कहा जाता था। डिजिटल युग में इन्हें जेन जी और जेन अल्फा की पहचान मिल रही है और इतिहास गवाह है कि जब-जब छात्र शक्ति एकजुट होकर आवाज उठाती है सरकार झुक जाती हैं।



BJP ने भी बदला जेन जी वाला अंदाज

बीजेपी भी झुकी है। न सिर्फ झुकी है बल्कि बदल भी रही है। सनातन संस्कृति की हिमायत करने वाली पार्टी अब जेन जी के तौर तरीके समझ कर ढलने की कोशिश कर रही है। हाल ही में मप्र की विधानसभा में भी यूथ पार्लियामेंट हुई।



युवा शक्ति को खुद से जोड़ने की ऐसी पहल हो रही है और आगे भी नजर आएंगी और इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि लाल किले की प्राचीर से कल जब पीएम मोदी भाषण देंगे तो उसका अहम हिस्सा जेन जी के लिए डेडिकेट होगा। प्रदेश के नेता भी जेन जी और जेन अल्फा को ध्यान में रखकर ही अपना भाषण बुने तो कोई हैरानी नहीं होगी।



नए दौर की कहानी लिख रहे जेन जी

वो लाइनें आपको याद ही होंगी… छोड़ो कल की बातें… कल की बात पुरानी… नए दौर में लिखेंगे… मिलकर नई कहानी… ये वही नया दौर है। जिसकी कहानी के अहम और मूल पात्र जेन जी और जेन अल्फा है। जो हैं तो हिंदुस्तानी, लेकिन जरा नए मिजाज और नए अंदाज के जिनके लिए बदलना जरूरी है। बदलाव कितना रंग लाएगा ये भी डिजिटल मीडिया की वायरल पोस्ट से पता चल ही जाएगा। News Strike | न्यूज स्ट्राइक



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