NEWS STRIKE : दतिया की हार ने हिलाया BJP संगठन ! भितरघात ने डुबोई लुटिया ?
Harish Divekar | Aug 06, 2026, 07:00 IST
News strike05-08-2026
दतिया हार के बाद BJP की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। यशोधरा राजे सिंधिया की पोस्ट के बाद चर्चा तेज है कि क्या छोटे नेताओं पर कार्रवाई से जिम्मेदारी तय होगी या बड़े नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे।
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बीते कुछ सालों से बीजेपी ने कुछ ऐसा ऑरा बनाया है कि चुनाव में उससे कोई गलती हो ही नहीं सकती। माइक्रो लेवल की नेटवर्किंग, मतदाताओं का मन भांपना, सोशल इंजीनियरिंग, जातिगत समीकरण संभालना। सब कुछ करके बीजेपी चुनाव जीत जाती है। लेकिन दतिया के चुनाव में बीजेपी की इस बनी बनाई इमेज को मिट्टी में मिला दिया। पार्टी ने आनन फानन में एक्शन ले लिया। पहले तो खुद बीजेपी अपनों के ही निशाने पर आई। फिर अपनों से पीछे छुड़ाया।
पर क्या हम ये मान लें कि हार की जिम्मेदारी लेने की जगह बीजेपी के जिम्मेदार नेता, छोटे मोटे नेताओं को निपटा कर पल्ला झाड़ लेना चाहती है। सवाल ये भी है कि क्या अगला नंबर नरोत्तम मिश्रा का भी होगा।
नमस्कार..
हम अपने पिछले एपिसोड में दतिया की हार पर विस्तार से बात कर चुके हैं। उसे देखकर आप दतिया हार के कारण जान सकते हैं। हम आज उस हार से आगे की बात करते हैं।
NEWS STRIKE : दतिया की हार ने हिलाया BJP संगठन ! भितरघात ने डुबोई लुटिया ?
दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी भंग
पहले बात करते हैं कि बीजेपी को ये एक्शन लेने की जरूरत ही क्यों पड़ी। दतिया उपचुनाव की पूरी कहानी शुरू होती है 11 जुलाई 2026 से। बीजेपी ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। ये फैसला आते ही दतिया में बवाल मच गया। नरोत्तम समर्थक सड़क पर उतर आए। नेशनल हाईवे-44 पर घंटों चक्का जाम रहा। कई पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे दे दिए। हालांकि पार्टी ने इस्तीफे स्वीकार नहीं किए, लेकिन नाराजगी खत्म नहीं हुई। यहीं से चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या नाराज कार्यकर्ता चुनाव में पूरी ताकत से काम करेंगे या नहीं। लेकिन बीजेपी ने इसे नजरअंदाज किया।
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पत्र वायरल होने से आखिर फायदा किसे
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि मतदान के दिन ऐसा पत्र वायरल होने से आखिर फायदा किसे मिला और नुकसान किसका हुआ? और ये पत्र वायरल किसने करवाया। क्या बीजेपी के ही किसी नेता ने भीतराघात की कोशिश की। अगर जवाब हां है तो क्या इसलिए बीजेपी ने सबसे पहले दतिया की कार्यकारिणी भंग की है।
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एक ही झटके में 1000 से ज्यादा पदाधिकारी पदमुक्त
एक ही झटके में 1000 से ज्यादा पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया गया। पार्टी ने ये संकेत देने की कोशिश की है कि दतिया की हार को हल्के में नहीं लिया गया. लेकिन क्या इतना ही काफी है। क्या सिर्फ आलाकमान को दिखाने के लिए छोटे छोटे नेताओं को निपटा दिया गया है, या फिर अगली बारी नरोत्तम मिश्रा की होगी। ये सवाल मेरा नहीं है।राजनीतिक गलियारों में ऐसे सवाल उठ रहे हैं।
नरोत्तम समर्थकों पर भीतरघात के आरोप!
हालांकि इस पर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सवाल ये भी है कि अगर संगठन को पहले से नाराजगी की जानकारी थी, तो चुनाव प्रभारी और बाकी जिम्मेदार नेताओं ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या पूरी हार का ठीकरा सिर्फ नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर फोड़ा जाएगा? या फिर चुनाव की जिम्मेदारी संभालने वाले बड़े नेताओं से भी जवाब मांगा जाएगा?
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अब सबकी नजर आप संगठन की रिपोर्ट पर
अब देखना दिलचस्प होगा कि रिपोर्ट में सिर्फ स्थानीय नेताओं की जिम्मेदारी तय होती है या फिर दतिया की हार मध्य प्रदेश बीजेपी के बड़े चेहरों की राजनीति पर भी असर डालती है। क्योंकि दतिया अब सिर्फ एक उपचुनाव नहीं रहा...
ये बीजेपी के भीतर ताकत, संगठन और नेतृत्व की असली परीक्षा बन चुका है। शुरुआत में मैंने कहा था कि बीजेपी को यशोधरा राजे सिंधिया की पोस्ट पर गौर करना चाहिए। दतिया हार के बाद पूर्व मंत्री यशोधरा ने पोस्ट किया कि आत्ममंथन का समय है। ये पोस्ट काफी कुछ कहती है। वाकई बीजेपी के लिए आत्ममंथन का समय है। कब तक किसी और की सीट छीन कर या किसी और दल के नेता को पार्टी में शामिल करके बीजेपी अपनी जीत का डंका बजा सकेगी, या कब तक योजनाओं के भरोसे मतदाताओं को जीता जाएगा।
दतिया और बिहार के बांकीपुर चुनाव की हार ने ये साफ कर दिया है कि सिर्फ डबल इंजन की सरकार, फायदेमंद स्कीम्स और नेताओं की जोड़तोड़ से अब काम नहीं चलेगा। अब बीजेपी को अपना पेटर्न बदलने की जरूरत है ताकि दतिया और बांकीपुर फिर से रिपीट न हों।
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