News Strike: भोपाल में 5 दिन का अनशन, फिर भी सुर्खियां में नहीं, कौन हैं नरेंद्र राजपूत?
आंदोलन…. आंदोलन…. आंदोलन… पहले दिल्ली, फिर झारखंड, पटना और भोपाल में भी आंदोलन… अनशन… क्या कहा… भोपाल के आंदोलन और अनशन के बारे में आपने कुछ सुना ही नहीं…
क्या आप जानते हैं कि एक शख्स पिछले पांच दिन से भोपाल में भी भूखा प्यासा बैठा रहा. वो कौन है। उसकी मांगे क्या थीं। फिलहाल वो किस हाल में हैं। क्या आप जानते हैं… अगर नहीं तो आज का हमारा सेगमेंट बहुत गौर से पूरा देखिए।
क्योंकि पांच दिन निर्जला बैठे रहने वाले उस शख्स की मांग प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए थी। जिसे मीडिया में वो जगह नहीं मिली जो नेशनल मीडिया में न सही कम से कम लोकल मीडिया में तो मिलनी ही चाहिए। इसलिए हम आपके पास उसकी पूरी कहानी लेकर आए हैं।
5 दिन भूखे रहे, फिर भी अनसुने रहे
स्क्रीन पर दिख रहे इस चेहरे को गौर से देखिए। भोपाल के एक कोने में ये शख्स पिछले पांच दिन से भूखा प्यासा बैठा रहा। पिछले दिनों आपने आमरण अनशन की बहुत सी तस्वीरें भी देखी होंगी।
कहीं सोनम वांगचुक जैसे दिग्गज भूख हड़ताल पर बैठे थे तो कहीं देवेंद्रनाथ महतो अनशन पर बैठे। उन सब के बीच नरेंद्र राजपूत की चर्चा कहीं नहीं हुई।
जी हां ये शख्स नरेंद्र राजपूत ही हैं। जो भोपाल के नीलम पार्क में पिछले पांच दिन से अनशन पर हैं। लेकिन इनके अनशन में नारों की आवाज गूंजी, न लाठी चार्ज हुआ और न वॉटर कैनन चलाने की नौबत आई।
शायद इसलिए नरेंद्र राजपूत उन सुर्खियों में नहीं रह पाए जिसमें रहने के वो भी उतने ही हकदार हैं जितने की सोनम वांगचुक और झारखंड में अनशन करने वाले देवेंद्रनाथ महतो।
लाखों युवाओं के हक की उठी आवाज
जंतर मंतर पर हुआ आंदोलन पूरे देश के युवाओं से जुड़ा। झारखंड में भी जैन जी के आंदोलन के नाम पर जमकर बवाल कटा। अब पटना भी ऐसे मामलों को लेकर सुर्खियों में है, लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि नरेंद्र राजपूत की मांग कुछ छोटी है।
वो प्रदेश के लाखों युवाओं के हक की आवाज उठा रहे हैं। उनका मुद्दा ऐसे तमाम युवाओं से जुड़ा है जिन्हें ये पता कि सरकारी नौकरी के कई पद खाली हैं। कई पदों के लिए वो इलिजिबल भी हैं, लेकिन ये नहीं पता है कि उन पदों पर भर्ती कब निकलेगी।
ऐसे पदों पर भर्ती के लिए सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो खाली पदों पर भर्ती हो सके। इसी उम्मीद के साथ नरेंद्र राजपूत ने पांच दिन बिना खाए पिए गुजार दिए।
शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग
नरेंद्र राजपूत और उनकी तरह कई और अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती वर्ग 1, 2 और 3 में पद बढ़ाने की मांग लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसके साथ ही चंद और मांगे और दावे भी शामिल हैं।
आंदोलनकारियों के मुताबिक सरकारी स्कूलों में करीब एक लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, लेकिन हर बार विज्ञपान कम पदों पर भर्ती का निकलता है। जिसकी वजह से बीएड और डीएड जैसी परीक्षा पास कर चुके योग्य युवा भी बेरोजगार घूम रहे हैं।
इससे भी ज्यादा फिक्र इस बात की है कि जब तक पद निकलते हैं और भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है। तब तक कई युवाओं की उम्र क्राइटेरिया से बाहर निकल जाती है।
जहां तक पद बढ़ाने की मांग है आंदोलनकारी शिक्षक वर्ग 2 के लिए हर विषय में तीन हजार पद और वर्ग तीन में पच्चीस हजार पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
बिगड़ी तबीयत, फिर मचा हड़कंप
सरकार तक इन आंदोलनकारियों की आवाज पहुंची या नहीं। ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत की हालत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई। असल हल्ला भी उसी के बाद हुआ जब उन्हें उठाकर अस्पताल ले जाने की कोशिशें शुरु हुईं।
नरेंद्र राजपूत पिछले पांच दिन से अनशन पर थे हम ये आपको बता ही चुके हैं। उनकी हालत खराब हुई तो प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाने के लिए पुहंचे, लेकिन राजपूत इतनी आसानी से नहीं माने।
वो अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक सरकार के मंत्री या जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर बात नहीं करते वो अनशन पर डटे रहेंगे।
पुलिस पहुंची, अस्पताल ले गए राजपूत
उनकी जिद के बाद नीलम पार्क में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात हुआ और राजपूत को जबरदस्ती अस्पताल ले गए। आंदोलन में शामिल दूसरे अभ्यार्थी इस बात का विरोध करते रहे, लेकिन पुलिस बल अपना काम करके ही मानी।
इस दौरान आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने थोड़ी राजनीति भी चमकाई। उतनी तो नहीं जितनी राष्ट्रीय स्तर पर चमकाने की कोशिश हुई, लेकिन हां जीतू पटवारी ने वीडियो कॉल के जरिए आंदोलन पर बैठे युवाओं से संपर्क किया और मांगों को समर्थन भी किया।
खबर ये भी है कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा ने भी नरेंद्र राजपूत से मुलाकात की और उन्होंने ही राजपूत का अनशन खत्म कराने की अपील की। जिसके बाद प्रशासन ने उनकी सुध ली और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की कवायद शुरू की।
क्या नीलम पार्क की आवाज सुनी जाएगी?
इससे ये तो साफ है कि जंतर मंतर पर हुए प्रोटेस्ट ने युवाओं को अपनी मांग उठाने का एक रास्तो तो बता ही दिया है। ये बात अलग है कि कुछ अनशनकारी सुर्खियों में आ रहे हैं और कुछ राजपूत की तरह सुर्खियों से गायब ही रह जाते हैं।
पर ये तय है कि युवाओं की नाराजगी अब नजर आने लगी है। देखना ये है कि जंतर मंतर की तरह क्या भोपाल के नीलम पार्क के आंदोलनकारियों की मांगों पर भी कोई कार्रवाई होगी या चंद रोज बाद उन्हें भुला दिया जाएगा। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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