News Strike: शिवराज का दर्द PMO तक पहुंचा! MP BJP में अंदरखाने क्या चल रहा है?
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से।
ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो।।
क्या हैरानी हो रही है। हर बार आपसे पॉलिटिकल बात करने वाला हम क्यों शेर शायरी के चक्कर में फंस गए। यही सोच रहे हैं न आप। तो भैया बात ही कुछ ऐसी है। खासतौर से शिवराज सिंह चौहान के लिए। जो 18 साल तक प्रदेश के मुखिया रहे और अब इसी प्रदेश में बेरूखी का शिकार हैं।
क्या कहा… आपको यकीन नहीं हो रहा… पर सच्ची… ऐसा ही हो रहा है। ये हम नहीं कह रहे। खुद शिवराज सिंह चौहान शिकायत की है। मामला पीएम मोदी तक जा पहुंचा है।
पीएमओ ने भी इसके बाद एक्शन लिया और प्रदेश बीजेपी में सियासी भूचाल आया। जिसके बाद खुद सीएम मोहन यादव ने सफाई दी और शिवराज से मुलाकात भी की।
मंच पर मेल, अंदरखाने क्यों बढ़ा फासला?
अभी-अभी मैंने बशीर बद्र साहब का एक शेर पड़ा। आप अब तक ये सोच रहे होंगे कि जो खबर हम आपको बता रहे हैं और उस शेर का आपस में ताल्लुक क्या है। असल में बीजेपी के लिए इस शेर के मायने कुछ बदल से जाते हैं।
बीजेपी नेताओं की एक खास अदा है वो जब आमने सामने होते हैं यूं तपाक से मिलते हैं जैसे कोई गिला शिकवा है ही नहीं और यूं अहसास करवाते हैं कि बीजेपी में सब कुछ फील गुड टाइप है।
मंच पर जब दो बड़े नेता आपस में मिलते हैं या मेल मुलाकात की फोटोज शेयर करते हैं तब सब कुछ चंगा सी वाला फील देते हैं, लेकिन अंदरखानों में क्या चल रहा है वो इससे एकदम अलग होता है। जो जाहिर हुआ है शिवराज सिंह चौहान के एक खत से।
शिवराज सिंह चौहान को ये लगने लगा है कि ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो। और यही फासला उन्हें ज्यादा रास नहीं आ रहा है।
खासतौर से मप्र के मामले में। रास आना भी नहीं चाहिए वो 18 साल सीएम की गद्दी पर रहे। उनकी प्रदेश में अनदेखी हो रही है। जिस प्रदेश में उन्होंने किसान पुत्र होने की पहचान बनाने में जी जान एक कर दी। उसी प्रदेश में कृषि वर्ष मनाया जा रहा है और उन्हें भुला दिया गया है।
शिवराज के खत में छलका एमपी का दर्द
नहीं… नहीं… ये हमारा कहना नहीं है। ये शिकायत खुद शिवराज सिंह चौहान ने की है। शिवराज सिंह चौहान का ये दर्द एक लेटर के जरिए छलका। जो उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम लिखा। जिसमें 21 अलग-अलग बिंदुओं पर उन्होंने आपत्ति जाहिर की है।
इन 21 बिंदुओं के पत्र में एक शिकायत एमपी में बेरूखी पर है। एक शिकायत इसी बात पर है कि कृषि वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन उन्हें कार्यक्रम में बुलाया नहीं जा रहा। उनकी शिकायत में ये भी कहा गया है कि कुछ कार्यक्रमों के दौरान वो खुद प्रदेश में मौजूद थे। उसके बाद भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि उनका प्रदेश से गहरा नाता रहा है। वो मौजूदा सांसद भी हैं और देश के कृषि मंत्री भी हैं।
सीट पर काम अटके, घोषणाएं भी अधूरी
एक शिकायत उनके संसदीय क्षेत्र की सड़क निर्माण से जुड़े काम को लेकर है। शिवराज ने मुख्यमंत्री रहते हुए 200 करोड़ की सड़कें मंजूर कराई थी। इन सड़कों के लिए जितने के टेंडर मंजूर हुए थे उसमें से तकरीबन 45 करोड़ बच गये थे, शिवराज जी बची हुई राशि से अपने क्षेत्र की दूसरी सड़कें बनवाना चाहते है, लेकिन अफसर उनकी इस मांग की फाइल को घुमा रहे हैं।
इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान की कॉन्सटिट्यूएंसी में पीपीपी मॉडल से मेडिकल कॉलेज बना है। उनकी शिकायत है की अभी तक मेडिकल कॉलेज के लिए स्टाफ नहीं दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए जो घोषणाए की थीं उनमें से बुदनी की तकरीबन 25 घोषणाओं पर आज तक अमल नहीं किया गया।
शिवराज की नाराजगी से भोपाल में हलचल
मूंग खरीदी के मामले पर हुए किसानों के आंदोलन पर भी शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि शिवराज ने केंद्र का रुख पहले ही साफ कर दिया था। उसके बावजूद प्रदेश के कृषि मंत्री ने उन्हें पत्र लिखा। इन सब मामलों को पीएमओ ने गंभीरता से लिया।
एक बात और बता दें। शिवराज सिंह चौहान पार्टी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो कभी आलाकमान या शीर्ष नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नहीं जाते न ही नाराजगी जताते हैं।
वो अपनी बात पूरे सलीके और अनुशासन के साथ पार्टी फोरम के सामने ही रखते हैं। इसलिए उनके जैसे नेता की नाराजगी या शिकायत बहुत मायने रखती है और शायद इसलिए ही पीएमओ ने शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी को काफी गंभीरता से लिया और मध्यप्रदेश सरकार से सफाई भी मांग ली।
अंदरखाने की एक खबर ये भी है कि पीएमओ के सवाल के पर मप्र के सरकारी हलकों में जमकर हलचल मची है।
पूर्व सीएम से मिलने बंगले पहुंचे मोहन यादव
पीएमओ से पत्र आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने अफसरों से बिंदुवार जवाब बनाने को कहा। इसके बाद छुट्टी वाले दिन कृषि, स्वास्थ्य और पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभाग के अफसरों ने जवाब बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा।
मप्र सरकार ने अपनी सफाई में बताया है कि कृषि वर्ष के तहत अब तक पांच कार्यक्रम हुए हैं। जिसमें से तीन में खुद सीएम और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंच साझा किया।
एक कार्यक्रम ऐसा भी था जिसमें शिवराज सिंह चौहान खुद नहीं आ सके थे। तब उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भेजा था। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार देर शाम को शिवराज सिंह से मिलने उनके बंगले पहुंचे। यकीनन दोनों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई ही होगी।
बताया जा रहा है कि सीएम ने शिवराज को ये जानकारी भी दी कि अगली कैबीनेट यानी कल मंगलवार को विदिशा में सड़क निर्माण के टेंडर का प्रस्ताव आने वाला है।
बीजेपी में बढ़ रहा वरिष्ठों का असंतोष?
कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल के बाद शिवराज सिंह चौहान तीसरे ऐसे नेता हैं जो प्रदेश सरकार के साथ तालमेल न होने की शिकायत कर रहे हैं।
इन तीनों का ही कद प्रदेश और केंद्र दोनों ही जगहा काफी दमदार है। इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है। क्या वरिष्ठ नेताओं और मौजूदा सरकार के बीच सियासी तनाव गहराता जा रहा है।
क्या इसका कनेक्शन सीएम मोहन यादव और पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की दिल्ली यात्रा से भी है। जिसे दतिया उपचुनाव की हार से जोड़ा गया था। अपनी दिल्ली यात्रा में सीएम मोहन यादव ने संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएर पाटिल से भी मिले। इसके अगले दिन खजुराहो सांसद और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने पीएम मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के मायने क्या थे। क्या वीडी शर्मा से पीएम मोदी ने प्रदेश के हालचाल जाने होंगे।
शिवराज की पीएम से मुलाकात, क्या संकेत?
अटकलें ये भी तेज हैं कि शिवराज सिंह चौहान से भी पीएम मोदी ने करीब 45 मिनट तक बात की और प्रदेश हाल को गहराई से समझा। ये मुलाकातें और ये शिकायतें किस और इशारा करती हैं।
सीनियर नेताओं की शिकायतें क्या प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं या आलाकमान सामंजस्य बनाने में कामयाब होंगे। आने वाले कुछ दिनों में बीजेपी की हलचल से साफ होगा कि आलाकमान का प्रदेश के लिए रुख क्या है। News Strike | न्यूज स्ट्राइक
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