मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना से पशुपालकों को मिला आर्थिक सुरक्षा कवच, अब तक 44 लाख पशुओं का रजिस्ट्रेशन
अक्सर प्राकृतिक आपदाओं, अचानक फैलने वाली गंभीर बीमारियों या अन्य कारणों से पशुओं की अकाल मृत्यु हो जाने पर पशुपालकों की आजीविका और आर्थिक स्थिति चरमरा जाती है। ऐसे बड़े वित्तीय नुकसान और संकट की स्थिति से बचाने के लिए यह योजना पशुपालकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम कर रही है।
शानदार आंकड़े और प्रगति
योजना के शुरुआती क्रियान्वयन के दौरान ही पशुपालकों में भारी उत्साह देखने को मिला है:
- पंजीकरण: अब तक 18 लाख से अधिक पशुपालकों द्वारा अपने 44 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण कराया जा चुका है।
- स्वास्थ्य प्रमाण पत्र: इनमें से 30 लाख से अधिक पशुओं को आधिकारिक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
- बीमा पॉलिसी: पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया के तहत 27.56 लाख पशुओं के लिए बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी है।
पशुपालन विभाग की अपील
पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry) के निदेशक डॉ. सुरेश मीना ने प्रदेश के समस्त पशुपालकों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा संस्थान में संपर्क कर अपने पशुओं का बीमा समय पर जरूर करवाएं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के बारे में
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना (Mukhyamantri Mangla Pashu Bima Yojana)राजस्थान सरकार की एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के पशुपालकों को उनके अमूल्य पशुधन के नुकसान की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा और आर्थिक संबल प्रदान करना है।
इस योजना से जुड़ी मुख्य बातें और विवरण निम्नलिखित हैं:
1. योजना का मुख्य उद्देश्य और दायरा
- उद्देश्य: पारंपरिक या अन्य कारणों से पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर पशुपालक परिवारों को होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
- 5 लाख दुधारू गायें
- 5 लाख दुधारू भैंसें
- 5 लाख भेड़ (मादा)
- 5 लाख बकरी (मादा)
- 1 लाख उष्ट्र वंशीय पशु (ऊंट - नर एवं मादा)
- कुल मिलाकर इन पशुओं का बीमा कवर प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।
- कुल बजट: इस पूरी योजना के क्रियान्वयन पर 400 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।
2. योजना के प्रमुख लाभ
- राज्य के गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट पालने वाले परिवारों के पशुधन को रिस्क कवर मिलता है।
- पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर पशुपालक परिवारों को तुरंत आर्थिक संबल और सहायता मिलती है।
3. बीमा हेतु पशु की कीमत का निर्धारण (मानक)
योजना के तहत बीमा कवर और क्लेम राशि तय करने के लिए पशुओं के मूल्य का निर्धारण इस प्रकार किया गया है:
| क्र.सं. | पशु का प्रकार | मूल्य निर्धारण का मानक / अधिकतम सीमा |
| 1 | गाय (दुधारू) | 3 हजार रुपए प्रति लीटर प्रति दिन के आधार पर न्यूनतम कीमत तय होगी (अधिकतम सीमा: 40 हजार रुपए प्रति पशु) |
| 2 | भैंस (दुधारू) | 4 हजार रुपए प्रति लीटर प्रति दिन के आधार पर न्यूनतम कीमत तय होगी (अधिकतम सीमा: 40 हजार रुपए प्रति पशु) |
| 3 | बकरी (मादा) | अधिकतम राशि: 4 हजार रुपए प्रति पशु |
| 4 | भेड़ (मादा) | अधिकतम राशि: 4 हजार रुपए प्रति पशु |
| 5 | ऊंट (नर एवं मादा) | अधिकतम राशि: 40 हजार रुपए प्रति पशु |