एक कमरे में रहकर भी दूर हो रहे पति-पत्नी, युवाओं में तेजी से बढ़ रहे तलाक के मामले

thesootr Desk | Apr 08, 2026, 15:36 IST
divorce reasons
ग्वालियर कुटुंब न्यायालय में वैवाहिक विवाद तेजी से बढ़े हैं। 2026 के पहले तीन महीनों में 738 जोड़े अदालत पहुंचे। 45% मामलों की जड़ समय की कमी है। मोबाइल और परिवार का दखल भी बड़ा कारण। कुल 12 हजार केस लंबित हैं।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला



  • ग्वालियर कुटुंब न्यायालय में वैवाहिक विवाद बढ़े।
  • 2026 के पहले तीन महीने में 738 जोड़े अदालत पहुंचे।
  • 45% मामलों में समय की कमी मुख्य वजह।
  • मोबाइल और परिवार का दखल भी कलह बढ़ा रहा।
  • 31 मार्च तक 12 हजार केस लंबित पड़े हैं।

रिश्ते क्यों टूट रहे

पहले छोटे झगड़े घर में सुलझ जाते थे, वहीं अब वे अदालत तक पहुंच रहे हैं। आधुनिक जिंदगी की भागदौड़ ने परिवारों से समय चुरा लिया है। ग्वालियर फैमिली कोर्ट के नए आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं।



रिश्तों की डोर कमजोर पड़ गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि 45 फीसदी विवाद समय अभाव से होते हैं। लोग नेटवर्क से जुड़े हैं लेकिन बातचीत शून्य हो गई है। यह ट्रेंड डराने वाला है।



आंकड़ों में दिखा बिखराव

  • 2014 तक मामले गिनती के थे। एक ही जज सुनवाई करता था।
  • 2016 में संख्या 45 हो गई। उसके बाद अदालतों में केसेज की बाढ़ आ गई।
  • 2019 में 595 केस आए। 2021 में ये आंकड़ें 1212 पहुंचे।
  • 2023 में टोटल 2446 मामले हो गए। वहीं 2025 में इनकी संख्या 2700 हुई।
  • 2026 के मार्च तक 738 नए केस के साथ अब कोर्ट में 31 मार्च 2026 तक 12 हजार प्रकरण लंबित हैं।
  • इस रफ्तार से साल 2027 तक नया रिकॉर्ड बन सकता है।

ये वृद्धि दर चौंकाने वाली है। इसमें सबसे ज्यादा अर्जियां युवा जोड़ो द्वारा दी गई हैं।



समय अभाव सबसे बड़ा विलेन

पति-पत्नी एक कमरे में रहकर भी दूर हैं। उन्हें मोबाइल नोटिफिकेशन्स ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं। यहां बातचीत का गैप संदेह पैदा करता है जो आगे चलकर कोर्ट तक ले जाता है।



काउंसलिंग में सामने आया कि सोशल मीडिया अविश्वास की दीवार खड़ी कर रहा हैं। पति पत्नी के पास एक-दूसरे की सुनने की फुरसत नहीं है। महत्वाकांक्षाएं बढ़ने से समय घट गया जिसका असर रिश्तों पर पड़ा।



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हरीश दीवान, कुटुंब न्यायालय काउंसलर कहते हैं, पति-पत्नी एक-दूसरे को समय नहीं दे रहे। उनकी सुनने की क्षमता भी खत्म हो चुकी है, इसलिए अविश्वास और अहंकार 45 फीसदी विवादों की जड़ बन रहा हैं।



परिवार का दखल बढ़ा रहा कलह

  • 20 फीसदी मामलों में लड़की के मायके का हस्तक्षेप रहता हैं। लड़कियां सुबह ससुराल की रिपोर्ट लेकर मां को कॉल करती है। फिर वहां से सलाह आती तो घर में झगड़े होते है। यहीं छोटी बातें अंत में बड़ा रूप ले लेतीं हैं।
  • वहीं ससुराल में सास-ससुर की उपेक्षा भी बड़ी समस्या है। इसी कारण परिवार से अलग रहने की जिद की जाती हैं।
  • कई मामलों में पति पत्नी का अहंकार टकराता है। दोनों के ईगो क्लैश रिश्ता को टूटने की कदार पर ला देते है।
  • काउंसलर बताते हैं कि हस्तक्षेप विवाद दोगुना करते हैं। कई बार मायके की सलाह घर तोड़ने का काम करती है। उनके मुताबिक ससुराल वालों की बात सुनने से घर में शांति बनी रहेगी।

युवाओं में धैर्य की कमी

22 से 35 साल के लोग सबसे ज्यादा केस ला रहे हैं। युवाओं में धैर्य खत्म हो चुका है और "मैं-मेरा" का भाव बढ़ गया है। प्रेम विवाह वाले युवा भी अब समस्या से नहीं बच पा रहे। वहीं घरवालों के दबाव में जो शादियां हुईं, वो हफ्तों में टूट रही हैं।



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यहां ईगो (अहंकार) वैवाहिक संबधों कासबसे बड़ा दुश्मन बन गया है। छोटी-सी बात पर रिश्ते टूट रहे हैं। युवा पीढ़ी जल्दबाजी कर रही है और इससे रिश्ते कमजोर हो गए हैं। इसलिए युवाओं में समझदारी और संयम की जरूरत बढ़ गई है।



आंकड़े साफ कहते हैं कि ये समस्या गंभीर है। इसे समय रहते सुधारने की जरूरत है।



भरण-पोषण और तलाक के केस बढ़े

साल नए केस
2019 595
20211212
2023 2446
20252700
2026 (मार्च तक)738

ये आंकड़े अदालतों पर बोझ बढ़ा रहे हैं। समाज में रिश्तों को बचाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।



डिजिटल दुनिया ने तोड़ा भरोसा

मोबाइल और सोशल मीडिया ने आज कल के रिश्तों को खोखला कर दिया है। एक साथ रहते हुए भी लोग सिर्फ mobile phone में घुसे रहते हैं। काउंसलिंग में 30% शिकायतें इसी की होती हैं। युवाओं को फोन का इस्तेमाल कम करने और आमने-सामने बात करने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञ कहते हैं, "समय निकालो, बातचीत बढ़ाओ, तभी रिश्ते मजबूत होंगे।"



सास-ससुर और मायके का बैलेंस

सास-ससुर को नजरअंदाज न करें। मायके के लिए रिपोर्टिंग करना बंद करें। छोटे निर्णय घर में सुलझाने से परिवार का बैलेंस बनाने में आसानी होगी। मायके और ससुराल के संतुलन से ही शांति बनी रहेगी।



Communication and Conflict in Marriage - Focus on the Family


युवा जोड़ों को सलाह

हरीश दीवान, काउंसलर कुटुंब न्यायालय के अनुसार, पति-पत्नी एक-दूसरे को समय नहीं दे रहे हैं, न ही उनमें एक-दूसरे को सुनने की क्षमता है। अविश्वास और अहंकार विवादों की जड़ बन जाते है। इसलिए रिश्तों को बचाने के लिए संवाद और समय बहुत जरूरी है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

ग्वालियर में वैवाहिक विवाद 45 फीसदी बढ़ चुके हैं। समय की कमी ही तलाक की मुख्य वजह बन रही है। अब तक सिर्फ ग्वालियर के कोर्ट में ही12 हजार केस लंबित चल रहे हैं। यह दर्शाता है कि समय की कमी भारतीय परिवार व्यवस्था को चुनौती दे रही है। संवाद बढ़ाकर रिश्ते बचाए जा सकते हैं। हमारे कानून को भरण-पोषण (मेंटेनेंस) और तलाक (तलाक कानून)पर सख्ती दिखाने की जरूरत है। वहीं सामाजिक नैतिकता के पैमाने पर भी संवाद जरूरी है। हमारे संविधान का अनुच्छेद 21 यानी जीवन का अधिकार परिवार को मजबूत बनाने पर जोर देता है। रिपोर्ट्स में दिखायें गए आकंड़े एक चेतावनी का काम करते हैं। अगर युवा इसे गंभीरता से लेकर संवाद और रिश्तों पर ध्यान देते हैं तो यह हमारे समाज के लिए कल्यानकारी होगा।



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