लिव-इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का फैसला, रिश्ते में बालिगों की मर्जी काफी, परिवार का दखल गलत
Manya Jain | Mar 23, 2026, 15:20 IST
allahabad high court verdict marriage live in relationship
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दो बालिगों का साथ रहना उनका निजी फैसला है। समाज या परिवार दखल नहीं दे सकते। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि यह आजादी कानून के दायरे में रहकर ही मिलेगी।
NEWS IN SHORT
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा फैसला सुनाया है।
- शादी या साथ रहने के लिए दो वयस्कों की आपसी पसंद ही सबसे अहम है।
- दो बालिग साथ रहना चाहें, तो परिवार या समाज को दखल देने का कोई अधिकार नहीं।
- बालिग जोड़ों को अपनी पसंद का पार्टनर चुनने और साथ रहने की पूरी स्वतंत्रता है।
- कोर्ट ने साफ किया कि यह निजी आजादी देश की कानूनी सीमाओं के भीतर ही रहेगी।
NEWS IN DETAIL
बालिग जोड़ों को अपनी पसंद से जीने की पूरी आजादी है। हालांकि, यह स्वतंत्रता पूरी तरह से असीमित और नियम मुक्त नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि यह आजादी कानूनी सीमाओं के भीतर ही रहेगी। समाज और परिवार के दखल पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
वयस्कों की सहमति ही सबसे बड़ा आधार
आज के समय में जब समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस बढ़ रही है, यह फैसला युवाओं के लिए काफी राहत भरा माना जा रहा है। इससे यह साफ है कि कानून व्यक्ति की पसंद का सम्मान करता है।
स्वतंत्रता है, लेकिन सीमाओं के साथ
कोर्ट के अनुसार:
- एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक सीमित है, जहां से दूसरे के कानूनी अधिकार शुरू होते हैं
- किसी की आजादी दूसरे के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती
शादीशुदा लोगों के लिए सख्त नियम
कोर्ट ने कहा:
- अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है
- और उसने अपने जीवनसाथी से कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया है
- किसी और से शादी नहीं कर सकता
- और न ही किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकता है
क्यों खारिज हुई याचिका?
लेकिन कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि:
- जब संबंध खुद कानून के अनुसार मान्य नहीं है
- तो ऐसे में सुरक्षा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता
फिर भी सुरक्षा का अधिकार बना रहेगा
ऐसी स्थिति में व्यक्ति:
- संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से संपर्क कर सकता है
- लिखित आवेदन देकर सुरक्षा की मांग कर सकता है
अनुच्छेद 226 की अहम रोल
- इन शक्तियों का उपयोग केवल कानूनी दायरे में रहकर ही किया जा सकता है।
- किसी अवैध कार्य को वैध बनाने के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
समाज और युवाओं पर प्रभाव
- युवाओं को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता को मजबूती मिलेगी।
- परिवार और समाज द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगेगी।
- साथ ही लोगों को यह समझ भी मिलेगी कि कानून के दायरे में रहकर ही फैसले लेने चाहिए।
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