सिंहासन छत्तीसी: कलेक्टर की महिला सरपंच से यारी, कृषि विभाग चला रहा व्यापारी
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के गलियारों में इन दिनों एक कलेक्टर साहब की बहुत चर्चा है। सुगबुगाहट है कि कुछ महीनों से उनकी एक सरपंच से बहुत पट रही है। अब धुंआ निकला है तो आग तो लगी ही होगी। खुसरफुसर इसलिए है क्योंकि सरपंच महिला है।
वहीं खबर है कि सरकार का कृषि विभाग एक कारोबारी चला रहा है। होटल में बैठकर सारे फैसले हो जाते हैं। बीजेपी की एक महिला नेत्री ने हिट एंड रन कर दिया। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशानिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
साहब का दिल तो पागल है:
एक फिल्मी गाना है कि दिल तो पागल है, दिल दीवाना है। वाकई दिल कब, किस पर आ जाए यह कहा नहीं जा सकता। एक कलेक्टर साहब महिला सरपंच को दिल दे बैठे हैं। अब कहाँ कलेक्टर का ओहदा और कहां सरपंच का पद। लेकिन दिल का मामला थोड़ा हट कर ही रहता है।
सरपंच की कलेक्टर कार्यालय में आवक जावक भी खूब बढ़ गई है। यही कारण है कि कार्यालय में पिछले कुछ महीनों से खुसफुसाहट शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि गांव में भी विकास की खूब योजनाएं पहुंच रही हैं। अब साहब मेहरबान है तो ये तो होना ही था। खैर ये उनका निजी मामला है हमने तो जिक्र इसलिए छेड़ा क्योंकि इस आग का धुंआ कुछ ज्यादा ही तेज़ी से फैल रहा है।
कारोबारी के हाथों में कृषि:
एक कारोबारी के हवाले प्रदेश की कृषि। सुनकर अजीब इसलिए लगता है क्योंकि यह कारोबारी खेती किसानी का नहीं बल्कि होटल का है। कृषि विभाग में इनका इतना दखल है कि लोग कहने लगे हैं विभाग वही चला रहे हैं।
फैसले होटल के कमरे में हो जाते हैं। किसानों की आय बढ़ाने की नीतियां भी वहीं बन जाती हैं। किसको कौन सा काम देना है यह भी यही कारोबारी तय करते हैं। जब कृषि जैसा अहम विभाग व्यापारी के हवाले हो तो किसानों का तो भगवान ही मालिक है।
बीजेपी नेत्री, हिट एंड रन:
सरकार लाख कहती है कि आपकी गाड़ी से यदि कोई घायल हो जाये तो उसे छोड़कर भागें नहीं बल्कि उसे अस्पताल तक पहुंचाएं। लेकिन बीजेपी के नेता ही यह नहीं मानते। बीजेपी की महिला नेत्री की गाड़ी ने एक गरीब बच्चे को टक्कर मार दी। यह उस वक्त हुआ जब नेत्री खुद गाड़ी में विराजमान थीं।
एक्सीडेंट होते ही घायल को वहीं छोड़ उनकी गाड़ी फर्राटा मारते हुए निकल गई। लोगों ने उस लड़के को अस्पताल तक पहुंचाया। यह नेत्री ही बच्चों को उनके अधिकार दिलाने की बात करती हैं। यह एक अहम संवैधानिक पद पर भी बैठी हैं। फिर ये कैसी संवेदनशीलता है मेडम ज़रा विचार कीजिये। मामला बीजेपी से जुड़ा है इसलिए पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही।
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