सिंहासन छत्तीसी : दस टका ब्याज पर पैसा चाहिए तो बीजेपी नेत्री के पास आइए और नेताजी की कांव कांव, भाजपाई एमएलए का कांग्रेस प्रेम
रायपुर : ये नेताजी आजकल बहुत कांव कांव कर रहे हैं। इतना ही नहीं ये रील भी बना रहे हैं। अब जब आदमी फुर्सत में रहेगा तो कुछ तो करेगा। नेताजी का भी कुछ यही हाल है। बीजेपी के एक एमएलए इन दिनों खूब चर्चा में हैं। लेकिन इस बार चर्चा उनके कांग्रेस प्रेम को लेकर है। कभी कांग्रेस नेताओं के साथ रैली में नजर आते हैं तो कभी बड़े नेताओं को हैप्पी बर्थडे करने लगते हैं। लोग सोच रहे हैं कि कहीं इनका भी मूड तो नहीं बदल रहा क्योंकि ये कुछ मूडी किस्म के हैं। छत्तीसगढ़ की ऐसी ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की अनसुनी खबरें जानने के लिए के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
बीजेपी नेत्री और ब्याज का धंधा
सियासत भी जो न कराए वो कम है। आखिर आज की सियासत इतनी महंगी हो गई है कि कमाई के लिए कुछ न कुछ जुगत तो लगानी ही पड़ती है। बीजेपी की एक महिला नेता ने कुछ इस तरह का रास्ता अपनाया है जो चर्चा में आ गया है। ये नेत्री ब्याज पर पैसा देती हैं। ब्याज का इस तरह का कारोबार तो बहुत लोग करते हैं लेकिन चर्चा तब होती है जब उसमें कुछ अलग बात होती है।
ये नेत्री से ब्याज पर पैसा लेना इतना आसान नहीं हैं क्योंकि इनका इंट्रेस्ट परसंटेज बहुत हाई है। ये 10 टका ब्याज पर कर्ज देती हैं। अब भला बताइए इतना महंगा कर्ज तो कोई रईस या बहुत जरुरतमंद ही ले सकता है। यह बात बाहर तब आई जब एक महिला ने इन नेत्री पर दस फीसदी ब्याज वसूलने और उसे प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। मामला इतना बढ़ा कि थाने तक पहुंच गया।
बवाल बढ़ा तो सियासत के कुछ लोगों ने सेटलमेंट करा दिया। सियासत में यह हुनर कुछ लोगों ने खूब साध रखा है। जनता के बीच सेवा का चेहरा और निजी व्यवहार में अलग ही हिसाब-किताब। ऊपर से संगठन का झंडा और पीछे से अपने-अपने धंधे। दिक्कत तब होती है, जब निजी कारोबार की खरोंच सीधे पार्टी के पोस्टर पर दिखाई देने लगे। और यहां एक बात संगठन के बड़े साहबों को भी समझनी चाहिए।
संरक्षण देना और संरक्षण का आरोप लगना दोनों में फर्क जरूर है, लेकिन दोनों की राजनीतिक कीमत होती है। किसी के निजी कारनामे पर समय रहते संगठन ने आंखें मूंद लीं तो बाद में वही मामला संगठन की आंख में किरकिरी बन जाता है। इन महिला नेता की हस्ती बड़ी है यह नाराज होकर कुछ बड़े चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
नेताजी की कांव कांव
इन दिनों श्राद्ध पक्ष चल रहा है तो आस पास कौवा की कांव कांव सुनाई दे जाती होगी। हां यह अलग बात है कि आजकल कौवे कम ही नजर आते हैं। लेकिन हम कौवों की बात नहीं कर रहे बल्कि एक नेताजी की बात कर रहे हैं जिनकी कांव कांव सुनाई दे रही है। नेताजी इतनी फुर्सत में हैं कि कांव कांव की रील भी बना रहे हैं। इस रील को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर रहे हैं।
लोग सोच रहे हैं कि आखिर अचानक इनको क्या हो गया है जो कांव कांव कर रहे हैं। लगता है आजकल ये राजनीतिक मायूसी के दौर में हैं। खुद की पार्टी रही नहीं और मूल पार्टी इनको स्वीकार नहीं कर रही। वैसे इन्होंने काला कोट पहन लिया है। लेकिन कभी सियासत के शिखर पर चढ़कर दुनिया को देखने वाले जमीन पर आने पर थोड़ी पीड़ा तो महसूस करते होंगे।
हो सकता है कि अपना दिल बहलाने के लिए कांव कांव का सहारा लिया हो। खैर दिल बहलाने के लिए गालिब यह खयाल भी अच्छा है। हो सकता है नेताजी का मकसद सिर्फ दिल बहलाना हो। आखिर राजनीति भी अजीब खेल है आज ताज, कल तन्हाई और परसों सोशल मीडिया की रील।
बीजेपी विधायक का कांग्रेस प्रेम
बीजेपी के एक विधायक इन दिनों बहुत चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इन दिनों बहुत सक्रिय हैं। लगता है इन विधायकजी का मन डोलने लगा है। चर्चा उनके कांग्रेस प्रेम को लेकर है। वे अपनी पार्टी के नेताओं के साथ कम और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जश्न में शामिल हो जाते हैं तो कभी बड़े नेताओं को हैप्पी बर्थडे का मैसेज भेज देते हैं। वैसे भी वे कुछ मूडी किस्म के हैं।
विधायकजी मूलत: बीजेपी के भी नहीं हैं वे तो देश काल परिस्थिति के हिसाब से बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के अपने कार्यकर्ता भी शायद यही सोच रहे होंगे कि विधायकजी की सोशल मीडिया टाइमलाइन का एल्गोरिदम आखिर किस तरफ सेट है। अपने नेताओं के पोस्ट कम और विपक्षियों के कार्यक्रमों में उपस्थिति ज्यादा क्यों दिखाई दे रही है। वैसे विधायकजी के बारे में यह भी कहा जाता है कि उनका मिजाज थोड़ा मूडी है।
कब किससे मिलना है, किसके साथ खड़ा होना है और किसे शुभकामना देनी है यह शायद उनके मूड और मौके पर निर्भर करता है। राजनीति में वैसे भी मौसम बदलते देर नहीं लगती और विधायकजी अगर मौसम का मिजाज पहले ही भांप लें तो इसमें उनका क्या दोष। लोग यही सोच रहे हैं कि कहीं अगला चुनाव हाथ के साथ तो नहीं लड़ेंगे।