सिंहासन छत्तीसी : प्रेमिका से मिलने में पिट गए अफसर, चार खोखे में बिक रहे पद
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालय सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि कई और चीजों का अड्डा बन गए हैं। आज हम आपको उन चीजों के बारे में इशारा कर रहे हैं जो यहां पर हो रही हैं। कहीं प्रेमिका से मिलने गए अफसर पिट रहे हैं तो कहीं चार खोके से लेकर 40 पेटी तक में बड़े पद बिक रहे हैं। जाहिर है इन सब खेल में वे बड़े लोग भी शामिल हैं जो इनसे वास्ता रखते हैं। इनमें अहम पद पर बैठे कई लोग रंगीन मिजाज के हैं। लेकिन कभी कभी इनको रंगीनियत में लेने के देने पड़ जाते हैं। ऐसा ही कुछ एक अधिकारी के साथ घटित हुआ है। वहीं पैसे का लेन देन कर कई लोग अहम पदों पर बैठ गए हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
आई मिलन की बेला में कुटाई :
छत्तीसगढ़ के एक विश्वविद्यालय के एक बड़े पद पर बैठे अफसर बहुत रंगीन मिजाज हैं। उनकी एक प्रेमिका है जिस पर वह बहुत फिदा हैं। हाल ही में वे एक कार्यक्रम से लौट रहे थे तो उनका मन प्रेमिका से मिलने का हुआ। उस वक्त रात हो चुकी थी इसलिए जोखिम ज्यादा था लेकिन कहते हैं न कि प्यार करने वाले कभी डरते नहीं। साहब भी नहीं डरे और पहुंच गए प्रेमिका से मिलने उसके घर।
आई मिलन की बेला में खलल पड़ गया जब उसका पति घर आ गया। अपने घर में प्रेमालाप देख उसने साहब की कुटाई कर दी। साहब को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। लेकिन ये सब बाहर इसलिए आ गया क्योंकि गाड़ी सरकारी थी,ड्रायवर सरकारी था और सरकारी वाहन में भी टूट फूट हो गई थी। रंगीन मिजाज उनका व्यक्तिगत मसला है लेकिन वे एक लोकसेवक हैं जिसकी एक मर्यादा होती है,इसका ध्यान तो उनको रखना ही चाहिए। खैर वे जो भी करें लेकिन कम से कम अपनी प्रेमलीला में सरकारी साधनों का उपयोग तो न करें।
4 खोखे से 40 पेटी तक में बिके पद :
अब एक और यूनवर्सिटी की बात करते है। यहां के पद की कीमत चार करोड़ से लेकर 40 लाख तक में बिके। सबसे बड़े पद की कीमत 4 करोड़ थी जो बड़े साहब को मिली। इतने वजन के आगे सारी योग्यताएं धरी रह जाती हैं। इस चहेते को प्रायवेट से उठाकर सीधे सरकारी पद पर बैठा दिया गया। यानी सरकारी कामकाज के अनुभव के उनको बड़े दाम में कुर्सी सौंप दी। अब उनका काम शुरु हुआ जिनको चार करोड़ में यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी कुर्सी सौंपी गई थी।
इन्होंने अपने से एक कदम छोटे लेकिन अहम पद पर अपने आदमी को बैठा लिया। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए 40 लाख में सौदा हुआ। इस पद पर काबिल की फाइल को नस्तीबद्ध कर चहेते को बैठा दिया गया। इसमें एक मंत्रीजी की दिलचस्पी थी इसीलिए डील पक्की हो गई। अब ऐसे विश्वविद्यालय चलेंगे तो फिर हो चुका छात्रों का कल्याण। यहां तो फिर खेला ही होगा क्योंकि 4 करोड़ 40 लाख भी तो यहीं से कमाने हैं।
जाति न पूछो मेडम की :
एक मेडम की जाति पता करने में पूरा मंत्रालय उलट पुलट हो गया लेकिन उनका बाल बांका नहीं कर सकता। दो जांच हो गईं लेकिन मेडम जस की तस हैं। 10 साल पहले पहली जांच कमेटी बैठी, उसने कह दिया कि मेडम की जाति वो नहीं है जिसके आधार पर उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल कर ली। मेडम हाईकोर्ट चली गईं और स्टे लेकर आ गईं। इसके बाद दूसरी जांच कमेटी बनाई गई।
इस जांच कमेटी ने भी गहन अध्ययन किया और प्रूफ कर दिया कि उनकी जाति सही नहीं पाई गईं। कुछ दिनों तक यह फाइल विभागीय अफसरों की टेबल पर पड़ी रही लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। अब एक बार फिर मेडम हाईकोर्ट की शरण में चली गई हैं। इन दस सालों में इन पर सरकार ढाई करोड़ खर्च कर चुकी है। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा हुआ है। अब आगे आगे देखिए होता है क्या।
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