सिंहासन छत्तीसी : मंत्री समर्थक के पैसे खा गया पीए, क्यों पड़ गए अफसरों को लेने के देने, क्या फॉर्म में नजर आ रहे हैं सीएम

Arun Tiwari | May 03, 2026, 11:54 IST
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छत्तीसगढ़ में मंत्री के पीए पर समर्थक से पैसे लेकर काम न करने का आरोप, सीएम सड़कों और आदेशों पर नाराज, प्रशासनिक फैसलों से अफसरों में हड़कंप मचा। आज के सिंहासन छत्तीसगढ़ में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से

RAIPUR : छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के पीए और ओएसडी को पैसे की इतनी भूख है कि वे मंत्री के करीबियों और समर्थकों को भी नहीं छोड़ रहे। एक भारी भरकम मंत्री के समर्थक के पैसे उनके पीए ने ही डकार लिए। दाम तो ले लिया लेकिन काम नहीं किया। वहीं एक ऑर्डर से अफसरों के लेने के देने पड़ गए। जब बिना पूछे ज्यादा होशियारी दिखाएंगे तो ऐसा तो होगा ही। मुख्यमंत्री इन दिनों फॉर्म में चल रहे हैं। एक बैठक में वे इतने नाराज हुए कि अफसर सकपका गए। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।



बीजेपी नेता का पैसा खा गया पीए

The PA Swindled a BJP Leaders Money


छत्तीसगढ़ के मंत्रियों के स्टाफ के लोगों में तो जैसे पैसा कमाने की होड़ लगी हुई है। सरकार के एक मंत्री हैं जिनके पास भारी भरकम विभाग हैं। इन मंत्री के पीए ने मंत्रीजी के करीबी समर्थक एक नेताजी के पैसे ही खा लिए। यह नेताजी कोरबा से है और बीजेपी के एक मोर्चे में जिला महामंत्री है। नेता ने अपने एक काम के लिए मंत्रीजी के पीए से निवेदन किया। पीए ने उसको साफ - साफ काम के फिक्स रेट बता दिए।



रेट तय हो गया और नेता ने पीए को पैसे भी दे दिए। यह रकम एक लाख से ज्यादा है। कई दिन बीत जाने के बाद भी उसका काम नहीं हुआ। पीए ने पैसे भी डकार लिए। अब नेता बेचारा क्या करे। साफ-साफ बोलने में वो इसलिए भी कतरा रहा है क्योंकि उसे आगे राजनीति करनी है। पता नहीं पीए, मंत्री के कान में क्या क्या भर दे और उसका राजनीतिक कॅरियर ही खत्म हो जाए। वैसे भी पीए ने मंत्री से कुछ भी न कहने की धमकी दी है। अब वो न मंत्री से कह पा रहा है और न ही पीए से पैसे ले पा रहा है। उसने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर जाहिर की है।



उसने अपनी पोस्ट में लिखा है कि जिसकी बराबरी नहीं की जा सकती उसकी बदनामी की जाती है। ब्लैकमेलिंग कर फंसाने का षड़यंत्र कितनी घिनौनी साजिश है। यह पूरे कोरबा की जनता जानती है। मंत्री उसी विभाग से जुड़े हैं जो सरकार को कमाई कराता है और जिसकी शौकीन छत्तीसगढ़ की जनता है।



सीएम की नाराजगी-अफसरों की बेचारगी

The CM Displeasure


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थोड़े सौम्य स्वभाव के माने जाते हैं लेकिन इन दिनों वे फॉर्म में चल रहे हैं। जहां गड़बड़ी की बात आती है वहां उनका पारा चढ़ जाता है। हाल ही में उन्होंने साड़ी कांड पर अफसरों को जमकर खरी खोटी सुनाकर चेतावनी भी दे डाली। अब सीएम फिर नाराज हैं। इस बार उनकी नाराजगी की वजह उनके क्षेत्र की सड़कें हैं।



छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा खराब सड़कें सीएम और डिप्टी सीएम के क्षेत्र की ही हैं। डिप्टी सीएम तो खुद पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं फिर सड़कों की हालत खराब है। समीक्षा बैठक में सीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। सीएम ने तो यहां तक कह दिया कि पीडब्ल्यूडी में तो कोई काम ही नहीं दिख रहा है।



हालत ये है कि पत्थलगांव की सड़क पिछले 15 सालों से बन रही है लेकिन बस बन ही रही है पूरी नहीं हो रही। पीडब्ल्यूडी को जो पिछला बजट मिला था वो भी खर्च नहीं हुआ और आधे से ज्यादा बच गया। अब शायद सीएम की नाराजगी देखकर शायद पीडब्ल्यूडी की कुछ रफ्तार बढ़ जाए।



उल्टा पड़ा निशाना

The Boomerang Effect


सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक ऑर्डर निकाला। इसमें लिखा था कि कोई भी कर्मचारी राजनीतिक,सामाजिक या निजी संस्थाओं में न तो पद ले सकता है और न ही उसके किसी कार्यक्रम में शामिल हो सकता है। ऑर्डर तो निकल गया लेकिन इस ऑर्डर से हड़कंप मच गया। हड़कंप इसलिए क्योंकि प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने के बाद भी एक आदेश निकला था जिसमें कर्मचारियों को संघ के कार्यक्रमों में जाने की छूट दे दी गई थी।



नए आदेश से हड़कंप सरकार में भी मचा और संघ में भी। इसको लेकर सरकार तक नाराजगी भी आई। नाराजगी आई तो सीएम ने कह दिया कि इसको वापस ले लिया जाए। हालांकि अफसरों ने तर्क दिया कि इसमें कुछ संशोधन कर देते हैं लेकिन सीएम ने साफ कहा कि संशोधन नहीं पूरा आदेश ही वापस करो।



अगले ही दिन आदेश स्थगित हो गया। खबरें कुछ ऐसी ही आ रही हैं कि सीएम को बिना स्पष्ट जानकारी दिए जीएडी ने यह आदेश निकाल दिया। यदि अफसर ऐसा करने लगे तो साहब को पूरा आदेश पढ़कर ही हस्ताक्षर करने पड़ेंगे वरना लेने के देने पड़ जाएंगे।



चुनाव ने किया बेड़ा गर्क

A Move That Backfired


एक चुनाव ने बेड़ा गर्क कर दिया है। हम बात विधानसभा चुनाव या अन्य किसी चुनाव की नहीं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं रेडक्रास जैसी स्वास्थ्य संस्था की। छत्तीसगढ़ कमाल है यहां जो हो जाए वो कम है। इसके अध्यक्ष सत्ताधारी दल से जुड़े लोग तो बन गए लेकिन एक समस्या भी पैदा हो गई है। यह समस्या है खासतौर पर जिलों की।



अब अध्यक्ष महोदय को कलेक्टर साहब मिलने का समय ही नहीं दे रहे हैं। पहले इस संस्था के चेयरमैन कलेक्टर होते थे। कलेक्टर साहब अपने रुतबे का इस्तेमाल कर अच्छा खास फंड जमा करवा देते थे। लेकिन अब चुनाव हुए तो अध्यक्ष प्रभावशाली नेताओं से जुड़े लोग बन गए। अब इनसे मिलने के लिए कलेक्टर के पास समय ही नहीं है। अब लोग कह रहे हैं और कर लो नए नए प्रयोग।



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