सिंहासन छत्तीसी: कौन हैं कलेक्टर साहिबा के करन-अर्जुन जो करवा रहे हैं कमाई, धड़ल्ले से चालू है 50 फीसदी कमीशन वाली नकली दवाई
Raipur. छत्तीसगढ़ के गलियारे हमेशा गर्म रहते हैं। एक कलेक्टर साहिबा इन दिनों बहुत चर्चा में हैं। उनके करन अर्जुन दोनों हाथ बने हुए हैं। इन हाथों से हो रही है सरकारी पैसे की लुटाई। आदिवासी देख देख कर बस आंसू बहा रहे हैं। वहीं 50 फीसदी कमीशन वाली नकली दवाई आज भी सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से पहुंच रही है।
आखिर ये लूप होल्स दिखते तो सबको हैं लेकिन बंद नहीं किए जाते। जब उपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की बैतरणी बह रही हो तो फिर कहना ही क्या। छत्तीसगढ़ की एक कार का नंबर सबको चौंका रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों को जानने के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक सिंहासन छत्तीसी कॉलम।
कलेक्शन में जुटीं कलेक्टर मेडम
छत्तीसगढ़ की एक कलेक्टर मेडम दोनों हाथों से कमाई करने में जुटी हुई हैं। इनके दो अनमोल रतन हैं या कहें कि करन-अर्जुन हैं, या यूं कहें कि वे इनके दाएं और बाएं हाथ हैं। इन हाथों से ही मेडम धन समेटने में जुटी हुई हैं। यह मेडम आदिवासी बाहुल्य जिले की कलेक्टर हैं। वे इन दिनों अपने भ्रष्टाचार मॉडल को लेकर चर्चा में हैं।
पंचायत विभाग के एक सब इंजीनियर और एक वेटरनरी डॉक्टर उनकी दोनों बाजू बने हुए हैं। और इन दोनों हाथों से ही योजनाओं में भ्रष्टाचार की कमाई की जा रही है। नियम कानून तो ताक पर रख दिए गए हैं। मेडम के करण अर्जुन ही जिला चला रहे हैं। विकास की गंगा अपने घर परिवार में ही बहा रहे है।
आदिवासी समाज को उम्मीद जागी थी कि उनकी बिरादरी का कोई कलेक्टर उनके जिले में आया है तो कुछ भला हो जाएगा। लेकिन उम्मीदें तो भ्रष्टाचार की बैरतरणी में ही डूब गईं। वैसे अब ज्यादा देर नहीं है इनके पाप की गठरी खुलने में क्योंकि उसमें माल ज्यादा गया है और गठरी उधड़ने लगी है।
नकली की सप्लाई चाहू है
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में नकली दवाई की सप्लाई चालू है। हाल ही में एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कैल्शियम की नकली दवा मिली। ये सीरप क्वालिटी चैक में फेल हो गया। साल भर में 926 सैंपल की जांच हुई जिसमें से 50 से ज्यादा सैंपल अमानक पाए गए। इससे साफ पता चलता है कि सरकार या मंत्रीजी लाख दावे करें लेकिन नकली दवाई की सप्लाई तो हो रही है।
हैरानी बात है कि पहले की जांच महीनों बाद भी पूरी नहीं हुईं, एक बड़ा दवा सप्लायर जेल में है फिर भी लोगों की सेहत से खिलवाड़ लगातार चल रहा है। लोग कहतें हैं कि जहां जहां 50 फीसदी कमीशन देकर दवा सप्लाई होगी क्वालिटी कहां से मिलेगी।
बीमार व्यक्ति भी सोचता होगा कि सरकारी अस्पताल की दवाएं असर क्यों नहीं करती शायद यह सब जानकर उन्हें समझ आ ही गया होगा कि यह कमीशन की दवाई है असली कैसे होगी,इलाज तो अब रामभरोसे ही है।
26/11...क्या है माजरा
कुछ दिन पहले एक सड़क पर एक कार दिखाई दी। जिसकी नंबर प्लेट चौंकाने वाली थी। नेम प्लेट के हिसाब से तो यह गाड़ी सरकारी सिस्टम में आने वाले मुलाजिम की थी। गाड़ी छत्तीसगढ़ की ही थी। इस गाड़ी में लगा हुआ नंबर प्लेट सामान्य नहीं है। अंतिम चार अंकों को ही हाईलाइट किया गया है। शुरु के अंक बहुत ही छोटे हैं जो परिवहन कानून के हिसाब से ठीक नहीं है।
आखरी के 4 नंबर जो बड़े बड़े अक्षरों में लिखे गए थे वे थे 2611....। जिन लोगों ने उस नंबर प्लेट को देखा तो उनके मुंह से अचानक ही निकल गया कि 2611 को इतना हाईलाइट क्यों किया हुआ है। जाहिर है 2611 देश की छाती पर लगा हुआ गंभीर जख्म है। इसीलिए इन नंबर का इस तरह लिखा होना हैरान करता है।
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