सिंहासन छत्तीसी : दिल्ली में हो रही है बड़े सरकारी पद की बड़ी डील, बिचौलिए की भूमिका में सांसद, मंत्रीजी ने 4 से 7 परसेंट किया कमीशन
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में पुलिस महकमे के एक बड़े पद के लिए दिल्ली में बड़ी डीलिंग की चर्चा है। इस डीलिंग में एक माननीय सांसद महोदय की अहम भूमिका है। वहीं एक मंत्री जी ने वित्त आयोग की राशि में अपना कमीशन 4 से बढ़कर 7 परसेंट कर लिया है।एक आईपीएस अफसर की बड़े बेआबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले जैसी हालत हो गई।
सपना तो जिले की कप्तानी करने का था लेकिन मंत्री की साढ़े साती ऐसी लगी कि उनका दिल्ली का टिकट कट गया। ऐसा हालांकि अक्सर होता नहीं है लेकिन यहां तो हो गया। वहीं इस बार सीएम प्रदेश को सरप्राइज एलीमेंट देने वाले हैं। इस बार उनका उड़नखटोला उड़ेगा लेकिन किसी को पता नहीं होगा कि कहां उड़ रहा है।
सीएम के एक हाथ में गिफ्ट होगा तो दूसरे में डंडा। जो अच्छा करेगा उसे गिफ्ट मिलेगा जो खराब करेगा उस पर डंडा चलेगा। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
बड़े पद के लिए पैसों का बड़ा ऑफर
छत्तीसगढ़ में एक बड़े सरकारी पद के लिए बड़ी डीलिंग होने वाली है। यह पद पुलिस महकमे से जुड़ा हुआ है। यह डीलिंग दिल्ली में होने जा रही है और यह डीलिंग करा रहे हैं सत्ताधारी दल के एक एमपी। यानी सांसद महोदय इस पूरे लेन-देन में मध्यस्थता कर रहे हैं।
एक आला अधिकारी पद पाने के लिए पैसों का बड़ा ऑफर लेकर राजधानी पहुंचे हैं। उनकी मुलाकात आला नेता से होगी। इस मुलाकात और डील की जमावट सांसद महोदय ने ही की है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ और डील फाइनल हो गई तो जल्द ही प्रशासन में इसका असर नजर आ जाएगा।
मंत्रीजी ने बढ़ाया कमीशन
इस समय 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायत,नगर निकाय और आपदा प्रबंधन के लिए ग्रांट दी जा रही है। इस फंड से नगर से लेकर ग्राम पंचायतों तक काम होते हैं जिनका ज्यादा कोई हिसाब-किताब नहीं होता। फंड भी कुछ ज्यादा ही आता है। छत्तीसगढ़ में भी वित्त आयोग का भारी भरकम फंड आया है।
इस फंड को मंत्री जी ने रोक दिया। पूछताछ की तो पता चला कि मंत्रीजी को अब इस पर 4 की जगह 7 परसेंट कमीशन चाहिए। बात तो सही है, महंगाई भी तो बढ़ गई है। जब मंत्रीजी को 7 परसेंट दिया गया तभी फंड बंटने जा रहा है। वाह रे छत्तीसगढ़ का सुशासन।
बड़े बेआबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले
ऐसा कभी हुआ नहीं कि जिले की कप्तानी न मिले और दिल्ली का रास्ता नप जाए। लेकिन छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसा ही हुआ है। नए आईपीएस को यहां कप्तानी नहीं दी गई और वे दिल्ली डेप्युटेशन पर निकल गए। यहां पर बात कुछ नाराजगी की है। नाराजगी भी मंत्री की। मंत्री की नाराजगी भी शनि की साढ़े साती जैसी होती है।
साहब को साढ़े साती लगी तो दिल्ली का टिकट कट गया। वैसे इनको एक जिले में एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी मिल गई थी, लेकिन यह तलवार की धार पर चलने जैसा हो गया क्योंकि जिला गृह मंत्री का था। एक मामला हुआ और साहब सस्पेंड हो गए। तब इस निलंबन को उचित नहीं ठहराया गया क्योंकि एडिशनल एसपी की कोई निर्णय लेने में रोल नहीं होता।
यह पोस्ट तो कप्तानी के पहले की फील्ड वर्किंग का हिस्सा होती है। इनको हेडक्वार्टर में बैठा दिया गया। निलंबन से बहाली हुई तो कमिश्नरेट में डीसीपी बन गए लेकिन जोन की जगह ट्रैफिक का जिम्मा दे दिया गया। आखिरकार परेशान होकर युवा अफसर ने दिल्ली में प्रतिनियुक्ति मांग ली और इसकी मंजूरी भी मिल गई। जाहिर अभी उनको अच्छा फील नहीं हो रहा होगा लेकिन करियर लंबा है आगे सब ठीक हो जाएगा।
सीएम देंगे सरप्राइज
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार बड़े त्योहार के जैसा होता है। दरअसल ये सीएम का पसंदीदा पर्व क्योंकि उनको सुशासन शब्द से बहुत प्यार है। सीएम ने सुशासन तिहार के लिए बड़ी तैयारी की है। सीएम इस बार सबको सरप्राइज देने वाले हैं। सरप्राइज में सीएम के एक हाथ में डंडा भी होगा।
सूत्रों बताते हैं कि इस बार सीएम का छापा बिना शेड्यूल के होगा। पहले से शेड्यूल में औचक निरीक्षण का कोई मतलब नहीं निकल पाता क्योंकि इस प्रोग्राम में अफसर डंडी मार लेते हैं और जहां सीएम का उड़नखटोला उतरता वहां की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी जाती हैं।
इस बार सीएम बिना बताए अपना हेलीकाप्टर उतारेंगे और जहां गड़बड़ी मिली वहीं तत्काल डंडा चल जाएगा। पहले ही चिट्ठी लिखकर बता दिया गया है कि समस्या निवारण शिविर में एसपी-कलेक्टरों का होना अनिवार्य है। यानी इस बार सिर्फ रस्म अदायगी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ तो कुछ हद तक सीएम को योजनाओं का असली फीडबैक तो मिल ही जाएगा।