गुप्तवार्ता के अफसर परिवहन विभाग में, रोहित झा बने संयुक्त परिवहन आयुक्त, प्रतिनियुक्ति पर मिली नई जिम्मेदारी
तीन महीने से खाली था पद
संयुक्त परिवहन आयुक्त का पद राज्य पुलिस के अधिकारी यूबीएस चौहान के रिटायर होने के बाद खाली पड़ा था। वे करीब तीन महीने पहले सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद से इस अहम पद पर नियमित तौर पर कोई अधिकारी नहीं था। अब सरकार ने पुलिस मुख्यालय के अफसर रोहित झा को यहां भेजकर खाली कुर्सी भर दी है।
गुप्तवार्ता से परिवहन तक
रोहित कुमार झा 2007 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। वे अभी पुलिस मुख्यालय रायपुर में सहायक पुलिस महानिरीक्षक, गुप्तवार्ता के पद पर तैनात हैं। अब उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर परिवहन विभाग को दी गई हैं। उन्हें परिवहन आयुक्त कार्यालय में संयुक्त परिवहन आयुक्त बनाया गया है।
पुलिस अफसर को क्यों चुना?
इस नियुक्ति का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि परिवहन विभाग के अहम पद के लिए पुलिस विभाग के अधिकारी को चुना गया है। रोहित झा का मौजूदा काम गुप्तवार्ता से जुड़ा है। ऐसे में परिवहन विभाग में उनकी पोस्टिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि सरकार ने इस पद के लिए प्रशासनिक सेवा या परिवहन विभाग के अधिकारी की जगह पुलिस अधिकारी को क्यों चुना?
आदेश में वजह साफ नहीं
परिवहन विभाग के 5 अक्टूबर 2026 के आदेश में रोहित झा की नई पोस्टिंग का जिक्र है, लेकिन उन्हें परिवहन विभाग में भेजने की वजह नहीं बताई गई है। आदेश में सिर्फ इतना कहा गया है कि उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए उन्हें आगामी आदेश तक संयुक्त परिवहन आयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है।
कुर्सी खाली, व्यवस्था कैसे चली?
तीन महीने तक संयुक्त परिवहन आयुक्त का पद खाली रहने के दौरान विभाग का कामकाज किस व्यवस्था से चलता रहा, यह भी बड़ा सवाल है। परिवहन विभाग में परमिट, वाहनों से जुड़े मामलों, प्रवर्तन और दूसरे अहम कामों में इस स्तर के अधिकारी की भूमिका रहती है। ऐसे में इतने समय तक पद खाली रहने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब पुलिस अनुभव का इस्तेमाल
रोहित झा की नियुक्ति से एक बात साफ है कि सरकार ने इस बार परिवहन विभाग में पुलिस अनुभव वाले अधिकारी को मौका दिया है। अब देखना होगा कि उनकी नई जिम्मेदारी के बाद विभाग के कामकाज और खासकर निगरानी व प्रवर्तन व्यवस्था में क्या बदलाव आता है।
सेवा शर्तें बाद में
सरकार ने फिलहाल उनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि और दूसरी शर्तें अलग रखी हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रतिनियुक्ति से जुड़ी सेवा शर्तें बाद में अलग से जारी की जाएंगी। आदेश पर परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव कमलेश बंसोड़ के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। यानी फिलहाल खाली पड़ी कुर्सी भर गई है, लेकिन इस नियुक्ति के पीछे सरकार की असली रणनीति क्या है, इसका जवाब अभी आदेश में नहीं है।