12वीं हिंदी पेपर लीक ; शिक्षकों के जरिए लीक हुआ हिंदी का प्रश्नपत्र, NSUI नेता ने 3-3 हजार में बेचा
NEWS IN SHORT
- शिक्षकों ने गोपनीय हिंदी पर्चा लीक कर NSUI नेता को दिया।
- नेता ने परिचित छात्र को तीन हजार रुपये में बेचा पर्चा।
- पकड़े जाने के डर से हाथ से लिखकर वायरल की कॉपी।
- मुख्य आरोपी शिक्षक गिरफ्तारी के डर से फिलहाल फरार चल रहे।
- पुलिस जांच में आधा दर्जन से अधिक लोगों की संलिप्तता मिली।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी पेपर लीक मामले ने शिक्षा जगत और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में गिरफ्तार NSUI नेता वेणु जंघेल से हुई पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
शिक्षकों की भूमिका और नेटवर्क का पर्दाफाश
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि प्रश्नपत्र लीक करने के पीछे शिक्षा विभाग के ही शिक्षक शामिल हैं। पूछताछ के दौरान वेणु जंघेल ने स्वीकार किया कि उसे हिंदी का पर्चा कुछ शिक्षकों के माध्यम से प्राप्त हुआ था।
जैसे ही पुलिस ने वेणु को गिरफ्तार किया, इस साजिश में शामिल संबंधित शिक्षक अपने ठिकानों से फरार हो गए हैं। पुलिस अब उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि लीक का मुख्य केंद्र परीक्षा केंद्र था या सीधे शिक्षा मंडल।
पैसे का लेन-देन और सोशल मीडिया पर प्रसार
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह केवल पर्चा साझा करने का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध था। वेणु ने शिक्षकों से मिले पर्चे को अपने एक परिचित छात्र को 3 हजार रुपए में बेच दिया। उस छात्र ने पर्चा मिलते ही उसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर फैला दिया, जिससे देखते ही देखते यह हजारों छात्रों तक पहुँच गया।
पकड़े जाने के डर से मूल प्रश्नपत्र की फोटो भेजने के बजाय, उसे हाथ से लिखकर (मैनुस्क्रिप्ट) कॉपी तैयार की गई थी ताकि तकनीकी रूप से इसे ट्रेस करना मुश्किल हो। पुलिस ने वेणु की हैंडराइटिंग का मिलान कराया है, जो अलग पाई गई, जिससे साबित होता है कि लिखने वाला कोई और था।
पुलिस की कार्रवाई और संदिग्धों की संख्या
पुलिस का मानना है कि इस पूरे कांड में आधा दर्जन से ज्यादा लोग सीधे तौर पर शामिल हैं। अब तक की जांच में निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं। इस मामले में करीब 22 छात्रों से पूछताछ की गई है। कुछ छात्रों को पहले से पता था कि पर्चा लीक होने वाला है और उन्होंने भी इसे आगे बेचने की कोशिश की।
पुलिस को कई संदिग्ध मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि प्रश्नपत्र स्ट्रॉन्ग रूम से निकला या केंद्र में वितरण के दौरान इसकी फोटो खींची गई।
निष्कर्ष
बेमेतरा का यह पर्चा लीक कांड एक बड़े नेक्सस की ओर इशारा करता है जहाँ रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। शिक्षकों और छात्र नेताओं की यह मिलीभगत न केवल ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि परीक्षा की गोपनीयता पर भी एक काला धब्बा है। फिलहाल, पुलिस फरार शिक्षकों और अन्य मास्टरमाइंड्स की तलाश में छापेमारी कर रही है।
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