32 करोड़ के सामान खरीदी में अधिकारियों को मंत्री का ok सर्टिफिकेट, कंपनियों से भी वसूली नहीं
News in short
- 32 करोड़ की गड़बड़ी में अधिकारियों को हरी झंडी।
- 6 कंपनियां ब्लैक लिस्टेड, पर वसूली नहीं।
- दूसरा फर्म बनाकर फिर से टेंडर में ले सकते है भाग।
- जांच कमेटी में खरीदी कमेटी के सदस्य शामिल।
News in detail
32 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में छत्तीसगढ़ की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय अधिकारियों को हरी झंडी दे दी है। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने यह तो माना है की खरीदी में गड़बड़ी हुई है। लेकिन, उनके अनुसार उसमें अधिकारी शामिल नहीं है।
कार्रवाई के नाम पर विभाग में सप्लाई करने वाली 6 कंपनियों को जेम पोर्टल से ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। लेकिन, ना तो उन पर कोई कानूनी कार्रवाई की गई है और ना ही उन पर कोई फाइनेंशियल एक्शन लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल बीते दिनों प्रदेश के आंगनबाड़ियों में बच्चों के खिलौने, फर्नीचर, थाली, तवा, अनाज की कोठी और आलमारी की खरीदी की गई थी। जिसमें बड़ा घोटाला उजागर हुआ है।
सप्लाई एजेंसियों ने बच्चों के खिलौने थाली अलमारी अनाज की कोठी बेहद घटिया तरीके की सप्लाई की गई थी जब इसे लेकर शोर शराबा हुआ तो मंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए एक जांच कमेटी बनाई थी। पूरी खरीदी 32 करोड रुपए की बताई गई।
क्या पाया कमेटी ने
विभागीय मंत्री द्वारा बनाई गई जांच कमेटी बनाई। जिसमें कई उन्हीं अधिकारियों शामिल किया गया, जो खरीदी कमेटी में थे। उसी समय जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगा था।
कमेटी ने इस बात को स्पष्ट किया कि सप्लाई किया हुआ सामान तय किए हुए सामान से बिल्कुल निम्न क्वालिटी का है। 15 दिनों जांच के बाद रिपोर्ट मंत्री लक्ष्मी रजवाड़ों को सौंप दी गई।
रिपोर्ट आने के बाद यह उम्मीद थी कि न केवल सप्लाई करने वाले फर्मों पर कार्रवाई होगी बल्कि अधिकारियों को भी दंडित किया जाएगा लेकिन मंत्री ने अधिकारियों को हरी झंडी दे दी।
इन अधिकारियों ने की जांच
सामानों की जांच के लिए राज्य स्तरीय जांच समिति बनाई गई। इसमें वित्त के संयुक्त संचालक, सीएसआईडीसी और जीईसी के तकनीकी प्रतिनिधि और जिला कार्यक्रम अधिकारियों के अलावा ICDS के सहायक संचालक और दो तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों के अलावा अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।
खरीदी की प्रक्रिया जानिए...
आवश्यकता के अनुसार विभाग सामान खरीदी के लिए वित्तीय स्वीकृति देता है। इसके आधार पर जेम पोर्टल पर एक टेंडर जारी किया जाता है। टेंडर में गुणवत्ता यानी टेक्निकल बिड क्वालीफाई करने वालों को फाइनेंसियल बिट में शामिल किया जाता है। इसमें जो सप्लायर तय मानकों के अनुसार सबसे कम कीमत पर सप्लाई करने का वादा करता है। उसे टेंडर दे दिया जाता है।
खरीदी प्रक्रिया के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाई जाती है। जो टेंडर के शर्त बनाने से लेकर के सामान की सप्लाई तक का जिम्मा उठती है। गड़बड़ी होने पर भी उनकी ही गलती मानी जाती है। लेकिन, मंत्री कह रही कि अधिकारियों की कोई गलती ही नहीं।
इन एजेंसियों को किया गया ब्लैक लिस्ट
मेसर्स नमो इंटरप्राइजेस, आयुष मेटल, मेसर्स अर्बन सप्लायर्स, मनीधारी सेल्स, ओरिएंटल सेल्स, मेसर्स सोनचिरैया कॉर्पाेरेशन। लेकिन इनके ऊपर कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया गया। इनके पास यह रास्ता भी खुला है कि यह दूसरे फार्म के नाम से महिला एवं बाल विकास या छत्तीसगढ़ के किसी भी विभाग के टेंडर में शामिल हो सकते हैं।
खरीदी कमेटी के जिम्मेदार अधिकारी
यह खरीदी महिलाएं बाल विकास विभाग के ICDS शाखा से की गई थी। जिसमें विभाग के संयुक्त संचालक दिलदार सिंह मरावी, उपसंचालक सुनील शर्मा, वित्त विभाग के संयुक्त संचालक भावेश दुबे थे।
टेक्निकल सपोर्ट के लिए अन्य लोग शामिल किए गए थे। लेकिन चर्चा यह है कि यह कमेटी केवल नाम भर की थी। सूत्रों के अनुसार खरीदी के सारे निर्देश मंत्री बंगले से ही आते थे। शायद अधिकारियों पर इसीलिए कार्रवाई नहीं की गई।
खरीदी की राशि हो गई कम
भ्रष्टाचार उजागर होने से पहले बताया गया था कि प्रदेश भर में 40 करोड़ की लागत से सामान खरीदे गए हैं। लेकिन, जब गड़बड़ी सामने आई तो खरीदी राशि में कमी कर दी गई। बताया गया कि केवल 32 करोड़ की ही लागत से सामान खरीदे गए हैं।
अधिकारियों ने घोटाला उजागर किया था: मंत्री
मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि शिकायत मिलते ही जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की गई है।
सप्लाई करने से पहले सभी सामानों की गुणवत्ता जांची गई थी। शिकायत मिलने पर अधिकारियों के द्वारा ही जांच की गई और घटिया सामान सप्लाई का मामला उजागर हुआ।
ये खबरें भी पढ़ें...
छत्तीसगढ़ की नदियों के संरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 'सिर्फ अफसरों की फौज से नहीं बचेंगी नदियां'
कांग्रेस ने बनाई छत्तीसगढ़ विधानसभा के घेराव की योजना, 17 मार्च को प्रदर्शन
सेठजी के नाम पर तेज हुई सियासत, 60 साल बाद बदल दिया किरोड़ीमल कॉलेज का नाम,ओपी ने लिखा साहेब को पत्र
गरियाबंद में पुलिस टीम पर जानलेवा हमला, शराब कारोबारियों ने लाठी-डंडों से पीटा