पीडीएस घोटाला : तीन सचिव खा गए गरीबों का 500 करोड़ का राशन, सदन में आएगी रिपोर्ट
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़े 584 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच रिपोर्ट अब सार्वजनिक होने की तैयारी में है। विधानसभा की विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन खाद्य विभाग के तीन सचिवों सहित कुल 208 अधिकारियों और कर्मचारियों को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना है। रिपोर्ट मानसून सत्र में पेश होने वाली है।
13 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इस रिपोर्ट पर विधानसभा में हंगामे के आसार हैं। जांच समिति के अनुसार पीडीएस व्यवस्था में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी तंत्र की कमजोरी और रिकॉर्ड संधारण में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। समिति ने माना है कि खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में कई स्तरों पर नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा।
ये अधिकारी ज़िम्मेदार:
रिपोर्ट में जिन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें तीन खाद्य सचिव, एक खाद्य संचालक, 23 जिला खाद्य नियंत्रक और 181 खाद्य निरीक्षक शामिल हैं। यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान हुए घोटाले से जुड़ा बताया गया है। समिति ने अपनी जांच के दौरान खाद्य विभाग से जुड़े दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टरों, वितरण अभिलेखों और अधिकारियों के जवाबों का विस्तृत अध्ययन किया। लगभग दो वर्षों तक चली जांच के बाद रिपोर्ट विधानसभा को सौंप दी गई। अब रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और अन्य कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
विधानसभा ने बनाई थी जांच कमेटी:
यह जांच फरवरी 2024 में गठित विधानसभा समिति ने की थी। सरकार बदलने के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और विधायक धरमलाल कौशिक द्वारा विधानसभा में मामला उठाए जाने पर तत्कालीन खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने पांच सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी। पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले की अध्यक्षता वाली समिति में विधायक राजेश मूणत, विक्रम उसेंडी, लखेश्वर बघेल और संगिता सिन्हा को शामिल किया गया था। समिति ने फरवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच कुल 15 बैठकें कीं। इस दौरान खाद्य विभाग के विभिन्न अधिकारियों से जानकारी ली गई और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया। जांच के बाद 20 मार्च 2026 को समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट विधानसभा को सौंप दी।
जांच समिति ने उठाए सवाल:
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए गए हैं। समिति ने पूछा है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में ई-पास प्रणाली लागू किए जाने के बावजूद राज्य में इसे वर्ष 2022 तक क्यों टाल दिया गया। समिति का मानना है कि यदि ई-पास व्यवस्था समय पर लागू हो जाती तो अनियमितताओं और राजकोषीय नुकसान की आशंका काफी हद तक कम हो सकती थी।
जांच रिपोर्ट में खाद्यान्न समायोजन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। पीडीएस नियमों के तहत एक दुकान के खाद्यान्न को दूसरी दुकान में समायोजित करने का प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई मामलों में ऐसा किया गया। समिति ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है और कहा है कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
2 हज़ार करोड़ के घोटाला:
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक पहले भी विधानसभा में दावा कर चुके हैं कि उचित मूल्य दुकानों में चावल, चना, शक्कर और नमक के वितरण में रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर था। उनका कहना था कि यदि पूरे कार्यकाल की व्यापक जांच कराई जाए तो घोटाले की राशि 584 करोड़ रुपये से कहीं अधिक, लगभग 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
निष्कर्ष:
अब सबकी निगाहें विधानसभा के मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां इस रिपोर्ट पर चर्चा होने और सरकार द्वारा आगे की कार्रवाई की घोषणा किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पीडीएस व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू होना तय माना जा रहा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
216 करोड़ का पीडीएस घोटाला, रिपोर्ट में बड़े खुलासे
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : मानसून सत्र से पहले सवालों की बारिश
एमपी विधानसभा मानसून सत्र में गूंजेंगी आपकी आवाज: कांग्रेस ने मांगे सवाल
संसद में उठेगा बड़ा सवाल: जस्टिस यशवंत वर्मा रिपोर्ट मानसून सत्र में होगी पेश