छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : मानसून सत्र से पहले सवालों की बारिश

Rajesh Lahoti | Jul 11, 2026, 17:09 IST
Share
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी

मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। नकटी विवाद, सोनहत, कानून व्यवस्था, खाद-बीज, रेत कारोबार और सड़क निर्माण जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस एक हजार से अधिक सवालों के साथ सदन में उतर रही है।

मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। नकटी विवाद, सोनहत, कानून व्यवस्था, खाद-बीज, रेत कारोबार और सड़क निर्माण जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस एक हजार से अधिक सवालों के साथ सदन में उतर रही है, जबकि सरकार ने भी समय से पहले विधायकों की बैठक बुलाकर रणनीति बनाई है। रायपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के दोबारा भूमिपूजन ने सरकारी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीजन बाई के सम्मान में की गई घोषणाओं के बीच अब उनकी ज़मीनी हकीकत की परीक्षा होगी। वहीं रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ, महादेव बेटिंग केस और वेदांता प्लांट विस्फोट की जांच ने भ्रष्टाचार और जवाबदेही की बहस को फिर तेज कर दिया है। पहली बारिश में उखड़ी करोड़ों की सड़कें भी सरकार के लिए नई मुश्किल बन गई हैं। कुल मिलाकर, मानसून सत्र में सत्ता पक्ष को विकास, प्रशासन और राजनीतिक जवाबदेही तीनों मोर्चों पर कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ सकता है।

नकटी ने बढ़ाई टेंशन

विधानसभा का मानसून सत्र अभी शुरू भी नहीं हुआ, लेकिन सत्ता पक्ष के माथे पर पसीना पहले ही दिखाई देने लगा है। आमतौर पर विधायक दल की बैठक सत्र से ठीक पहले होती है, मगर इस बार ने समय से पहले ही सभी विधायकों को राजधानी बुला लिया। वजह सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि वे मुद्दे हैं जो सरकार के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। सबसे ऊपर है नकटी का मामला, जिसने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। ऊपर से मंत्रियों और संगठन के नेताओं के अलग-अलग बयान यह बता रहे हैं कि कहानी सिर्फ विपक्ष की नहीं, घर की भी है। उधर कांग्रेस 1000 से ज्यादा सवालों की गठरी लेकर सदन में उतरने की तैयारी कर रही है। नकटी, सोनहत, खाद-बीज, कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की यह बैठक कम और होमवर्क क्लास ज्यादा रही है। अब देखना यह है कि विधायक उत्तर याद करके सदन पहुंचते हैं या फिर विपक्ष सवाल पूछता रहेगा और सत्ता पक्ष नोट्स ही पलटता रह जाएगा।

दोबारा भूमिपूजन

सरकारी योजनाओं का भी अपना अलग गणित होता है। भवन तैयार हो या न हो, शिलापट्ट जरूर तैयार मिल जाता है। रायपुर मेडिकल कॉलेज का हॉस्टल इसका ताजा उदाहरण है। जो भवन 2022 में बन जाना चाहिए था, वह 2026 में भी अधूरा खड़ा है। फिलहाल चिंता छात्रों की नहीं, समारोह की ज्यादा दिखी। उद्घाटन संभव नहीं था, इसलिए उसी अधूरे प्रोजेक्ट का दोबारा भूमिपूजन करा दिया गया। लगता है इमारतें कम और कार्यक्रम ज्यादा बन रहे हैं। इधर मेडिकल छात्र किराए के कमरों और पीजी में हजारों रुपए खर्च कर पढ़ाई कर रहे हैं, उधर फाइलों में डिजाइन बदलती रही, ठेकेदार बदलते रहे और लागत भी बढ़कर करोड़ों ऊपर पहुंच गई। जिम्मेदारी तय करने की शर्त भी कागजों में कहीं खो गई। अब हालत यह है कि हॉस्टल से ज्यादा मजबूत उसका शिलापट्ट दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ की नौकरशाही ने शायद नया फॉर्मूला खोज लिया है। काम अधूरा हो तो कोई बात नहीं, कार्यक्रम पूरा होना चाहिए। आखिर फोटो में सीमेंट नहीं, फीता ही तो दिखता है।

अब वादों की परीक्षा

कभी-कभी सरकारें ऐसे फैसले भी लेती हैं, जिन पर राजनीति से ज्यादा सहमति दिखाई देती है। पंडवानी को दुनिया के मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन के बाद राज्य सरकार ने उनके नाम पर सम्मान, कला ग्राम, संग्रहालय में तंबूरा और स्कूल का नामकरण जैसी कई घोषणाएं की हैं। यह स्वागत योग्य पहल है, क्योंकि कलाकार का सबसे बड़ा सम्मान केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उसकी कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना होता है। हालांकि, छत्तीसगढ़ की जनता सरकारी घोषणाओं का इतिहास भी जानती है। कई योजनाएं फाइलों से निकलकर शिलापट्ट तक पहुंचती हैं, मगर जमीन तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती हैं। इसलिए अब असली परीक्षा घोषणा की नहीं, अमल की है। अगर गनियारी सचमुच कला ग्राम बना, राज्य सम्मान नियमित मिला और संग्रहालय में तीजन बाई की विरासत जीवंत रही, तभी यह श्रद्धांजलि सार्थक मानी जाएगी। आखिर कलाकार की पहचान भाषणों से नहीं, उसके नाम पर किए गए स्थायी कामों से जिंदा रहती है।

रामगोपाल की फाइल

छत्तीसगढ़ के चर्चित घोटालों की कहानी में एक किरदार ऐसा भी था, जिसकी चर्चा ज्यादा और मौजूदगी कम दिखाई देती थी। अब वही रामगोपाल अग्रवाल खुद ईओडब्ल्यू दफ्तर पहुंचे तो जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। तीन साल से जिन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे थे, अब उम्मीद है कि उनके कुछ पन्ने खुलेंगे। शराब घोटाला, कथित कोल लेवी और कस्टम मिलिंग जैसे मामलों की कड़ियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि जांच का रास्ता लंबा होता है और अदालत का फैसला ही अंतिम सच माना जाएगा। राजनीति में टाइमिंग भी बहुत मायने रखती है। ऐसे वक्त में हुई यह कार्रवाई विपक्ष और सत्ता, दोनों के लिए नई बहस का विषय बन गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पूछताछ सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर उन फाइलों तक पहुंचती है, जिनके बारे में वर्षों से केवल चर्चाएं होती रही हैं। फिलहाल इस मामले में सवाल ज्यादा हैं और जवाब ईओडब्ल्यू की डायरी में बंद हैं।

सड़क उखड़ी, बोर्ड खड़ा

छत्तीसगढ़ में सड़कें अब मौसम विभाग से ज्यादा बारिश का इंतजार करती हैं। पहली तेज बारिश हुई नहीं कि कई सड़कें अपनी असली उम्र बता देती हैं। कवर्धा में ढाई करोड़ रुपए की लागत से बनी सड़क भी महज दो महीने में उखड़ गई। हालात ऐसे बने कि ट्रक सड़क में धंस गया और लोग हाथ से डामर उखाड़कर गुणवत्ता का प्रदर्शन करने लगे। अच्छी बात सिर्फ इतनी रही कि सड़क के किनारे लगा बोर्ड अभी भी मजबूती से खड़ा है। विडंबना यह है कि यह सड़क उसी विभाग की है, जिसकी जिम्मेदारी खुद डिप्टी सीएम के पास है। दो-तीन लोगों का सस्पेंशन हो भी चुका है, लेकिन उस सुविधा का क्या होगा। पूरे प्रदेश में सड़कों का यही हाल है। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया तो ग्रामीणों ने भी घटिया निर्माण पर सवाल उठा दिए। अब जांच होगी, रिपोर्ट बनेगी और शायद मरम्मत भी हो जाएगी। असली सवाल वही रहेगा कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी सड़क की उम्र पहली बारिश से कम क्यों रह जाती है? लगता है प्रदेश में सड़कें अब गाड़ियों से ज्यादा जांच समितियों का भार ढो रही हैं।

रिपोर्ट तैयार, अब जिम्मेदारों की बारी

सक्ती के वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट को तीन महीने बीत चुके हैं। 25 मजदूरों की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारी अभी भी सरकारी फाइलों में रास्ता तलाश रही है। राहत की खबर यह है कि कमिश्नर और केंद्रीय विशेषज्ञ टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी है। यानी अब सच कागज पर उतर चुका है, बस कार्रवाई का इंतजार बाकी है। फिलहाल देखना यह है कि रिपोर्ट सिर्फ अलमारी की शोभा बढ़ाएगी या फिर किसी की जवाबदेही भी तय करेगी? प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, बॉयलर पर अतिरिक्त दबाव और अलार्म के बावजूद उत्पादन जारी रखने जैसी गंभीर बातें सामने आई हैं। एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई अब भी रिपोर्टों के आने का इंतजार कर रही है। लगता है इस सिस्टम में हादसे जल्दी हो जाते हैं, लेकिन फैसले धीरे-धीरे पकते हैं। पीड़ित परिवारों को अब मुआवजे से ज्यादा न्याय का इंतजार है। देखना होगा कि इस बार जांच का अंत सिर्फ एक और रिपोर्ट पर होता है या वास्तव में किसी की जिम्मेदारी भी तय होती है।

महादेव और सीबीआई

महादेव ऑनलाइन बेटिंग केस की कहानी में हर दिन नया अध्याय जुड़ रहा है। पहले ओमान में सौरभ चंद्राकर के गिरफ्तार होना और अब सीबीआई ने छह नए आरोप पत्र दाखिल कर पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। जिन नामों की चर्चा अब तक जांच की फाइलों में थी, वे अब अदालत की चार्जशीट में दर्ज हो चुके हैं। साथ ही मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी नए डिजिटल साक्ष्य जोड़कर जांच एजेंसी ने अपना केस और मजबूत करने का दावा किया है। महादेव ऐप अब केवल ऑनलाइन सट्टे का मामला नहीं रहा, बल्कि राजनीति, कारोबार और जांच एजेंसियों की सबसे चर्चित फाइलों में शामिल हो चुका है। हर नई कार्रवाई के बाद सवाल उठता है कि क्या अब कहानी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचेगी? लेकिन अनुभव कहता है कि इस केस में हर चार्जशीट के बाद एक नई चार्जशीट पैदा हो जाती है। फिलहाल अदालत में कानूनी लड़ाई शुरू होगी और अंतिम फैसला वहीं होगा। तब तक महादेव की फाइल बंद नहीं, बल्कि लगातार मोटी होती नजर आ रही है।

ये खबरें भी पढ़ें...

चार्जशीट में रामगोपाल की कमाई का किस्सा, PCC दफ्तर में बंटा घोटाले का हिस्सा

रायपुर नकटी विवाद : ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप

महादेव सट्टा में IPS अफसर जांच से बाहर, प्रोटेक्शन मनी वाले चार्जशीट में नहीं

छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : एआई, वोट और डिजिटल दंगल... सप्ताहभर छाए रहे बड़े मुद्दे

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • विधानसभा का मानसून सत्र
  • छत्तीसगढ़ की राजनीति
  • महादेव सट्टा
  • रामगोपाल अग्रवाल
  • छत्तीसगढ़ की चिट्ठी
  • वेदांता पावर प्लांट
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच