रिश्वत का खेल : भारतमाला प्रोजेक्ट में सिंचित जमीन को बंजर बताकर काटा मुआवजा
समझें क्या है पूरा मामला
Rajnandgaon। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में भारतमाला परियोजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम देवादा के किसानों ने आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं की गई हैं। किसानों का कहना है
कि जिनकी जमीन उपजाऊ और सिंचित थी, उसे रिकॉर्ड में बंजर दिखाकर कम मुआवजा दिया गया, जबकि कुछ मामलों में फर्जी तरीके से ज्यादा भुगतान भी कर दिया गया। पूरा मामला अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर तक पहुंच गया है।
किसानों का आरोप: रिश्वत न देने पर घटाया गया मुआवजा
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं कि भूमि रिकॉर्ड में बदलाव करने के बदले में पटवारी और कुछ राजस्व अधिकारियों द्वारा 2 से 3 लाख रुपए तक की मांग की गई थी।
किसानों का कहना है कि जिन लोगों ने पैसे नहीं दिए, उनकी जमीन को कागजों में एक फसली या कम उपजाऊ दिखाकर मुआवजा घटा दिया गया। वहीं, जिन्होंने कथित तौर पर पैसे दिए, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक मुआवजा मिला। इस पूरे घटनाक्रम से गांव के किसानों में नाराजगी और असंतोष है।
सिंचाई वाली जमीन को बताया गया बंजर
देवादा गांव के किसानों का कहना है कि उनके खेतों में नहर और नाली के जरिए नियमित सिंचाई होती है और कई फसलें साल में एक से अधिक बार ली जाती हैं। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में इन्हें असिंचित या कम मूल्य वाली भूमि के रूप में दर्ज किया गया।
इस गलत वर्गीकरण के कारण मुआवजे की राशि पर सीधा असर पड़ा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरी भूमि का दोबारा भौतिक और तकनीकी मूल्यांकन किया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
खसरा रिकॉर्ड और भुगतान सूची में गड़बड़ी के आरोप
किसानों ने दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। शिकायत में कहा गया है कि कई खसरा नंबर ऐसे हैं जिनका नाम अवॉर्ड सूची में नहीं था, फिर भी उनके नाम पर मुआवजा भुगतान दर्ज कर दिया गया।
इसके विपरीत कुछ ऐसी जमीनें भी शामिल कर ली गईं, जो वास्तव में सड़क या परियोजना की सीमा में आती ही नहीं थीं। ग्रामीणों ने इसे संभावित फर्जी भुगतान और रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने का दबाव, बिल्डर पर भी आरोप
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिग्रहण के बाद बची हुई जमीन को सस्ते दामों पर खरीदने के लिए कुछ बिल्डरों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है।
एक ग्रामीण महेश सिन्हा ने शिकायत में कहा कि कई जगह अधिग्रहण के नक्शों में बदलाव करके निजी जमीनों को प्रभावित दिखाया गया, जिससे कुछ खास लोगों को फायदा मिल सके। ग्रामीणों का दावा है कि सीमांकन और नक्शा प्रक्रिया में भी अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी तकनीकी जांच जरूरी है।
ACB से न्यायिक जांच की मांग
पूरा मामला सामने आने के बाद बड़ी संख्या में किसान एसीबी कार्यालय रायपुर पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। किसानों ने मांग की है कि :
पूरे भूमि अधिग्रहण की स्वतंत्र जांच हो
मुआवजा वितरण की फॉरेंसिक ऑडिट की जाए
पटवारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
बिल्डर और बिचौलियों की संलिप्तता स्पष्ट की जाए
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल, जांच पर टिकी नजर
इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतमाला जैसी राष्ट्रीय परियोजना में इस तरह के आरोप न केवल स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा करते हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर डालते हैं। अब निगाहें ACB और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में रिकॉर्ड में हेरफेर हुआ है या नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
देवादा गांव में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर विवाद
किसानों का आरोप: रिश्वत न देने पर जमीन को बंजर/असिंचित दिखाया गया
मुआवजा बढ़ाने के बदले 2–3 लाख रुपए मांगने का दावा
खसरा और भुगतान रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप
मामले की शिकायत ACB रायपुर में दर्ज, जांच की मांग तेज
निष्कर्ष
देवादा गांव के किसानों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और यदि ये साबित होते हैं, यह मामला दिखाता है कि जमीन अधिग्रहण के नियमों और तौर-तरीकों में बड़े सुधार की बहुत जरूरत है। फिलहाल ग्रामीण न्याय और पारदर्शी जांच की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
FAQ
- भारतमाला परियोजना में किसानों ने क्या आरोप लगाए हैं?
किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। उपजाऊ जमीन को बंजर दिखाकर कम मुआवजा दिया गया और कुछ मामलों में रिश्वत की मांग भी हुई। - क्या मामले में किसी अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप है?
हां, किसानों का दावा है कि पटवारी और कुछ राजस्व अधिकारियों द्वारा मुआवजा बढ़ाने के बदले 2 से 3 लाख रूपए तक की मांग की गई थी। - अब इस मामले में क्या कार्रवाई की मांग की गई है?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की ACB जांच, भूमि का दोबारा मूल्यांकन और मुआवजा वितरण की न्यायिक जांच की मांग की है।
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