बिलासपुर मुआवजा घोटाला : फर्जी सर्पदंश रिपोर्ट से 17 करोड़ की हेराफेरी
Umeshwari Baghel | Jun 14, 2026, 12:26 IST
सर्पदंश मुआवजा घोटाला
बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि 17 मामलों में जहर से हुई मौतों को सांप काटने का मामला दिखाकर करीब 17 करोड़ रुपए का फर्जी मुआवजा लिया गया। डॉक्टरों और वकीलों के सिंडिकेट पर FIR की तैयारी है।
NEWS IN SHORT
- बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला: 17 करोड़ की फर्जीवाड़े की जांच तेज
- जहर से हुई मौतों को सांप काटने में बदलकर बनाया गया बड़ा रैकेट
- डॉक्टर और वकीलों की मिलीभगत से सरकारी सिस्टम में सेंध
- 17 मामलों में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मुआवजा हड़पने का आरोप
- प्रशासन ने शुरू की FIR दर्ज करने की प्रक्रिया
NEWS IN DETAIL
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 17 मामलों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। इन मामलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी बदला गया, ताकि इन्हें सांप काटने से हुई मौत साबित किया जा सके। इस तरीके से लगभग 17 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी राहत राशि जारी कराई गई।
विधानसभा में उठा मामला, फिर शुरू हुई उच्च स्तरीय जांच
जांच के शुरुआती निष्कर्षों में संगठित भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कोई सामान्य गड़बड़ी नहीं बल्कि एक संगठित रैकेट का हिस्सा हो सकता है, जो लंबे समय से सक्रिय था। इस नेटवर्क का दायरा सिम्स और जिला अस्पताल तक फैले होने की आशंका भी जताई जा रही है।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेजों से खुली पोल
इन बदलावों का उद्देश्य केवल एक था, सरकारी मुआवजा प्राप्त करना। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर करीब 60 लाख रुपए से अधिक की व्यक्तिगत राशि हड़पने की पुष्टि भी प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई है, जबकि कुल आंकड़ा कई करोड़ तक पहुंचता है।
जशपुर और बिलासपुर के आंकड़ों में बड़ा अंतर
इसके उल्टा बिलासपुर जिले में 431 मौतें दर्ज कर लगभग 17 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बांट दी गई। यह असामान्य अंतर ही पूरे मामले की जांच का मुख्य आधार बना।
अधिकारियों का मानना है कि अगर मृत्यु के कारण वास्तविक रूप से सर्पदंश होते, तो यह अंतर इतना असामान्य नहीं होता। इसी वजह से पूरे मामले में जांच की जरूरत महसूस की गई।
डॉक्टरों और वकीलों की भूमिका पर सवाल
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित सिस्टम की तरह काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग स्तर पर लोग शामिल थे। कुछ लोगों का काम दस्तावेज तैयार करना था, तो कुछ का काम केस को वैध दिखाकर मुआवजा स्वीकृत कराना था।
प्रशासन ने शुरू की FIR की तैयारी
इसके साथ ही जिन डॉक्टरों, वकीलों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन की हेराफेरी करने वालों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा।
सर्पदंश मुआवजा प्रणाली पर भी उठे सवाल
अब प्रशासन इस बात की भी समीक्षा कर रहा है कि मुआवजा केवल पोस्टमार्टम के बजाय स्वतंत्र मेडिकल सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाए।
आगे की जांच निर्णायक मोड़ पर
अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं और यह मामला राज्य के सबसे बड़े मेडिकल-फाइनेंशियल घोटालों में से एक साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
FAQ
- बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला क्या है?
यह मामला फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े मुआवजा घोटाले का है। - कितनी राशि का घोटाला सामने आया है?
जांच में करीब 17 करोड़ रूपए की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। - कितने मामलों में गड़बड़ी पाई गई?
कुल 17 मामलों में फर्जी दस्तावेज और रिपोर्ट मिले हैं। - इसमें किनकी भूमिका पर सवाल है?
डॉक्टरों और वकीलों के एक सिंडिकेट की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
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