अम्बिकापुर जमीन कांड ; सर्टिफिकेट किसी और का, मौत किसी और की, जमीन माफिया की
NEWS IN SHORT
- मृत्यु प्रमाण पत्र में टेम्परिंग कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
- राजस्व विभाग ने बिना जांच किए जमीन की फौती चढ़ा दी।
- महज सात दिनों के भीतर करोड़ों की जमीन की रजिस्ट्री हुई।
- पहचानकर्ता ही जालसाजी के बाद जमीन का नया मालिक बना।
- नगर निगम ने मामले की गंभीरता देख FIR की मांग की।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में भू-माफियाओं के दुस्साहस और राजस्व विभाग की मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ 10 करोड़ रुपए से अधिक की बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए फर्जी डेथ सर्टिफिकेट का सहारा लिया गया। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ जिसमे जालसाजों ने नगर निगम द्वारा जारी एक मूल मृत्यु प्रमाण पत्र में टेम्परिंग कर उसे दूसरे व्यक्ति के नाम पर बदल दिया और करोड़ों का खेल कर दिया।
फर्जीवाड़े का पूरा खेल
यह पूरा मामला नए बस स्टैंड के पास स्थित रिंग बांध इलाके की जमीन से जुड़ा है। यह जमीन मूल रूप से जयलाल नामक व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी। जमीन को हथियाने के लिए भू-माफियाओं ने जयलाल के नाम पर दो अलग-अलग डेथ सर्टिफिकेट पेश किए।
पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
जो डेथ सर्टिफिकेट नगर निगम से जारी बताया गया, वह वास्तव में कामता प्रसाद श्रीवास्तव की मृत्यु पर जारी हुआ था। भू-माफियाओं ने इसमें टेम्परिंग की और इसे जयलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया। इतना ही नहीं राजस्व अधिकारियों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या दस्तावेजों की जांच किए, इस फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर जमीन का नामांतरण जयलाल के वारिसों के नाम पर चढ़ा दी। नामांतरण चढ़ने के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही, इस करोड़ों की जमीन की रजिस्ट्री आजाद इराकी नामक व्यक्ति के नाम पर कर दी गई।
पहचानकर्ता ही बना जमीन का मालिक
इस घोटाले की सबसे गंभीर बात यह है कि फर्जी डेथ सर्टिफिकेट में जिस व्यक्ति ने 'पहचानकर्ता' के रूप में हस्ताक्षर किए थे, वही व्यक्ति अब जमीन का नया मालिक बन बैठा है। शिकायतकर्ता कैलाश मिश्रा ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
कार्रवाई की मांग और निगम का रुख
अम्बिकापुर नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि उनके रिकॉर्ड में सर्टिफिकेट किसी और के नाम पर है और जमीन दलालों ने कूटरचना (Forgery) कर इसे बदला है। निगम प्रशासन ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए पुलिस से दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल, इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भू-माफिया सिंडिकेट और इसमें शामिल भ्रष्ट अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।
निष्कर्ष
अम्बिकापुर का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामला प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। फर्जी डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर करोड़ों की जमीन का नामांतरण और तत्काल रजिस्ट्री बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और जमीन की बंदरबांट रोकने के लिए उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
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