फरहदा और नवा रायपुर में सरकारी जमीनों पर अवैध प्लॉटिंग; 500 एकड़ पर कब्जा, अब सीमांकन के बाद चलेगा बुलडोजर
Umeshwari Baghel | Apr 26, 2026, 18:45 IST
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राजधानी में 500 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। कलेक्टर ने सभी तहसील अधिकारियों को अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
NEWS IN SHORT
- राजधानी में 500 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा
- कलेक्टर ने अवैध कब्जों पर सख्ती दिखाने का दिया आदेश
- फरहदा गांव में 300 एकड़ जमीन पर कब्जा, ग्रामीणों का विरोध
- सरकारी जमीन पहचानने के लिए ऑनलाइन रिकार्ड का इस्तेमाल करें
- लंबित मामलों पर प्रशासन ने उठाया सख्त कदम
NEWS IN DETAIL
कि इन मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन मामलों की जांच लंबित है, और इस कारण ना तो कब्जे हटाए गए हैं, और ना ही इन जमीनों पर कोई नया निर्माण शुरू हो पाया है।
कलेक्टर ने की सख्ती
जिन मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, उन पर अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके अलावा, लापरवाही करने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन तक की अनुशंसा हो सकती है।
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की सूची
इन जमीनों को पहले सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया था, जैसे कि चारागाह, खेल मैदान, तालाब और मुक्तिधाम, लेकिन अब शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी कर इन पर प्लॉटिंग और अन्य निर्माण किए गए हैं।
फरहदा गांव में 300 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा
लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसके कारण गांववालों को शव दफनाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। सरपंच का कहना है
कि अब तालाब पार शवों को दफनाया जा रहा है, जबकि गांव की सारी जमीन सरकारी है और इसका प्रमाण भी दस्तावेजों में मौजूद है।
कैसे पता करें जमीन सरकारी है या नहीं
इसके लिए भुईंयां एप या राज्य की अधिकृत वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है। खसरा नंबर डालकर आप खातेदार का नाम चेक कर सकते हैं।
अगर दस्तावेज में शासन, नगर निगम/पालिका, ग्राम सभा/पंचायत या नजूल लिखा है, तो यह सरकारी जमीन मानी जाती है। साथ ही, घास भूमि, चरागाह, बंजर, आबादी या रास्ता जैसी श्रेणियाँ सरकारी जमीन को दर्शाती हैं।
वर्षों से लंबित जांच और कार्रवाई
अब तक इस पर एसडीएम ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। फरहदा गांव में 300 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत कलेक्टर तक पहुंच चुकी है
लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मंदिरहसौद के कुछ गांवों में भी करीब 70 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था, लेकिन अब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई है।
प्रशासन का उद्देश्य
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