अमित जोगी की कांग्रेस में वापसी पर महंत की हां, भूपेश-टीएस का विरोध, बैज न्यूट्रल

Arun Tiwari | Sept 22, 2026, 17:08 IST
अमित जोगी की कांग्रेस में वापसी अटकी
अमित जोगी की कांग्रेस में वापसी को लेकर छत्तीसगढ़ में नेताओं के अलग-अलग रुख सामने आए हैं। चरणदास महंत ने वापसी का समर्थन किया है, जबकि भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने इसका विरोध किया है।

कांग्रेस में अमित जोगी और रेणु जोगी की वापसी में बड़ा पेंच फंसा हुआ है। अनुशासन समिति की बैठक होती है लेकिन जोगी की कांग्रेस में वापसी के आवेदन पर फैसला हर बार लटक जाता है। अब यह फैसला दिल्ली के हाथों में है। हाल ही में हुई अनुशासन समिति की बैठक में 36 नेताओं के आवेदन पर चर्चा हुई जिनमें से 20 को वापस कांग्रेस में ले लिया गया। लेकिन अमित और रेणु की वापसी और जोगी कांग्रेस के विलय पर बात ही नहीं हुई।



हर बार यह मामला पेंडिंग में चला जाता है। जोगी की वापसी में सबसे बड़ा पेंच कि कांग्रेस के दिग्गज नेता आपस में एक मत नहीं हैं। कोई वापसी की वकालत कर रहा है तो कोई विरोध पर आमादा है। द सूत्र आपको बता रहा है जोगी के पेंच की इनसाइड स्टोरी।



कौन साथ, कौन विरोध में :

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी जब तक थे तब तक उनकी छत्तीसगढ़ जनता पार्टी प्रदेश में अपना असर रखती थी। इसी पार्टी के बैनर तले रेणु जोगी और अमित जोगी एक से ज्यादा बार विधायक बने। कुछ अन्य भी इस पार्टी से विधानसभा पहुंचे। लेकिन जोगी के निधन के बाद अब यह पार्टी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।



करीब साल भर पहले अमित जोगी और रेणु जोगी ने कांग्रेस में वापसी का आवेदन दिया और छत्तीसढ़ जनता कांग्रेस जे का विलय कांग्रेस में करने को भी कहा। लेकिन यह आवेदन लटका हुआ है और इस पर फैसला नहीं हो पा रहा। सूत्रों की मानें तो नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत चाहते हैं कि अमित जोगी को कांग्रेस में शामिल किया जाए। लेकिन आपस में असहमति रखने वाले दो बड़े नेता इस मामले में एक सुर हो गए हैं।



पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव इस बात के घोर विरोधी हैं कि जोगी को वापस कांग्रेस में लिया जाए। वहीं प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज इस मामले में तटस्थ है। उनकी अपनी कोई स्पष्ट राय नहीं है। यही कारण है कि अनुशासन समिति की बैठक में अमित जोगी के आवेदन पर चर्चा ही नहीं होती।



राहुल के कोर्ट में जोगी की गेंद :

अमित जोगी के कांग्रेस में वापसी की गेंद अब राहुल गांधी के पाले में है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से जोगी परिवार के बहुत करीबी रिश्ते रहें। गांधी परिवार की नजदीकी के कारण ही अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले सीएम बने थे। सूत्र कहते हैं कि अब सोनिया गांधी पार्टी के फैसलों में सीधी दखल नहीं देती हैं।



वहीं राहुल गांधी की अभी इस विषय में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। कांग्रेस के लंबे समय तक प्रभारी रहे सचिन पायलट भी इस गुत्थी को नहीं सुलझा पाए। अब नए प्रभारी सुखदेव भगत का 27 सितंबर को रायपुर का पहला दौरा हो रहा है। सुखदेव भगत इस संबंध में पार्टी के नेताओं से बात कर सकते है।



इसके बाद अक्टूबर में होने वाली अनुशासन समिति की बैठक में अमित जोगी की वापसी के बारे में चर्चा हो सकती है। यदि राहुल गांधी की हरी झंडी मिलती है तो अमित जोगी की घर वापसी हो सकती है। इससे पहले सभी नेताओं को एक राय करना जरुरी होगा।



जोगी क्यों जरुरी :

कांग्रेस के अंदर सवाल अब यह है कि आखिर अमित जोगी जरुरी क्यों है। कांग्रेस में बागी नेताओं की वापसी के पीछे कारण दिया जा रहा है कि पार्टी अपने सभी नेताओं के साथ एकजुट होकर बीजेपी से मुकाबला करेगी और सत्ता में लौटेगी। यही कारण है कि अमित जोगी की वापसी की चर्चाएं फिर होने लगी है।



कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि आखिर अमित जोगी की वापसी क्यों होनी चाहिए। वे अब एक सीट भी अपने दम पर नहीं जीत सकते हैं। उनकी जो पार्टी विरोधी गतिविधियां रही हैं उनको कैसे भुलाया जा सकता है। जब अमित जोगी के सामने वजूद का ही संकट है तो फिर कांग्रेस को उनकी वापसी से क्या फायदा होगा जो इस बारे में इतनी गंभीरता से विचार किया जाए।



वहीं अमित जोगी कहते रहे हैं कि उन्होंने वापसी और अपनी पार्टी के विलय का प्रस्ताव कांग्रेस को दिया है। कांग्रेस एकजुट होकर ही बीजेपी का मुकाबला कर सकती है।



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