लोकसभा में बोले अमित शाह- भूपेश बघेल से पूछो.. प्रूफ दूं कुछ यहां.. हां बोलो नहीं तो फंस जाओगे

Arun Tiwari | Mar 30, 2026, 23:40 IST
Photograph: (the sootr)
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदलते ही नक्सलवाद पर लगाम लगी है। अब 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त होगा।

रायपुर : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर सरकार की रणनीति और उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, स्पष्ट जिम्मेदारियां और “ऑल एजेंसी अप्रोच” अपनाने से नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार हुआ है। अमित शाह ने बताया कि सरकार ने नक्सलियों की फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर भी सख्ती से कार्रवाई की। साथ ही पुनर्वास योजनाएं लागू कीं ताकि प्रभावित क्षेत्रों में विकास की कोई कमी न रहे।



भूपेश बघेल को प्रूफ दूं क्या

उन्होंने तीन अहम तारीखों 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 का जिक्र करते हुए बताया कि 2019 में गृह मंत्रालय की बैठक में पूर्व नक्सलियों को खुफिया नेटवर्क से जोड़ने जैसी रणनीतियां बनाई गईं। शाह ने आरोप लगाया कि उस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार के कारण कार्रवाई में देरी हुई। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, “भूपेश बघेल से पूछो, क्या मैं यहां प्रूफ दूं?” इस बयान पर सदन में हंगामा भी हुआ। अमित शाह ने कहा कि यहां हां बोलो वरना फंस जाओगे।



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सरकार बदली तो तस्वीर बदली

अमित शाह ने आगे कहा कि 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद राज्य सरकार ने पूरा सहयोग दिया। जिसके बाद 24 अगस्त 2024 को केंद्र ने घोषणा की कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब राज्य की मौजूदगी हर गांव तक पहुंच चुकी है और पंचायतों का गठन हो चुका है, जो नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण है।



नक्सलियों से बातचीत नहीं, विकास से जवाब दिया

अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि नक्सली लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते और वोट के बजाय हिंसा के जरिए सत्ता हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अब तक हजारों जवान शहीद हुए हैं। उन्होंने नक्सलियों पर आरोप लगाया कि वे बच्चों का अपहरण कर उन्हें हथियार उठाने पर मजबूर करते हैं और किसानों के खेतों में विस्फोटक बिछाकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं।



शाह ने कहा कि कुछ लोग नक्सलियों के समर्थन में लेख लिखते हैं, लेकिन वे इसे मानवतावाद नहीं मानते। उनके मुताबिक, असली मानवतावाद आदिवासियों, बच्चों और किसानों की सुरक्षा में है, न कि हिंसा का समर्थन करने में।



सलवा जुडूम का जिक्र

सलवा जुडूम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद जब हथियार वापस लिए गए, तो नक्सलियों ने इससे जुड़े लोगों को निशाना बनाकर हत्या की। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विचारधारा कभी जनता और आदिवासियों की सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती।



सड़क, मोबाइल और बैंकिंग से बदली तस्वीर

अमित शाह ने विकास कार्यों का ब्यौरा देते हुए बताया कि 2014 के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया।



  • 17,589 किमी सड़कों को मंजूरी, जिनमें से 12,000 किमी बन चुकी, 20,000 करोड़ रुपए खर्च
  • 5,000 मोबाइल टावर स्थापित, 8,000 और लगाने की योजना
  • 1,804 बैंक शाखाएं, 1,321 एटीएम और 6,025 डाकघर खोले गए
  • 259 एकलव्य विद्यालय, आईटीआई और कौशल विकास केंद्र स्थापित
  • जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी बनाया गया है
  • आदिवासी युवाओं के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किए गए हैं।

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नक्सलियों पर सख्त एक्शन

अमित शाह ने कहा कि पहले विकास कार्यों को नक्सली हिंसा से बाधित किया जाता था, लेकिन अब सरकार ने नक्सलियों पर सख्त कार्रवाई कर विकास का रास्ता साफ किया है। हमने नक्सलियों से बातचीत नहीं की, बल्कि उन्हें खत्म कर विकास को आगे बढ़ाया।



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