PCCF बने अरुण पांडे, पी श्रीनिवास राव की लेंगे जगह, आदेश जारी, द सूत्र ने सोमवार शाम को ही किया था खुलासा
छत्तीसगढ़ के वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हो गया है। अरुण पांडे को राज्य का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक यानी PCCF और वन बल प्रमुख नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को इसका आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। खास बात यह है कि इस नियुक्ति की जानकारी द सूत्र ने सोमवार शाम को ही अपने पाठकों को दे दी थी। अब सरकार के आदेश के बाद उस खबर पर मुहर लग गई है।
पी श्रीनिवास राव की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी
अरुण पांडे अब पी श्रीनिवास राव की जगह लेंगे। वन विभाग के सबसे बड़े पद पर उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। अब प्रदेश के जंगलों, वन्यजीव संरक्षण और वन प्रशासन से जुड़े बड़े फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। विभागीय अधिकारियों के बीच इस बदलाव को लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही।
सोमवार को ही सामने आ गया था नाम
वन विभाग में PCCF पद के लिए चल रही कवायद के बीच द सूत्र ने सोमवार शाम को ही अरुण पांडे के नाम की जानकारी प्रकाशित कर दी थी। डीपीसी के बाद से ही मंत्रालय और वन मुख्यालय में उनके नाम पर सहमति की चर्चा तेज हो गई थी। आखिरकार वही नाम फाइनल हुआ और सरकार ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया।
वन विभाग में अनुभव का बड़ा फायदा
अरुण पांडे लंबे समय से वन प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें फील्ड और प्रशासन दोनों स्तरों का अनुभव माना जाता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी कार्यशैली तेज फैसले लेने वाली रही है। यही वजह है कि सरकार ने उन्हें वन बल प्रमुख जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
नए PCCF के रूप में अरुण पांडे के सामने कई अहम चुनौतियां रहेंगी। प्रदेश में वन संरक्षण, अवैध कटाई रोकना, वन्यजीव सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दे लगातार बड़े होते जा रहे हैं। इसके अलावा जंगलों में विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच तालमेल बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।
वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस
छत्तीसगढ़ में टाइगर रिजर्व, हाथी कॉरिडोर और जैव विविधता से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं। ऐसे में नए वन बल प्रमुख के तौर पर अरुण पांडे से वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई रणनीति की उम्मीद की जा रही है। विभागीय स्तर पर माना जा रहा है कि आने वाले समय में मॉनिटरिंग और फील्ड एक्शन को और मजबूत किया जा सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर बड़ा संदेश
सरकार की इस नियुक्ति को केवल रूटीन बदलाव नहीं माना जा रहा। इसे वन विभाग में प्रशासनिक संतुलन और नई कार्यशैली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में विभागीय कामकाज में तेजी और जवाबदेही दोनों बढ़ सकती हैं।
वन महकमे में दिनभर चली चर्चा
सरकार का आदेश जारी होते ही वन विभाग के मुख्यालय से लेकर फील्ड दफ्तरों तक चर्चा का दौर शुरू हो गया। कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे विभाग के लिए अहम फैसला बताया। वहीं द सूत्र की पहले से की गई खबर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
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