छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन की खुली पोल, पहले फॉल्स सीलिंग, अब दीवार की टाइल्स भरभराकर गिरीं
ताजा घटना ग्राउंड फ्लोर पर बी ब्लॉक से ए ब्लॉक की ओर जाने वाले मार्ग में स्टेशनरी शाखा के पास हुई। यहां दीवार पर लगी करीब 10 फीट लंबी टाइल्स का हिस्सा अचानक गिर गया। राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद मौके पर दीवार से उखड़ी हुई टाइल्स और फर्श पर बिखरा मलबा दिखाई दिया।
विधानसभा जैसे अति महत्वपूर्ण और संवेदनशील सरकारी भवन में लगातार इस तरह की घटनाओं के सामने आने से अब सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि पूरे भवन की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
तीन महीने में तीन घटनाएं
नए विधानसभा भवन में निर्माण संबंधी समस्या का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जुलाई 2026 में मुख्य हॉल से लगे एक अधिकारी के कमरे की फॉल्स सीलिंग गिर गई थी। घटना के दौरान सीलिंग के साथ स्टील के पाइप भी नीचे आ गए थे। उस समय भी गनीमत रही कि कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। इसके बाद सितंबर के आखिरी दिनों में भवन के बी-7 कक्ष में एक बार फिर फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना सामने आई।
इस हादसे में एक कर्मचारी के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। तीन महीने के भीतर फॉल्स सीलिंग गिरने की दो घटनाओं के बाद अब दीवार की टाइल्स का बड़ा हिस्सा गिरने से भवन की फिनिशिंग और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
उद्घाटन के एक साल के भीतर लगातार घटनाएं
छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था। लगभग 51 एकड़ के परिसर में निर्मित इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस और ग्रीन बिल्डिंग के तौर पर विकसित किया गया है। इसकी निर्माण लागत करीब 324 करोड़ रुपये बताई गई है।
ऐसे में उद्घाटन के महज करीब 11 महीने के भीतर भवन में सीपेज, फॉल्स सीलिंग गिरने और अब दीवार की टाइल्स उखड़कर गिरने जैसी घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर तब जब भवन को आधुनिक तकनीक और बेहतर निर्माण मानकों के अनुरूप तैयार किए जाने का दावा किया गया था।
RTI के जरिए भी उठ चुके हैं सवाल :
नए विधानसभा भवन में पहली फॉल्स सीलिंग गिरने के बाद सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी भी चर्चा में आई थी। सामने आई जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग से भवन के उपयोगिता प्रमाण पत्र समेत तकनीकी स्वीकृतियों और फायर एनओसी से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई थी। उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने से जुड़े जवाब ने भी भवन की औपचारिकताओं और तकनीकी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए थे।
अब जब उसी भवन में लगातार अलग-अलग हिस्सों में टूट-फूट की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या भवन का व्यापक तकनीकी और सुरक्षा ऑडिट कराया गया है या नहीं।
सिर्फ मरम्मत से चलेगा काम
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने विधानसभा भवन में यदि निर्माण या फिनिशिंग से जुड़ी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं तो इसकी स्थायी वजह क्या है। क्या केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी या पूरे भवन की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी।फॉल्स सीलिंग गिरने के बाद अब दीवार की टाइल्स का हिस्सा गिर चुका है।
फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन विधानसभा भवन में रोजाना अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे में छोटी दिखने वाली निर्माण संबंधी खामी भी भविष्य में गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
लगातार हो रही घटनाओं के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग इस मामले को महज स्थानीय मरम्मत तक सीमित रखता है या भवन की गुणवत्ता, संरचनात्मक सुरक्षा, फिनिशिंग और निर्माण मानकों की व्यापक जांच कराकर जिम्मेदारी भी तय करता है।