बैलाडीला में केंद्र ने दी खनन की मंजूरी, स्थानीय लोगों का विरोध दरकिनार

Arun Tiwari | Jan 11, 2026, 22:30 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ के बैलाडीला में खनन को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है, जबकि स्थानीय आदिवासी और राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बैलाडीला में खनन विस्तार के लिए 874.924 हेक्टेयर भूमि को मंजूरी दी।
  • एनएमडीसी का लौह अयस्क उत्पादन बढ़ाकर 11.30 मिलियन टन से 14.50 मिलियन टन प्रति वर्ष किया जाएगा।
  • स्थानीय आदिवासी और संगठनों ने खनन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जल स्रोतों और पेड़ों पर खतरे की आशंका।
  • बैलाडीला क्षेत्र में 558.84 मिलियन टन लौह अयस्क का भंडार मौजूद है, जिसमें से 351.32 मिलियन टन खनन योग्य है।
  • मार्च 2020 में पहले ही वन स्वीकृति मिल चुकी थी, जो 2037 तक वैध रहेगी।

NEWS IN DETAIL

RAIPUR. छत्तीसगढ़ में विरोध की आग के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दंतेवाड़ा ज़िले में स्थित बैलाडीला वन क्षेत्र में खनन को मंज़ूरी दे दी है। इस मंजूरी के तहत एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन) को बैलाडीला क्षेत्र में 874.924 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस फैसले का स्थानीय आदिवासी समुदाय और विभिन्न संगठनों ने विरोध किया है।



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आदिवासी कर रहे हैं विरोध

स्थानीय आदिवासी और विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों ने बैलाडीला पहाड़ों में खनन विस्तार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की बैठक में बैलाडीला लौह अयस्क खदान से जुड़े इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।



इस प्रस्ताव के तहत लौह अयस्क का वार्षिक उत्पादन 11.30 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़ाकर 14.50 एमटीपीए किया जाएगा। जबकि अपशिष्ट उत्खनन (वेस्ट एक्सकेवेशन) को 2.70 एमटीपीए से बढ़ाकर 15.39 एमटीपीए करने का प्रस्ताव है।



आरक्षित वन क्षेत्र है बैलाडीला

बैलाडीला आरक्षित वन एक पर्वतीय वन क्षेत्र है, जो उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के विशाल भंडार के लिए जाना जाता है। इसकी पहचान बैल की कूबड़ जैसी विशिष्ट पर्वत चोटियों से होती है। इस क्षेत्र में 558.84 मिलियन टन (एमटी) हेमेटाइट (लौह अयस्क) के भूवैज्ञानिक भंडार मौजूद हैं। जिनमें से 351.32 एमटी को खनन योग्य भंडार के रूप में वर्गीकृत किया गया है.



एनएमडीसी को इससे पहले मार्च 2020 में इस भूमि के लिए वन स्वीकृति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) मिल चुकी थी। जो 17 वर्षों के लिए वैध है और सितंबर 2037 में समाप्त होगी।



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खनन से पर्यावरण को खतरा

बैलाडीला खदान खनन विस्तार से पर्यावरण को खतरा हो सकता है। विशेष रूप से प्राचीन पेड़ों और स्थानीय जल स्रोतों को लेकर चिंता जताई जा रही है। 5 जनवरी से दंतेवाड़ा में स्थानीय युवाओं और कई राजनीतिक संगठनों ने इस खनन प्रस्ताव के खिलाफ नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। उनका कहना है कि इससे जल स्रोतों, पुराने पेड़ों और दुर्लभ वन्यजीवों को गंभीर खतरा होगा।



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