छत्तीसगढ़ में बैंक बंद : 5-डे वर्किंग की मांग को लेकर सड़कों पर हजारों कर्मचारी
समझें क्या है पूरा मामला
- 5 डे वर्किंग की मांग पर बैंककर्मियों का बड़ा प्रदर्शन
- रायपुर से बिलासपुर तक सड़कों पर उतरे हजारों बैंक कर्मचारी
- बैंक हड़ताल से प्रदेशभर में प्रभावित हुईं सेवाएं
- UFBU के आह्वान पर कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज
- मांग पूरी नहीं हुई तो आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
Raipur : छत्तीसगढ़ में 11 सितंबर को हुई बैंक हड़ताल का प्रदेशभर में असर देखने को मिला। रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर समेत कई शहरों में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पांच दिन का वर्किंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।
छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर हुई इस देशव्यापी हड़ताल में प्रदेश के हजारों बैंक कर्मचारी शामिल हुए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ कई निजी बैंक और ग्रामीण बैंक के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हुए। कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की मांग लंबे समय से लंबित है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
रायपुर में 1500 से ज्यादा बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतरे
राजधानी रायपुर में हड़ताल का सबसे बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। यहां करीब 1500 से ज्यादा बैंक कर्मचारी और अधिकारी मोतीबाग चौक पर जमा हुए। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन में महिला और युवा बैंक कर्मचारियों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। कर्मचारियों ने कहा कि लगातार बढ़ते काम के दबाव के बीच सप्ताह में पांच दिन काम करने की व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सकेगा।
मोतीबाग चौक पर कई घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान बैंक यूनियन नेताओं ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना था कि बैंक कर्मचारियों की मांग कोई नई नहीं है और इस पर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है।
दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में भी दिखा आंदोलन का असर
राजधानी के अलावा दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में भी बैंक कर्मचारी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए। दुर्ग-भिलाई में करीब 700 से अधिक कर्मचारियों ने रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं बिलासपुर में 600 से ज्यादा बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतरे।
इसके अलावा जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, धमतरी, बालोद, कांकेर, अंबिकापुर, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, बलौदाबाजार और राजनांदगांव जैसे शहरों में भी बैंक यूनियनों ने प्रदर्शन किए।
कर्मचारियों ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू होने से न सिर्फ कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
IBA की सहमति के बाद भी लागू नहीं हुआ फैसला
बैंक यूनियनों का कहना है कि पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह को लेकर भारतीय बैंक संघ (IBA) पहले ही सहमति दे चुका है। यूनियनों के मुताबिक दिसंबर 2023 और मार्च 2024 में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद अनुशंसा भी की गई थी।
इसके बावजूद सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी नहीं मिलने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से मांग रखे जाने के बाद भी इस मामले को टाला जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि कई देशों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है। भारत में भी बैंक कर्मचारियों को यह सुविधा मिलनी चाहिए।
हड़ताल से पहले हुई बातचीत भी रही बेनतीजा
बैंक हड़ताल से पहले 8 और 9 सितंबर को श्रम विभाग की मौजूदगी में सुलह वार्ता आयोजित की गई थी। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और बैंक यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
हालांकि, बातचीत के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। यूनियन नेताओं के अनुसार सरकार की ओर से पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया। इसके बाद हड़ताल का फैसला जारी रखा गया।बैंक कर्मचारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आगे भी बड़े आंदोलन की तैयारी
UFBU ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आने वाले समय में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। यूनियन के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को फिर से देशव्यापी बैंक हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी चेतावनी दी गई है। कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और सरकार से जल्द निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर
बैंक हड़ताल का असर आम ग्राहकों पर भी देखने को मिला। शाखाओं में होने वाले नियमित काम, नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं। हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल लेनदेन जैसी सुविधाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।
बैंक यूनियनों का कहना है कि उनका आंदोलन कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ बेहतर बैंकिंग व्यवस्था के लिए भी है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पर कोई फैसला लिया जाता है या नहीं।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में बैंक हड़ताल क्यों की गई थी?
बैंक कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह (5 डे वर्किंग) लागू करने की मांग को लेकर 11 सितंबर को हड़ताल की थी। - बैंक हड़ताल का छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा असर कहां देखने को मिला?
रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर समेत कई शहरों में बैंक कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए और बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। - क्या बैंक हड़ताल के बाद फिर से आंदोलन हो सकता है?
हां, बैंक यूनियनों ने मांग पूरी नहीं होने पर 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल और आगे अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।
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