छत्तीसगढ़ महासमुंद पंचायत में वित्तीय घोटाला, जांच के दौरान हुआ हंगामा
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना जनपद से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ की ग्राम पंचायत माधोपाली में भारी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। आरोपों की जांच के लिए चार सदस्यीय प्रशासनिक टीम गाँव पहुंची थी। जांच के दौरान शिकायतकर्ता पंच और सरपंच-सचिव के समर्थक आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई और स्थिति बेकाबू होते-होते बची।
माधोपाली पंचायत में भारी गड़बड़ी
बसना जनपद पंचायत के तहत आने वाली ग्राम पंचायत माधोपाली इन दिनों चर्चा में है। यहाँ सरकारी पैसों के दुरुपयोग और प्रशासनिक जांच को लेकर विवाद गहरा गया है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर आई राशि में हेराफेरी की बात कही गई है। इस मामले की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच टीम गठित की थी। चार सदस्यों की यह टीम जब सच जानने पंचायत भवन पहुंची, तो माहौल पूरी तरह बदल गया।
जांच टीम के सामने हंगामा
जांच दल के पंचायत भवन पहुंचते ही वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। एक तरफ शिकायत करने वाले पंच और स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। दूसरी तरफ वर्तमान सरपंच और सचिव के समर्थक खड़े थे। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। इसके चलते जांच स्थल का माहौल किसी अखाड़े जैसा नजर आने लगा।
अधिकारियों ने कराया शांत
बहस इतनी बढ़ गई कि कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सूझबूझ से काम लिया। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाने का काफी प्रयास किया। अधिकारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों गुटों को शांत कराया। इसके बाद ही जांच की आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकी। ग्रामीण इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
फर्जी बैठकों से निकाला पैसा
सरपंच उर्मिला बरिहा और सचिव वेदबाई चौहान पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पिछले डेढ़ साल से पंचों को कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्हें बिना बताए फर्जी बैठकें आयोजित की गईं। इसके साथ ही कागजों पर ही फर्जी प्रस्ताव तैयार कर लिए गए। पंचों की सहमति और जानकारी के बिना करीब 11 लाख रुपये की शासकीय राशि बैंक से आहरित कर ली गई। इस बड़ी राशि का उपयोग निजी हितों के लिए करने का आरोप है।
कागजों पर निपटाए सारे काम
शिकायत के अनुसार 15वें वित्त आयोग की राशि में यह कथित भ्रष्टाचारहुआ है। विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर मिली राशि को कागजों पर ही खर्च दिखा दिया गया। इसमें बोर मरम्मत, रोल पाइप और पानी टंकी का काम शामिल है। इसके अलावा पचरी सुधार, मुरमीकरण और पंचायत भवन की पुताई के नाम पर भी पैसे निकाले गए। धरातल पर इन कार्यों की स्थिति संदेहास्पद है, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है।
FAQ
- बसना के माधोपाली पंचायत में कितने रुपये के घोटाले का आरोप है?
उत्तर: माधोपाली ग्राम पंचायत में करीब 11 लाख रुपये की शासकीय राशि की वित्तीय गड़बड़ी और हेराफेरी का गंभीर आरोप लगा है। - माधोपाली पंचायत के सरपंच और सचिव का क्या नाम है?
उत्तर: इस मामले में वर्तमान महिला सरपंच उर्मिला बरिहा और पंचायत सचिव वेदबाई चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। - पंचायत में किन कार्यों के नाम पर फर्जी तरीके से राशि निकालने का आरोप है?
उत्तर: बोर मरम्मत, रोल पाइप, पानी टंकी, पचरी सुधार, मुरमीकरण और पंचायत भवन की पुताई के नाम पर फर्जी तरीके से राशि निकालने का आरोप है।
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