नक्सलवाद के बाद नई चुनौती, कलेक्टर, SP, DRG जवानों को मिल सकती है जिम्मेदारी

VINAY VERMA | Jun 24, 2026, 17:58 IST
पीसीसीएफ ने डीजीपी को लिखा पत्र
बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर होने के बाद अब जंगलों की सुरक्षा एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रही है। वन विभाग ने DRG जवानों को वन सुरक्षा कार्यों में लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे लेकर DGP को पत्र भेजा गया है।

बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चली लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद कई इलाकों में नक्सली प्रभाव कमजोर हुआ है। लेकिन अब सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिख रही है। यह चुनौती है बस्तर के घने जंगलों, वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा की।



इसी को लेकर वन विभाग ने एक अहम पहल शुरू की है, जिसके तहत जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों को वन सुरक्षा कार्यों में लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।



PCCF ने DGP को लिखा पत्र

सूत्रों के मुताबिक प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन अरुण कुमार पाण्डेय ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। पत्र में सुझाव दिया गया है कि नक्सल विरोधी अभियानों में तैनात रहे और स्थानीय परिस्थितियों से परिचित DRG जवानों की सेवाओं का उपयोग वन विभाग के मैदानी अमले के साथ किया जाए। इससे जंगलों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकेगा।



अब बढ़ सकता है अवैध कारोबार

इस प्रस्ताव के पीछे एक बड़ी चिंता भी बताई जा रही है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े एक्टिविस्ट नितिन सिंघवी ने शासन को भेजे गए अपने पत्र में आशंका जताई थी कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद जंगलों के भीतर अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना था कि जिन इलाकों में पहले नक्सलियों के डर से शिकारी, लकड़ी तस्कर और भूमाफिया प्रवेश नहीं कर पाते थे, वहां अब अवैध शिकार, पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ने की संभावना है।



बीट गार्ड के साथ जंगलों में करेंगे गश्त

प्रस्तावित योजना के तहत DRG जवानों को वन विभाग के बीट गार्ड, वनरक्षक और मैदानी अधिकारियों के साथ जोड़ा जा सकता है। बस्तर के दुर्गम इलाकों, पहाड़ियों और जंगलों की भौगोलिक जानकारी रखने वाले जवान सघन पेट्रोलिंग में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे वन अपराधों पर त्वरित कार्रवाई और दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।



कलेक्टर और एसपी को मिल सकती है अहम भूमिका

सूत्र बताते हैं कि यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जिला स्तर पर कलेक्टर और SP को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के संयुक्त प्रयास से अवैध उत्खनन, वन भूमि अतिक्रमण और वन्यजीव शिकार जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। इससे जंगलों की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त तंत्र विकसित होगा।



DGP की राय के बाद होगा अंतिम फैसला

वन विभाग ने DGP से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक राय मांगा है। शासन स्तर पर सुझाव के सभी पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद सरकार इस पर नीतिगत निर्णय ले सकती है। यदि ऐसा होता है तो नक्सलवाद के बाद बस्तर के जंगलों की सुरक्षा के लिए यह एक नई और महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकती है।



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